बीड में सूखे का संकट गहराया, 225 टैंकर चालू; सुनेत्रा पवार ने दिए अहम निर्देश
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बीड जिले में सूखे के हालात और प्रशासन के इंतज़ामों की समीक्षा की।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बारिश के लंबे ब्रेक की वजह से बीड जिले में सूखे के हालात बहुत गंभीर हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने आज, शनिवार 17 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में इन हालात और प्रशासन के उपायों की पूरी समीक्षा की।
बैठक में विधायक प्रकाश सोळुंके, विधायक धनंजय मुंडे, जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, जिला पुलिस अधीक्षक नवनीत कावत, निवासी उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी सुभाष साळवे और जिला नियोजन अधिकारी शीला मिसाळ मौजूद थे। इनके अलावा सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी आए थे।
बारिश न होने से किसानों के हाथ आई फसल झुलस गई है। पीने के पानी और जानवरों के चारे का सवाल बहुत गंभीर बन गया है। इसी को देखते हुए प्रशासन को फसल नुकसान के पंचनामे तुरंत पूरे करने के निर्देश दिए गए। ज़्यादातर पंचनामे पूरे होने को हैं। रिपोर्ट मिलते ही नियम के मुताबिक आगे की कार्रवाई तेज़ करने को कहा गया। साथ ही कृषि और राजस्व अधिकारियों को फसल बीमा की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और सटीकता रखने के निर्देश मिले।
प्रभारी मंत्री सुनेत्रा पवार ने सूखे और किल्लत के दौर में लोगों से अपील की कि वे फालतू खर्च से बचें। शादी और जन्मदिन पर होने वाले खर्च से बचें और सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करें।
पीने के पानी को सबसे ऊपर रखा गया है। जो पानी के टैंकर अभी चल रहे हैं, उन पर GPS प्रणाली से नज़र रखने को कहा गया। जिले में फिलहाल 225 टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। साफ कहा गया कि पीने लायक पानी किसी भी हाल में निर्माण कामों में न इस्तेमाल हो और पानी बहुत किफायत से खर्च किया जाए। उपमुख्यमंत्री ने जलस्रोतों के पुनर्भरण, नदी-नालों के गहरीकरण, गाद निकालने और कुओं की मरम्मत जैसे जल संरक्षण के काम तुरंत शुरू करने के निर्देश भी दिए।
चारे की समस्या सुलझाने के लिए प्रशासन से अभी से पहले की तैयारी करने को कहा गया। बैठक में कहा गया कि किसानों को साइलेज, हाइड्रोपोनिक्स और अज़ोला चारे के उत्पादन की ट्रेनिंग दी जाए। वीबी-जी रामजी योजना के तहत रोज़गार गारंटी के काम जल संरक्षण से जोड़कर असरदार ढंग से चलाए जाएं, ताकि गांवों के किसानों और मज़दूरों को वहीं पक्का रोज़गार मिले और उन्हें पलायन न करना पड़े।
हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया कि वे अपने मुख्यालय में रहकर लोगों की हर मुमकिन मदद करें। किसानों से बातचीत बढ़ाकर उनकी काउंसलिंग करने और उन्हें मानसिक सहारा देने को भी कहा गया। पानी, चारा और रोज़गार, तीनों पर तालमेल से काम करके लोगों को जल्द राहत देने की प्रभावी योजना बनाने की बात भी समीक्षा बैठक में साफ की गई। बताया गया कि बढ़ते सूखे के संकट में सरकार और प्रशासन लोगों के साथ मज़बूती से खड़े हैं और सारे उपाय युद्धस्तर पर चल रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने यह भी कहा कि किसानों को इस प्राकृतिक संकट से सुरक्षित निकालने और जल्दी संभालने के लिए राज्य सरकार हर स्तर पर उपाय कर रही है और प्रशासन पूरी ताकत से काम में लगा है।