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16:27 IST

नागपुर: कुणाल कान्हेरे हत्या मामले में चारों आरोपी बरी, कोर्ट ने सबूतों में पाई खामियां

नागपुर सत्र न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध साबित नहीं कर सका। मृतक के परिजन उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

नागपुर: कुणाल कान्हेरे हत्या मामले में चारों आरोपी बरी, कोर्ट ने सबूतों में पाई खामियां तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर सत्र न्यायालय ने कुणाल कान्हेरे हत्याकांड में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत का कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित नहीं कर पाया। सत्र न्यायाधीश एम सलमान आजमी ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में गंभीर खामियां पाईं और इसी आधार पर यह फैसला सुनाया।

जिन चार आरोपियों को बरी किया गया है, उनके नाम संदीप उर्फ चिंटू बोपचे, आयुष उर्फ कन्नू मेश्राम, कार्तिक उर्फ बाबू सुरसौत और आदित्य उर्फ टकल्या मसराम हैं। यह वारदात 2 मई 2024 को एमआईडीसी पुलिस थाना क्षेत्र के वृंदावन लेआउट में हुई थी। शहर में यह मामला काफी चर्चा में रहा था।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। आरोपियों के खिलाफ तीन तरह के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भरोसा किया गया था। पहला, आरोपियों के साथ मृतक को आखिरी बार देखा जाना। दूसरा, सीसीटीवी फुटेज। तीसरा, कपड़ों की जब्ती। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों की जांच की और उनमें कई गंभीर कमियां पाईं।

अदालत ने सबसे अहम बात यह नोट की कि मृतक को आरोपियों के साथ आखिरी बार देखे जाने और उसकी मौत की जानकारी मिलने के बीच चार घंटे से ज्यादा का फासला था। इसके अलावा यह भी साबित नहीं हो सका कि मृतक आरोपियों के साथ घटनास्थल तक गया था। गवाहों को सीसीटीवी फुटेज दिखाकर आरोपियों की पहचान भी पक्की नहीं कराई गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने खास तौर पर यह देखा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों के बीच तालमेल की भारी कमी थी। अभियोजन पक्ष कोई ऐसा ठोस और अकाट्य सबूत भी पेश नहीं कर सका, जो इन चारों आरोपियों को सीधे अपराध से जोड़ता हो।

अपने फैसले में सत्र न्यायाधीश एम. सलमान आजमी ने साफ कहा कि आपराधिक मामलों में संदेह का लाभ हमेशा आरोपी को मिलता है। इसी सिद्धांत के तहत चारों को बरी किया गया।

फैसला आने के बाद कुणाल कान्हेरे के परिजनों में गहरी निराशा और गुस्सा है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें इस मामले में न्याय की उम्मीद थी, लेकिन पुलिस और अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी की वजह से दोषियों को सजा नहीं मिल सकी। परिवार ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेगा।

फैसले के बाद सामाजिक और स्थानीय स्तर पर भी न्याय व्यवस्था और पुलिस जांच की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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