बेटे रोहित पवार के नाम राजेंद्र पवार की भावुक पोस्ट: "लड़, संघर्ष अटल है"
एमपीएससी आंदोलन के बीच विधायक रोहित पवार पर हो रही आलोचना के सिलसिले में उनके पिता राजेंद्र पवार ने सोशल मीडिया पर बेटे के नाम संदेश लिखा है।
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पुणे में एमपीएससी के विद्यार्थियों का आंदोलन चल रहा है और इसी बीच विधायक रोहित पवार पर विरोधियों की तरफ से आलोचना हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में उनके पिता और बारामती ऐग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन राजेंद्र पवार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी है। यह पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। 'तेरा सहारा बाप' इन शब्दों के साथ उन्होंने बेटे को संघर्ष की याद दिलाई और राजनीति की चुनौतियों का सामना करने की सलाह दी है।
राजेंद्र पवार ने पोस्ट में लिखा है कि एमपीएससी के आंदोलन में वे रोहित पवार के साथ सड़क पर सोए थे। विरोधी लगातार 'मुंह में सोने का चम्मच' वाला आरोप लगाते रहे हैं। राजेंद्र पवार ने इस आरोप को खारिज करने की कोशिश की है। इसके लिए उन्होंने अपने परिवार के संघर्ष और सामाजिक काम की पृष्ठभूमि पोस्ट में रखी है।
उन्होंने लिखा है, "1954 में 110 रुपये की तनख्वाह पर मेरे पिता आप्पासाहेब पवार नौकरी में लगे। 25 साल नौकरी की और बाकी 25 साल किसानों के लिए सामाजिक काम किया।" इसी सिलसिले में उन्होंने महाराष्ट्र में क्रॉसब्रीड गायों की पहचान कराने, ड्रिप सिंचाई के प्रसार और किसानों के सहायक धंधों के लिए किए गए काम का जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया है कि आप्पासाहेब पवार के सामाजिक योगदान को केंद्र सरकार ने पद्मश्री देकर सम्मानित किया।
अपने संघर्ष के बारे में राजेंद्र पवार ने लिखा है कि 1978 में वे सिर्फ 500 डॉलर लेकर पढ़ाई के लिए अमेरिका गए थे। वहां की चकाचौंध में रमे नहीं और महाराष्ट्र लौटकर अपनी खेती में लग गए। उनके मुताबिक उन्होंने खेती, सामाजिक संस्थाओं और किसानों के लिए साइलेज, कृषिक, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग इन पोल्ट्री जैसे उपक्रम चलाए।
रोहित पवार के सफर पर राजेंद्र पवार ने लिखा है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने सिर्फ खुद नौकरी करने के बजाय उद्योग खड़ा किया और हजारों ग्रामीण नौजवानों को रोजगार दिया। बचपन का एक किस्सा भी उन्होंने सुनाया है। रोहित दोस्तों के साथ नाले पर मछली और केकड़े पकड़ने जाते थे और यह सोचे बिना कि बिल सांप का है या केकड़े का, उसमें हाथ डाल देते थे।
इसी हिम्मत का हवाला देते हुए वे लिखते हैं, "तू अब राजनीति में है। राजनीति का कोई जहरीला सांप कभी डस ले तो जहर पचाने की तैयारी रख और उसके दांत उखाड़ने की हिम्मत भी!" आखिर में उन्होंने बेटे को संदेश दिया है, "लड़, संघर्ष अटल है। अपने लिए राजनीति न करके हजारों नौजवान पीढ़ियों का और गरीबों का सोना कर।"
एमपीएससी आंदोलन के बीच आई इस पोस्ट को सिर्फ एक पिता की बेटे को दी गई सलाह नहीं माना जा रहा। इसे रोहित पवार के राजनीतिक संघर्ष को ताकत देने वाले संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।