बुधवार, 4 नवंबर 2026

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पुलिस अफसर की पत्नी ने छात्र को कुचला !

जुर्म PT24 टीम

जख्मी छात्र के नाबालिग होने का हवाला देकर बचने का प्रयास, चार दिन बाद भी एफआईआर नहीं, गिट्टीखदान पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

नागपुर.

शहर पुलिस के एक अधिकारी के पत्नी की कथित लापरवाह ड्राइविंग ने एक्टिवा सवार नाबालिग छात्र को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया. हादसे को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. आरोप है कि पुलिस अधिकारी की पत्नी होने के चलते कार चालक महिला को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. दूसरी ओर, गंभीर रूप से जख्मी छात्र के परिजन बेटा नाबालिग होने से न्याय के लिए पुलिस थाने नहीं जा रहे है.

घटना 1 नवंबर की दोपहर करीब 1 बजे वायुसेना मुख्यालय के सामने की है. छात्र एक्टिवा से सेमिनरी हिल्स से फुटाला तालाब की ओर जा रहा था. इसी दौरान पीछे से आ रही शहर पुलिस के अधिकारी की पत्नी की कार ने लेफ्ट टर्न लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोड़ लेते समय महिला का कार से नियंत्रण छूट गया. कार ने एक्टिवा को जोरदार टक्कर मार दी. कार की चपेट में आने से छात्र सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया.

मददगार युवकों ने दिखाई इंसानियत, महिला रही खामोश!

हादसे के बाद महिला ने कुछ दूरी पर कार रोक दी, लेकिन जख्मी छात्र की मदद के लिए आगे नहीं आई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसी दौरान पीछे से आ रहे दो युवक मदद के लिए ठहर गए. उन्होंने महिला को कार से बाहर निकलकर घायल छात्र की मदद करने को कहा. जब महिला की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो दोनों युवकों ने एक ऑटो रुकवाया और छात्र को अस्पताल ले जाने लगे. युवकों ने कार चालक महिला को ऑटो के पीछे आकर अस्पताल चलने को कहा. युवक जख्मी छात्र को पहले रविनगर चौक स्थित एक निजी अस्पताल ले गए. छात्र की गंभीर हालत देखने के बावजूद निजी अस्पताल के चिकित्सक ने उसे सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा. इसके बाद दोनों युवक छात्र को मेयो अस्पताल लेकर पहुंचे. उन्होंने छात्र के परिजनों को हादसे की सूचना दी. उन्होंने कार चालक महिला को भी कॉल करके अस्पताल पहुंचकर मदद करने का अनुरोध किया. इसके बावजूद महिला अस्पताल नहीं आई.

चार दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, नाबालिग होने का हवाला!

छात्र के सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं. पिछले चार दिनों से उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है. इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कार चालक महिला का पति शहर पुलिस में अधिकारी बताया जा रहा है. उनकी ओर से जख्मी छात्र के परिजनों को नाबालिग होने से छात्र के खिलाफ भी मामला दर्ज होने का बताया जा रहा है. छात्र के साथ परिजन भी दोषी होने के नियम का हवाला दिया जा रहा है. बेटे की गंभीर हालत होने से छात्र के परिजन पहले ही परेशान है. उहापोह की अवस्था होने से वह शिकायत दर्ज नहीं कर रहे है. घटनास्थल गिट्टीखदान थाना क्षेत्र में आता है. वह भी हादसे से वाकिफ है. उसका कहना है कि छात्र नाबालिग है और उसके परिजनों ने अब तक अधिकृत शिकायत दर्ज नहीं कराई है. शिकायत मिलने पर मामला दर्ज किया जाएगा. हालांकि, सवाल यह है कि हादसे की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने चार दिनों तक अपनी ओर से कार्रवाई क्यों नहीं की?

सड़क हादसों पर पुलिस की चुप्पी कब टूटेगी?

शहर में लगातार हो रहे सड़क हादसों ने यातायात व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार को गोधनी में टिप्पर की टक्कर से महिला की मौत के बाद हजारों नागरिक सड़क पर उतर आए थे. लोगों के आक्रोश के बाद प्रशासन को रात में बुलडोजर बुलाकर सड़क पर जमे अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी थी. 26 अक्तूबर को बजाज नगर में साइकिल सवार इंजीनियर 34 वर्षीय सर्वेश अरूण कासेलीकर को संजय ट्रवल्स की बस ने टक्कर मारकर जख्मी कर दिया था. 2 नवंबर को उपचार के दौरान सर्वेश की मृत्यु हो गई थी. नियमों को ताक पर रखकर संजय ट्रैवल्स की बस शहर के अंदरूनी मार्गों से गुजर रही थी. बजाज नगर पुलिस ने खानापूर्ति के तौर पर मामला दर्ज किया था. उसने ना ही बस को बरामद किया था और ना ही चालक को गिरफ्तार किया था. बस भोले पेट्रोल पंप चौक से रवाना हुई थी. यहां पर कई ट्रैवल्स कार्यालय है. यहां से अधिकांश बस शहर के भितर मार्ग से संचालित होती है.

'ट्रैवल्स पैकेज' के चक्कर में मूकदर्शक होने का आरोप

नागरिकों का कहना है कि ट्रैफिक विभाग के पीआई को भोले पेट्रोल पंप चौक से हर माह 'ट्रैवल्स पैकेज' मिलता है. यही अवस्था बैद्यनाथ चौक, छत्रपति चौक और शहर के दूसरे स्थानों की है. डेढ़ माह पहले ही डीसीपी आदित्य मिरखेलकर ने बैद्यनाथ चौक पर वसूली करनेवाले एपीआई को निलंबित किया था. इसके बाद भी ट्रैफिक ब्रांच के अधिकारियों की सेहत पर असर नहीं हो रहा है. पुलिस एक तरफ आम नागरिकों से यातायात नियमों के पालन की अपेक्षा करती, दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी के परिवार से जुड़े हादसे में चार दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं होना कई सवाल खड़े करता है. आखिर कानून सबके लिए समान है या वर्दी का रुतबा कार्रवाई की राह रोक रहा है?. पुलिस ने कार के बीमा अथवा चालक महिला के पास ड्राइविंग लाइसेंस होने की भी पुष्टि नहीं किए जाने का पता चला है.

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