गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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बिना सुनवाई की सजा पर हाईकोर्ट की रोक, IIM नागपुर के छात्र प्रयास ठाकुर का निलंबन रद्द

बिना सुनवाई की सजा पर हाईकोर्ट की रोक, IIM नागपुर के छात्र प्रयास ठाकुर का निलंबन रद्द तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने IIM नागपुर के एमबीए छात्र प्रयास ठाकुर का निलंबन आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के नियमों की अनदेखी हुई।

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने IIM नागपुर के एमबीए छात्र प्रयास ठाकुर को राहत देते हुए उनका निलंबन रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि कार्रवाई करते वक्त छात्र को अपनी बात रखने का ठीक से मौका ही नहीं मिला और प्राकृतिक न्याय के नियमों को ताक पर रख दिया गया। संस्थान के निदेशक का 3 अक्टूबर 2026 का आदेश खारिज हो गया है। इसके साथ ही उनसे पहले आए छात्र गतिविधि समिति और अकादमिक कार्यक्रम एवं शिकायत निवारण समिति के फैसले भी रद्द कर दिए गए।

यह फैसला जस्टिस उर्मिला जोशी-फालके और जस्टिस राज डी. वाकोडे की डिवीजन बेंच ने सुनाया। प्रयास ठाकुर 2025-27 बैच में एमबीए के दूसरे साल के छात्र हैं। उन्होंने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने यह आदेश दिया।

पूरा मामला 30 अगस्त 2026 का है। उस दिन दोपहर करीब 2:40 बजे प्रयास क्लास में थे और इसी दौरान छात्र गतिविधि कार्यालय के प्रभारी तथा कुछ और अधिकारियों ने हॉस्टल में उनके कमरे की तलाशी ली। यह कमरा उन्होंने दो और साथियों के साथ शेयर किया हुआ था। याचिका के मुताबिक तलाशी के समय न प्रयास वहां थे, न कोई स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव। अधिकारियों का दावा था कि बिस्तर पर तकिए के नीचे से कोई प्रतिबंधित पदार्थ मिला।

प्रयास का कहना है कि उन्हें आज तक नहीं बताया गया कि वह पदार्थ क्या था, उसमें क्या-क्या था और मात्रा कितनी थी। कोई लैबोरेटरी रिपोर्ट भी उन्हें नहीं दी गई। उनके मुताबिक इन सब बातों के बिना ही उन्हें कसूरवार मान लिया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि उनका अकादमिक रिकॉर्ड बेदाग है।

इसके बाद छात्र गतिविधि समिति के अध्यक्ष ने, बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए, प्रयास को कोर्स से निकाल दिया। उन्होंने अकादमिक कार्यक्रम एवं शिकायत निवारण समिति में पहली अपील की, लेकिन वहां भी कार्रवाई जस की तस रही। प्रयास का आरोप है कि छात्र गतिविधि समिति और अपील सुनने वाले अधिकारियों, दोनों के सामने उन्हें अपनी बात ठीक से रखने नहीं दी गई। दूसरी अपील संस्थान के निदेशक के पास गई, जिन्होंने सजा घटा दी और प्रयास को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के टर्म 5 और टर्म 6 के लिए निलंबित कर दिया।

कोर्ट में प्रयास की तरफ से वकील राधिका बजाज ने कहा कि संस्थान ने निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं अपनाई और छात्र को अपना बचाव करने का पूरा मौका नहीं मिला। संस्थान के वकील हरीश ठाकुर ने पुराने आदेशों का बचाव किया, मगर यह बात भी मानी कि छात्र को ठीक से सुनने के बाद नए सिरे से जांच हो सकती है।

बेंच ने माना कि छात्र को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और इसी आधार पर तीनों आदेश, यानी निदेशक, छात्र गतिविधि समिति और शिकायत निवारण समिति के, रद्द कर दिए। मामला अब दोबारा छात्र गतिविधि समिति के अध्यक्ष के पास भेजा गया है। उन्हें कहा गया है कि वे नए सिरे से जांच करें, सबूत देखें, छात्र को सबूत और बचाव रखने का पूरा मौका दें और चार हफ्ते के अंदर कारण सहित आदेश पारित करें। बेंच ने यह भी साफ किया कि फैसला छात्र की बात सुनने के बाद ही लिया जाए।

जब तक यह जांच पूरी नहीं होती, कोर्ट ने IIM नागपुर को निर्देश दिया है कि प्रयास को तुरंत क्लास में बैठने दिया जाए और वे हॉस्टल में भी रह सकें।

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