गादी कब बदलें? फ्लिप और रोटेट करने का सही तरीका और समय जानिए
रोज कई घंटे जिस गादी पर सोते हैं, उसकी सही देखभाल न करने से सेहत और गादी की उम्र दोनों पर असर पड़ता है।
हम अपनी जिंदगी का करीब एक तिहाई हिस्सा सोने में गुजारते हैं। इसलिए जिस गादी पर रोज कई घंटे आराम करते हैं, उसकी सही निगरानी बहुत जरूरी है। ज्यादातर लोग सिर्फ चादर बदलने पर ध्यान देते हैं, लेकिन गादी की सही देखभाल न हो तो इसका सीधा असर सेहत और गादी की उम्र पर पड़ता है।
लंबे समय तक एक ही गादी का इस्तेमाल करते रहने से शरीर का दबाव बार-बार एक ही हिस्से पर पड़ता है। इससे गादी में गड्ढे पड़ने या उसकी सतह असमान होने की आशंका बढ़ जाती है। इस दिक्कत से बचने के लिए गादी की सही देखभाल करना जरूरी है।
जो गादी दोनों तरफ से इस्तेमाल की जा सकती है, यानी डबल-साइडेड है, उसे हर 3 से 6 महीने में पलटने यानी फ्लिप करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से शरीर का दबाव गादी के सभी हिस्सों पर बराबर बंटता है।
आजकल बाजार में ऐसी कई गादियां भी मिलती हैं जो सिर्फ एक ही तरफ से इस्तेमाल के लिए बनाई जाती हैं, जैसे मेमरी फोम या ऑर्थोपेडिक गादी। इन्हें पलटा नहीं जाता। इसकी जगह इन्हें हर 3 से 6 महीने में सिर्फ घुमाना यानी रोटेट करना चाहिए, यानी जो हिस्सा सिर की तरफ रहता है उसे पैरों की तरफ और पैरों वाला हिस्सा सिर की तरफ कर देना चाहिए।
गादी की देखभाल करते वक्त कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। हर गादी की बनावट अलग होती है, इसलिए गादी खरीदते या इस्तेमाल करते वक्त कंपनी की गाइडलाइंस जरूर देखनी चाहिए। गादी पर जमा होने वाली धूल, पसीना और गंदगी साफ करने के लिए समय-समय पर बेडशीट हटाकर गादी को खुली हवा में रखना चाहिए। इसके अलावा गादी को पसीने, नमी और अचानक गिरने वाले तरल पदार्थों से बचाने के लिए मैट्रेस प्रोटेक्टर लगाना फायदेमंद रहता है।
सही देखभाल की जाए तो गादी की उम्र बढ़ सकती है, लेकिन कोई भी गादी हमेशा के लिए नहीं चलती। आमतौर पर एक अच्छी गादी की उम्र 7 से 10 साल मानी जाती है। अगर गादी पर काफी गड्ढे पड़ गए हों, स्प्रिंग से आवाज आने लगे या सुबह उठने पर शरीर में दर्द या कमर दर्द महसूस हो, तो सिर्फ गादी पलटने से काम नहीं चलता। ये सब संकेत बताते हैं कि अब नई गादी खरीदने का वक्त आ गया है।