बीड में पैसों के विवाद पर बेहोश बच्ची और उसके पिता को एंबुलेंस से उतारा गया, वीडियो वायरल
बीड के दिंडरूड गांव में 11 साल की बेहोश बच्ची और उसके पिता को पैसों के विवाद के बाद एंबुलेंस से उतार दिया गया, आरोप है। घटना का वीडियो वायरल हो गया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महाराष्ट्र के बीड जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने लोगों को झकझोर दिया है। आरोप है कि पैसे न दे पाने की वजह से 11 साल की एक बेहोश बच्ची और उसके पिता को एंबुलेंस से रास्ते में ही उतार दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसके बाद ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवा पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि मामला 29 सितंबर का है और दिंडरूड गांव में हुआ। बच्ची पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। स्कूल में अचानक उसे फिट आया और वह क्लास में ही बेहोश होकर गिर पड़ी। हालत गंभीर देखकर शिक्षकों ने उसे फौरन दिंडरूड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। वहां वैद्यकीय अधिकारी डॉ. निलेश ढाकणे ने उसकी जांच की और आगे के इलाज के लिए रेफर कर दिया।
आरोप के मुताबिक रेफर करने के बाद परिवार को एंबुलेंस तो मिल गई, लेकिन रास्ते में ही पैसों को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। कहा जा रहा है कि ड्राइवर ने जितने पैसे मांगे, बच्ची के पिता उतने देने की हालत में नहीं थे। इसी वजह से बच्ची और उसके पिता को एंबुलेंस से उतरने को कह दिया गया। एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस के लोगों ने परिवार से पहले डीजल के पैसे मांगे थे।
वायरल वीडियो में पिता बेहोश बेटी को कंधे पर उठाकर एंबुलेंस से बाहर निकलते दिख रहे हैं। किसी ने यह पूरा वाकया अपने मोबाइल में कैद करके सोशल मीडिया पर डाल दिया।
बच्ची के हालात भी बेहद मुश्किल बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका है। पिता मजदूरी करते हैं और घर में कुल चार बच्चे हैं। परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में चंद पैसों की खातिर बीमार बच्ची को एंबुलेंस से बाहर निकाल देना मन को सुन्न कर देता है।
वीडियो देखकर यूजर्स में गुस्सा है। कई लोगों ने कमेंट करके अपनी राय रखी और एंबुलेंस के कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने लिखा, "आखिर में उसने बेहोश बेटी को कंधे पर उठा लिया और पीछे-पीछे लाचार दादी चलती गई। मुफ्त 108 एंबुलेंस क्यों नहीं बुलाई गई? 'एंबुलेंस सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए' वाला नियम आखिर किसके लिए है? 'राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम' का इतना शोर मचाया जाता है, फिर एक गरीब बच्ची की जान डीजल के पैसों में क्यों अटक गई?" दूसरे यूजर ने लिखा, "पैसे लिए बिना काम नहीं होता", और एक और यूजर ने लिखा, "उन्हें बच्ची की जान से ज्यादा प्यारा पैसा हो गया"।
यह जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट और वीडियो पर आधारित है।