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चेना जंगल में शिकार के दौरान गोली लगने से सफाई कर्मचारी की मौत, डॉक्टर समेत छह गिरफ्तार

मीरा-भाईंदर के चेना गांव के जंगल में कथित रानडुक्कर के शिकार के दौरान गोली लगने से मनपा के सफाई कर्मचारी की मौत हुई। दो लोग घायल हैं।

चेना जंगल में शिकार के दौरान गोली लगने से सफाई कर्मचारी की मौत, डॉक्टर समेत छह गिरफ्तार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई की सीमा पर बसे मीरा-भाईंदर इलाके के चेना गांव के जंगल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, कथित तौर पर रानडुक्कर (जंगली सूअर) के शिकार के दौरान गोली लगने से मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के एक सफाई कर्मचारी की मौत हो गई। इस घटना में दो और लोग घायल हुए हैं।

मृतक का नाम विजय सुखरू सापटे (उम्र 60 साल) बताया गया है। वे चेना गांव के वेलकरी पाडा इलाके में रहते थे और मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। मामला इसलिए और गंभीर हो गया है कि आरोप है कि उनकी मौत के बाद पुलिस को खबर दिए बिना और पोस्टमॉर्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रानडुक्कर के शिकार के लिए छह लोग चेना गांव के जंगल में गए थे। जंगल पहुंचकर वे तीन-तीन के दो गुटों में बंट गए और अलग-अलग दिशाओं में शिकार के लिए घूमने लगे। रात के वक्त दोनों गुट एक-दूसरे के करीब आ गए। एक गुट के किसी शख्स के पास मौजूद बैटरी (टॉर्च) की रोशनी दूसरे गुट को दिखी। बताया जा रहा है कि अंधेरे में इस रोशनी को किसी जानवर की आंखें समझ लिया गया और गोली चला दी गई। यही गोली विजय सापटे को लगी और उनकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि इस घटना में कल्पेश ढगळा और कनाल शेलार घायल हुए हैं। जानकारी है कि दोनों को काशिमीरा के आशिष अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि गोलीबारी के हालात, घायलों की चोटों की प्रकृति और इस्तेमाल हुए हथियार के बारे में पुलिस की आधिकारिक जांच से ही तस्वीर साफ होगी।

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि गोली लगने से मौत के बाद आगे क्या हुआ। सवाल उठ रहे हैं कि क्या विजय सापटे की मौत की खबर पुलिस को फौरन दी गई थी, मौत की आधिकारिक एंट्री कैसे हुई और पोस्टमॉर्टम के बिना अंतिम संस्कार का फैसला किन हालात में लिया गया। पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ, इसलिए मौत की सही मेडिकल वजह तय करने के लिए जांच एजेंसियों को मौजूद सबूतों की गहराई से पड़ताल करनी होगी। हालांकि पुलिस से जानबूझकर जानकारी छिपाई गई थी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम नतीजा नहीं निकाला जा सकता।

डेथ सर्टिफिकेट को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। दावा किया जा रहा है कि सर्टिफिकेट में मौत की वजह हार्ट अटैक लिखी गई है। यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित डॉक्टर ने शव की सीधी जांच किए बिना वीडियो कॉल के जरिए सर्टिफिकेट दे दिया। जब गोली लगने की घटना हुई थी, तब मौत की वजह हार्ट अटैक किस आधार पर लिखी गई, यह सवाल उठ रहा है। इसमें कोई गड़बड़ी हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही तय होगा।

इस मामले में डॉक्टर राजेश पालांडे समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। महेश गायकर के साथ कातोड, बिस्तूर और लाभड जैसे कुछ नाम भी इस मामले से जुड़े बताए जा रहे हैं। लेकिन सभी आरोपियों के पूरे नाम, हर किसी की भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज अपराध की प्रकृति के बारे में पुलिस की आधिकारिक जानकारी आना बाकी है। गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं कि आरोप साबित हो गए हैं। हर किसी की भूमिका जांच में मिले सबूतों, बयानों और मेडिकल दस्तावेजों से ही साफ होगी।

गिरफ्तार डॉक्टर राजेश पालांडे के बारे में बताया जा रहा है कि वे शिवसेना के शिंदे गुट में सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि कुछ महीने पहले उन्हें डॉक्टर असोसिएशन का अध्यक्ष बनाया गया था और नियुक्ति का प्रमाणपत्र प्रताप सरनाईक के हाथों दिया गया था। इसके बाद उनके राजनीतिक और सामाजिक संबंधों की चर्चा शुरू हो गई है। पर राजनीतिक संबंध और इस मामले में उनकी कथित भूमिका अलग बातें हैं, और सिर्फ राजनीतिक संबंधों से अपराध में शामिल होने का कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता।

अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं: शिकार में इस्तेमाल हथियार का वैध लाइसेंस था या नहीं, गोली किसने चलाई, मौके पर मौजूद लोगों ने क्या देखा, और घटना के बाद पुलिस को बताने के लिए क्या किया गया। साथ ही घायलों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद क्या इलाज हुआ, मौत की एंट्री कैसे हुई और पोस्टमॉर्टम न कराने का फैसला किसने और किन हालात में लिया, इसकी भी पड़ताल जरूरी है। पूरी जांच के बाद ही साफ होगा कि गोलीबारी हादसा थी या इसके पीछे कोई और वजह थी। फिलहाल पूरे मीरा-भाईंदर इलाके की नजर इस जांच पर टिकी है।

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