बायनेंस से 6.3 अरब डॉलर की क्रिप्टो चोरी, फर्जी नौकरी इंटरव्यू से घुसे हैकर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कंपनी ने बताया कि पिछले हफ्ते हुई चोरी में हैकरों ने फर्जी इंटरव्यू और कंपनी के अपने AI टूल का इस्तेमाल किया।
दुनिया के बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों में गिने जाने वाले बायनेंस पर हुए साइबर हमले को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। कंपनी ने बताया है कि पिछले हफ्ते करीब 6.3 अरब डॉलर की क्रिप्टो चोरी हुई और इसके लिए हैकरों ने फर्जी नौकरी के इंटरव्यू का सहारा लिया।
कंपनी के मुताबिक इस पूरे हमले में उसके अपने अंदरूनी AI टूल का भी गलत इस्तेमाल हुआ। हमलावरों ने पहले एक इंजीनियर के कंप्यूटर पर कब्जा किया। उसके बाद दो और इंजीनियरों के क्रिप्टो वॉलेट उनके कंट्रोल में चले गए। इस घटना से क्रिप्टो कंपनियों की साइबर सिक्योरिटी का सवाल एक बार फिर सामने आ गया है।
हमलावरों ने कंपनी के इंजीनियरों तक पहुंचने के लिए फर्जी इंटरव्यू का रास्ता चुना। नौकरी का लालच देकर संबंधित कर्मचारियों से संपर्क किया गया। इसी दौरान उन्होंने एक इंजीनियर के कंप्यूटर में बिना इजाजत घुसपैठ कर ली।
इस तरह के हमलों में आम तौर पर फर्जी इंटरव्यू, शक भरी फाइलों या लिंक के जरिए कर्मचारियों के कंप्यूटर में मालवेयर पहुंचाया जाता है। इससे हमलावरों को कंपनी के अंदरूनी नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है।
इस मामले में बायनेंस के अंदरूनी AI टूल का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। एक इंजीनियर के कंप्यूटर पर कंट्रोल मिलने के बाद हमलावरों ने इस टूल का गलत इस्तेमाल किया। फिर कंपनी के दो दूसरे इंजीनियरों के क्रिप्टो वॉलेट पर भी उनका कंट्रोल हो गया।
AI तकनीक का इस्तेमाल आम तौर पर काम को तेज और आसान बनाने के लिए होता है। लेकिन जब उसी तकनीक का बिना इजाजत इस्तेमाल हो जाए, तो संवेदनशील जानकारी और डिजिटल संपत्ति खतरे में पड़ सकती है। इस घटना ने AI टूल्स तक पहुंच के कंट्रोल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
6.3 अरब डॉलर की चोरी से क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में हलचल मच गई है। इस घटना से दिखा है कि डिजिटल संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के सामने भी इंसानी गलतियों और अंदर से घुसपैठ का खतरा रहता है। खासकर कर्मचारियों के कंप्यूटर पर कंट्रोल हासिल करके पूरी संस्था की सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है।
ऐसे में कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए ज्यादा सख्त सिक्योरिटी ट्रेनिंग, कई स्तर की पहचान जांच और अंदरूनी AI टूल्स पर नियंत्रण की जरूरत महसूस हो रही है। अब पूरे उद्योग की नजर इस पर है कि बायनेंस के इस मामले के बाद क्रिप्टो कंपनियां अपनी सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव करती हैं।
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