असिस्टेंट प्रोफेसर के 5,012 पदों को मंजूरी मिली, पर उम्मीदवार इंटरव्यू के इंतजार में
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
राज्य के गैर-सरकारी अनुदानित वरिष्ठ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को फरवरी 2026 में मंजूरी मिली, पर जुलाई-अगस्त में विज्ञापन आने के तीन महीने बाद भी कई जगह इंटरव्यू का शेड्यूल नहीं आया है।
महाराष्ट्र के गैर-सरकारी अनुदानित वरिष्ठ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 5,012 पदों की भर्ती को फरवरी 2026 में मंजूरी मिल चुकी है। इसके बावजूद इंटरव्यू की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। जुलाई-अगस्त में विज्ञापन निकले तीन महीने से ज्यादा हो गए, फिर भी कई कॉलेजों ने इंटरव्यू का शेड्यूल जारी नहीं किया है। इससे पढ़े-लिखे उम्मीदवार उलझन में हैं।
उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने 11 फरवरी 2026 के सरकारी आदेश (जीआर) से राज्य की सार्वजनिक यूनिवर्सिटियों से जुड़े गैर-सरकारी अनुदानित वरिष्ठ कॉलेजों के 5,012 खाली पदों पर भर्ती को हरी झंडी दी थी। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से वर्कलोड तय हुआ, विषय के अनुसार पदों का बराबर बंटवारा हुआ और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद कॉलेजों ने आगे की कार्रवाई शुरू की। कई संस्थाओं ने अखबारों में विज्ञापन देकर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मंगवाए। आवेदन की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है, लेकिन इंटरव्यू अब तक शुरू नहीं हुए।
भर्ती में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने 31 अगस्त 2026 को एक अलग जीआर जारी किया। इसमें आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीके से लेने, यूजीसी के नियमों के हिसाब से उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग करने, सिलेक्शन कमेटी कैसी हो और इंटरव्यू की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग करने जैसे निर्देश दिए गए। इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग कम से कम एक साल तक संभालकर रखने को भी कहा गया है।
उम्मीदवारों की शिकायत है कि इस जीआर के बाद भी असल इंटरव्यू शुरू नहीं हुए। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के मुताबिक कई कॉलेजों में विज्ञापन छपे और उन्होंने अर्जी दी। इंटरव्यू के बारे में पूछने पर कॉलेज कहते हैं कि यूनिवर्सिटी ने अब तक सिलेक्शन कमेटी बनाई नहीं है। इसी वजह से उम्मीदवारों को इंटरव्यू का कॉल लेटर भी नहीं मिला है। खास बात यह है कि यूनिवर्सिटी ने ही एनओसी देकर विज्ञापन निकालने की इजाजत दी थी। यूनिवर्सिटी प्रशासन से पूछने पर जवाब मिलता है कि सरकार ने अभी इंटरव्यू लेने की इजाजत नहीं दी। यूनिवर्सिटियों का यह भी कहना है कि इंटरव्यू के लिए प्रोफार्मा सरकार ने भेजा ही नहीं, इसलिए सिलेक्शन कमेटी नहीं बन पाई।
संत गाडगे बाबा अमरावती यूनिवर्सिटी ने 5 सितंबर 2026 को मैनेजमेंट काउंसिल के फैसले के मुताबिक 16 सितंबर 2026 को एक परिपत्र निकाला। इसमें जुड़े हुए गैर-सरकारी अनुदानित कॉलेजों से कहा गया कि वे 31 अगस्त के जीआर का सख्ती से पालन करते हुए भर्ती करें। फिर भी यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में भर्ती की मौजूदा स्थिति साफ नहीं है। उम्मीद थी कि विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद भर्ती में तेजी आएगी, पर उम्मीदवारों का इंतजार अब भी जारी है।
उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर ने कहा कि सरकार से एनओसी मिलने के बाद प्रोफेसर भर्ती शुरू करने पर किसी तरह की रोक नहीं है। इसलिए एनओसी मिलते ही कॉलेजों को भर्ती तुरंत शुरू करनी चाहिए और यूनिवर्सिटी को भी पूरा सहयोग देना चाहिए। कॉलेज यूनिवर्सिटी से भर्ती का विज्ञापन मंजूर करवाएं, जरूरी सिलेक्शन कमेटी का पैनल लें और फिर प्रक्रिया जल्दी पूरी करें।
डॉ. देवळाणकर ने यह भी कहा, "पहले आचार संहिता की वजह से इंटरव्यू लेने में कुछ पाबंदियां थीं, लेकिन अब आचार संहिता खत्म हो चुकी है। इसलिए भर्ती रोकने की कोई वजह नहीं बची है। सरकार से एनओसी मिलने के बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटियां बिना वजह देरी किए तालमेल से भर्ती आगे बढ़ाएं। इसमें किसी तरह की उलझन की गुंजाइश नहीं है।"
प्रोफेसर भर्ती के उम्मीदवार प्रा. मोहन घुगे ने बताया कि जुलाई-अगस्त में आवेदन करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। कॉलेज से पूछने पर बताया जा रहा है कि सिलेक्शन कमेटी बनी नहीं है। उनके मुताबिक कमेटी बनाने और इंटरव्यू लेने में यूनिवर्सिटी और संस्थाओं की तरफ से देरी हो रही है।
अब भी कई सवाल बाकी हैं। अब तक छपे विज्ञापनों में से कितने कॉलेजों ने इंटरव्यू लिए, यह पता नहीं है। 5,012 पदों में से कितने भरे जा चुके हैं, इसके ताजा आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। उम्मीदवार पूछ रहे हैं कि जाहिर विज्ञापनों के तीन महीने बाद भी इंटरव्यू क्यों नहीं हुए, यूनिवर्सिटी सिलेक्शन कमेटी बनाने में देर क्यों कर रही है और क्या इंटरव्यू का शेड्यूल घोषित करने के लिए सरकार कोई समय-सीमा तय करेगी।
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