चंद्रपुर कोर्ट ने नाबालिग से अत्याचार के 26 साल के दोषी को 20 साल की सख्त कैद सुनाई
धाबा पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में कोर्ट ने आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास और 6 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी।
गोंडपिपरी इलाके के एक मामले में चंद्रपुर की कोर्ट ने नाबालिग लड़की पर अत्याचार के आरोपी 26 साल के युवक को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला धाबा पुलिस स्टेशन की हद का है।
इस फैसले को बच्चों पर अत्याचार करने वालों के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई का साफ संदेश माना जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक धाबा पुलिस स्टेशन में गुनाह क्रमांक 5/2022 के तहत नाबालिग बच्ची पर अत्याचार का मामला दर्ज किया गया था। इस गंभीर मामले की जांच राजुरा के तत्कालीन उपविभागीय पुलिस अधिकारी राजा पवार ने की। जांच के दौरान जरूरी सबूत जमा किए गए और कोर्ट में आरोपपत्र दाखल किया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने रखे गए सबूतों के आधार पर आरोपी का जुर्म साबित हुआ। इसके बाद कोर्ट ने उसे यह कड़ी सजा सुनाई।
चंद्रपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. एम. गुप्ता ने इस मामले में फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास और 6 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी।
इस केस में राजा पवार जांच अधिकारी थे। सरकारी वकील के तौर पर एड. सुधाकर देगावार ने कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। कोर्ट पैरवी अधिकारी सफौ/452 सुधाकर आत्माराम कोहपरे, दंडक अधिकारी वीरेंद्र केदारे और चंद्रपुर के दोषसिद्धि कक्ष ने भी अहम मदद की।
यह कामयाबी पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे और राजुरा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी के मार्गदर्शन में मिली।
नाबालिग बच्चों पर यौन अत्याचार समाज के सामने एक गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में असरदार जांच, ठोस सबूत और कोर्ट में मजबूत पैरवी की बड़ी भूमिका होती है। चंद्रपुर कोर्ट के इस फैसले से बच्चों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर सामने आया है और यह भी साफ हुआ है कि ऐसे अपराधों के खिलाफ समाज को भी जागरूक रहना होगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।