मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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बिहार के सरकारी स्कूलों में टीचरों के जीन्स और टी-शर्ट पहनने पर रोक, फॉर्मल कपड़े जरूरी

बिहार के सरकारी स्कूलों में टीचरों के जीन्स और टी-शर्ट पहनने पर रोक, फॉर्मल कपड़े जरूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों को ड्यूटी पर फॉर्मल कपड़े पहनने का निर्देश दिया है।

बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए नया निर्देश जारी किया है। अब उन्हें स्कूल आते समय फॉर्मल कपड़े पहनने होंगे। विभाग के इस निर्देश में शिक्षकों के जीन्स और टी-शर्ट पहनने पर रोक लगाई गई है।

ड्यूटी के दौरान फॉर्मल ड्रेस कोड का पालन करना जरूरी कर दिया गया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे इन नियमों को लागू करवाएं और जो नियम न माने, उसके खिलाफ कार्रवाई करें। शिक्षकों और कर्मचारियों से यह भी कहा गया है कि वे अपने व्यवहार के मानक बनाए रखें और यह पक्का करें कि स्कूल में पढ़ाई का सही माहौल रहे।

इसी आदेश में स्कूल परिसर में डीजे, डिस्को या दूसरी गलत मानी जाने वाली एक्टिविटीज करवाने के खिलाफ भी चेतावनी दी गई है। विभाग ने साफ किया है कि ऐसे किसी भी इवेंट पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। इस रोक का मकसद ऐसी गतिविधियों को रोकना है, जिनसे पढ़ाई के माहौल में अड़चन आ सकती है।

हालांकि स्कूलों में पारंपरिक संगीत और वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रह सकता है। शैक्षणिक कैलेंडर से जुड़े कार्यक्रम भी करवाए जा सकते हैं, लेकिन कड़ी शिस्त और निगरानी में।

यह निर्देश बिहार के शिक्षा विभाग में पहले लागू किए गए ड्रेस कोड के नियमों के बाद आया है। सरकारी स्कूलों की शिस्त पर प्रशासन का नए सिरे से ध्यान भी इसकी वजह बताई गई है। पूरे राज्य में इसे लागू करवाने की जिम्मेदारी डीईओ और स्कूल अधिकारियों पर रहेगी। वे यह पक्का करेंगे कि कर्मचारी निर्देशों का ठीक से पालन कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड और शिस्त को लेकर इस तरह का आदेश पहली बार नहीं निकाला है। अक्टूबर २०२४ में बिहार सरकार ने एक आदेश जारी किया था। उसमें स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड तय किया गया था। उन्हें संस्थान के कैंपस में डिस्को डांस और दूसरी अनुचित एक्टिविटीज करने से भी रोका गया था। ऐसे ही आदेश २०२५ में और इस साल की शुरुआत में भी जारी हुए थे। लेकिन हर आदेश में यह बात सामने आई है कि शिक्षा विभाग के लिए स्कूलों में शिस्त लागू करना बहुत मुश्किल रहा है।

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