ब्रिक्स समिट में मोदी का प्लान: युवा, किसान, महिलाओं को 21 देशों का साथ मिलेगा
ब्रिक्स समिट के मंच से पीएम मोदी ने भारत के विकास का नया रोडमैप रखा, जिसमें एमएसएमई, स्टार्टअप, खेती और शहरी परिवहन जैसे कई क्षेत्रों में सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की बात कही गई।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जागतिक मंच से पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत के शाश्वत विकास और तरक्की का एक नया विजन रोडमैप दुनिया के सामने रखा है। इसमें उन्होंने ब्रिक्स देशों के आम लोगों पर फोकस करते हुए एक बड़ा प्लान पेश किया है। मोदी ने साफ कहा कि यह सहकार्य सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, भारत के युवाओं, किसानों और महिलाओं के विकास के लिए पूरे 21 देशों का सीधा साथ और सपोर्ट मिलेगा। इसमें बिजनेस, स्टार्टअप, किसान, मजदूर, रिसर्चर, महिलाएं और युवा भी सीधे तौर पर शामिल होंगे।
पीएम मोदी ने एमएसएमई, स्टार्टअप, कृषि, स्किल, सोशल सिक्योरिटी, शहरी गतिशीलता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से जुड़े कई पोर्टल, नेटवर्क और सहकार्य के तरीकों पर बात रखी। मोदी ने कहा, "हमारी इच्छा है कि हमारे उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाएं, युवा और आम नागरिक इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लें।" भारत के मुताबिक, विस्तारित ब्रिक्स ग्रुप में दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी और ग्लोबल जीडीपी का 40 फीसदी हिस्सा शामिल है।
समिट में मोदी ने कई बातें रखीं, लेकिन एक बात पर खास जोर दिया कि यह मंच सिर्फ सरकारों के बीच सहयोग का पुल बनकर नहीं रह जाना चाहिए। उन्होंने उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की ज्यादा भागीदारी की अपील की और कहा कि सदस्य देशों में काम कर सकने वाली संस्थाओं और नेटवर्क के जरिए सहकार्य बढ़ाने की जरूरत है।
मोदी ने ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल का जिक्र किया, जो सदस्य देशों के छोटे बिजनेस को फाइनेंस, जानकारी और नई मार्केट से जोड़ने के लिए बनाया गया है। पीआईबी पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म एमएसएमई को टेक्नोलॉजी सेंटर, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, ट्रेड एसोसिएशन, ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और पॉलिसीमेकर्स से जोड़ेगा। ब्रिक्स ने सदस्य देशों की नेशनल नोडल एजेंसी, चुनिंदा इनक्यूबेटर और स्टार्टअप को जोड़ने वाला एक इनक्यूबेटर नेटवर्क भी बनाया है, जिसका मकसद योग्य स्टार्टअप को अपने देश के बाहर के इनक्यूबेटर और एक्सपर्ट से मदद पाने का मौका देना है।
मोदी ने 'ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर' के जरिए खेती में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दिया। इस पहल का मकसद खेती, एग्रो-फॉरेस्ट्री, मछली पालन और जलकृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियो-स्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर लाना है। इसके अलावा ब्रिक्स देशों ने कृषि-पारिस्थितिकी और पुनरुत्पादक खेती पर फोकस करने वाले 'सेंटर ऑफ एक्सिलेंस' का नेटवर्क भी बनाया है। मोदी ने कहा कि ये सेंटर पारंपरिक खेती के ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से जोड़कर जलवायु बदलाव से निपटने की क्षमता और कृषि उत्पादकता सुधारने का काम करेंगे।
नौकरी और सामाजिक सुरक्षा के लिए मोदी ने 'ब्रिक्स कनेक्ट' नाम की एक और पहल का जिक्र किया, जो क्षमता निर्माण, रोजगार पाने की योग्यता और नए स्किल व टेक्नोलॉजी के लिए ब्रिक्स सहकार्य का नेटवर्क है। इस वैकल्पिक प्लेटफॉर्म में स्किल और रोजगार योग्यता, सामाजिक सुरक्षा प्रणाली, वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषय शामिल हैं। शहरी विकास के लिए मोदी ने "ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब" का भी जिक्र किया, जो सदस्य देशों के लिए किफायती, सबके लिए सुलभ और टिकाऊ परिवहन को लेकर आइडिया और तरीकों की अदला-बदली का एक प्लेटफॉर्म है।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए भी एक 'डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस' वैकल्पिक सहकार्य मंच के तौर पर शुरू किया गया है, जिससे सदस्य देश पावर ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी जानकारी, नियामक ढांचा और पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव आपस में शेयर कर सकेंगे। मोदी ने कहा कि यह पहल स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को ज्यादा कारगर, भरोसेमंद और आसान बनाने में मदद कर सकती है।
मोदी ने बताया कि उनके बताए गए कई तरीके और प्रणालियां नेटवर्क या प्लेटफॉर्म के रूप में पहले से चल रही हैं, जबकि कुछ अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं। उनकी इच्छा है कि ब्रिक्स के उपाय 'ग्लोबल साउथ' के लिए भी उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के तहत शुरू की गई पहलों का दायरा आखिरकार इस ग्रुप से आगे बढ़ना चाहिए।
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