बोरीवली बेस्ट बस स्टेशन की जमीन पर कब्जा: सुप्रीम कोर्ट ने BMC कमिश्नर की तनख्वाह रोकी
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बोरीवली में बेस्ट बस स्टेशन के लिए रखी जमीन से कब्जे न हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने BMC कमिश्नर और संबंधित अफसरों की तनख्वाह रोकने का आदेश दिया और अवमानना की कार्रवाई शुरू की।
मुंबई: बोरीवली में बेस्ट बस स्टेशन के लिए रखी गई जमीन से कब्जे न हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अगले आदेश तक BMC कमिश्नर और संबंधित अफसरों की तनख्वाह रोकने को कहा है। साथ ही, पुराने निर्देशों का पालन न होने पर अवमानना की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच ने की, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। बेंच ने BMC कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि कोर्ट के आदेश लागू न करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
मंगलवार, 3 नवंबर की सुनवाई में बेंच ने जमीन पर लगातार बने कब्जों पर कड़ी नाराजगी जताई। बेंच ने यह सवाल भी उठाया कि कहीं नगर निगम के अफसर जमीन पर गैरकानूनी तरीके से काबिज लोगों से मिले हुए तो नहीं हैं।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने चेतावनी दी कि अगर अफसर कोर्ट के निर्देशों को यूं ही नजरअंदाज करते रहे, तो उन्हें जेल भी हो सकती है। बेंच ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए BMC की 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत की मांग भी ठुकरा दी और साफ कर दिया कि अब और वक्त नहीं मिलेगा।
कोर्ट ने नगर निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कमिश्नर और संबंधित स्टाफ की तनख्वाह 1 दिसंबर 2026 तक रुकी रहेगी, बशर्ते कोर्ट के निर्देशों का पालन हो और आगे के आदेश उसमें बदलाव न करें।
BMC ने दलील दी थी कि मराठी के दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराना जरूरी है, तभी अफसर कब्जे हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं। बेंच ने इस सफाई पर भी सवाल उठाया। जस्टिस बागची ने कहा कि हलफनामा देने वाले अफसर से उम्मीद की जाती है कि उसे मराठी समझ आती हो।
यह पूरा विवाद बोरीवली में करीब 3,400 वर्ग मीटर जमीन का है, जो सार्वजनिक बेस्ट बस स्टेशन के लिए रखी गई है। यह जमीन BMC और एक निजी डेवलपर के बीच लंबे समय से चल रहे झगड़े में फंसी हुई है।
13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निजी डेवलपर को निर्देश दिया था कि वह प्रशासनिक इमारत समेत पूरी जमीन खाली और शांतिपूर्ण कब्जे के साथ BMC को सौंप दे। नगर निगम को जमीन का कब्जा लेने, बचे हुए अतिक्रमण कानून के मुताबिक हटाने और बस स्टेशन चालू करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया गया था।
लेकिन काम पूरा नहीं हुआ, तो कोर्ट को फिर दखल देना पड़ा। 13 नवंबर 2025 को कोर्ट ने BMC कमिश्नर से निजी हलफनामा मांगा, जिसमें जमीन पर रह रहे लोगों, बेदखली के नोटिसों और संपत्ति से जुड़े लंबित दावों की जानकारी देनी थी।
नगर प्रशासन अब भी यह नहीं दिखा सका कि उसने आदेशों का पालन किया है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू की है। इससे संकेत मिलता है कि अदालती निर्देशों की अनदेखी करने पर वरिष्ठ निगम अफसरों को निजी तौर पर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।
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