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भंडारा में नौ महीने में जानवरों के काटने के 9,124 मामले दर्ज

जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भंडारा जिले में जानवरों के काटने के 9,124 मामले दर्ज हुए, जिनमें 7,296 कुत्तों के काटने के हैं।

भंडारा में नौ महीने में जानवरों के काटने के 9,124 मामले दर्ज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भंडारा, 21 तारीख: भंडारा जिले में जनवरी से सितंबर 2026 तक, यानी नौ महीनों में जानवरों के काटने की कुल 9,124 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 7,296 घटनाएं कुत्तों के काटने की हैं।

पिछले साल की तुलना में इस बार 529 घटनाएं ज्यादा हुई हैं। यह 6.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। जनवरी से सितंबर 2025 के दौरान जिले में जानवरों के काटने की 8,595 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इस साल उसी अवधि में यह आंकड़ा 9,124 पर पहुंच गया है। कुत्तों के अलावा बिल्ली, बंदर और दूसरे जानवरों के काटने के मामले भी इसमें शामिल हैं।

बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला सामान्य अस्पताल और जिला परिषद ने अपील की है कि जानवर के काटने पर वक्त रहते तुरंत इलाज करवाया जाए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जानवर के काटने से रेबीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा रहता है, इसलिए ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज न किया जाए।

रेबीज की रोकथाम वाली वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक जिले में है। बताया गया है कि काटने के मरीजों को फौरन इलाज मिले, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्रामीण अस्पतालों, उप-जिला अस्पतालों और जिला अस्पताल में रेबीज की वैक्सीन (ARV) 24 घंटे मिलती है। फिलहाल जिले में इस वैक्सीन के कुल 5,139 डोज उपलब्ध हैं।

गंभीर मामलों में रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन (RIG) दवा की जरूरत पड़ती है। इसके कुल 169 डोज ग्रामीण, उप-जिला और जिला अस्पताल स्तर पर उपलब्ध हैं। इसी वजह से अपील की गई है कि जिन लोगों को जानवर ने काटा हो, वे घरेलू इलाज के भरोसे न रहें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाएं।

काटने की घटनाएं कम करने के लिए आवारा कुत्तों की संख्या पर काबू करना, उनका टीकाकरण करना और लोगों में जागरूकता फैलाना जरूरी बताया गया है। इसके लिए पशुपालन विभाग और स्थानीय निकायों के साथ तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि काटने के बाद क्या सावधानी रखनी है, रेबीज के टीके का क्या महत्व है और इलाज में देरी करने से क्या खतरे हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह के मुताबिक कुत्ते या किसी दूसरे जानवर के काटने पर घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। उसके बाद उपलब्धता के हिसाब से सही एंटीसेप्टिक लगाएं और फौरन डॉक्टर की सलाह लें। घाव की हालत देखकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज की वैक्सीन, जरूरत हो तो रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन और टिटनेस से बचाव का इलाज लेना चाहिए।

विभाग ने यह भी कहा है कि काटे गए व्यक्ति को मानसिक सहारा दिया जाए। घाव पर मिट्टी, तेल, नींबू, चॉक या मिर्च पाउडर जैसी घरेलू चीजें नहीं लगानी चाहिए। घाव को कसकर बांधने या इलाज में देरी करने से बचना चाहिए। घाव को छूने से पहले हाथ अच्छी तरह धो लें और हो सके तो घाव को सीधे हाथ न लगाएं।

जिला सामान्य अस्पताल और जिला परिषद, भंडारा की ओर से कहा गया है कि रेबीज गंभीर बीमारी है, फिर भी काटने के बाद घाव की सही सफाई और वक्त पर जरूरी इलाज मिले तो इसका खतरा टाला जा सकता है। इसलिए काटने की घटना को मामूली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग की सूचनाओं का पालन करें।

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