बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप, मार्च के मध्य से 32 हजार से ज्यादा संदिग्ध मरीज मिले
बांग्लादेश में मार्च के मध्य से 32 हजार से ज्यादा संदिग्ध खसरा मरीज मिले हैं और रिपोर्ट में 250 से ज्यादा मौतों की बात है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण सीमा तक नहीं पहुंचा है और भारत पर फिलहाल असर नहीं दिख रहा।
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर हो गया है। मार्च के मध्य से अब तक वहां 32 हजार से ज्यादा संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। रिपोर्ट में इसी दौरान 250 से ज्यादा लोगों की मौत होने की बात कही गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन की खरीद में देरी और टीकाकरण का दायरा घटने से हालात और बिगड़ गए।
विशेषज्ञों के मुताबिक राहत की बात यह है कि फिलहाल यह संक्रमण बांग्लादेश के कुछ ही जिलों में चल रहा है और सीमा से सटे इलाकों तक नहीं पहुंचा है। इसलिए उनकी राय है कि भारत पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।
बताया गया है कि संक्रमण की शुरुआत जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थियों के कैंपों से हुई थी। उसके बाद खसरा देश के 64 में से 58 जिलों तक फैल गया। 21 हजार से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
सितंबर 2025 में अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीदना बंद कर दिया और खुली निविदा प्रक्रिया का रास्ता चुना। लेकिन इस प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे वैक्सीन की सप्लाई पर असर पड़ा और नियमित टीकाकरण अभियान को झटका लगा। इससे पहले बांग्लादेश सरकार खसरा और रुबेला की वैक्सीन के लिए काफी हद तक यूनिसेफ पर निर्भर थी। बताया गया है कि खरीद रुकने से नियमित टीकाकरण में रुकावट आएगी और खसरा फैलने का खतरा बढ़ेगा, यह आशंका पहले ही जताई जा चुकी थी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 में खसरे का टीका लगवाने के पात्र बच्चों में से सिर्फ 59 प्रतिशत का टीकाकरण हुआ था। बताया गया है कि यह आंकड़ा बाद में आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिया गया। निविदा प्रक्रिया में प्रशासनिक देरी की वजह से वैक्सीन की किल्लत हुई और नियमित टीकाकरण पर असर पड़ा।
आईईडीसीआर के पूर्व प्रिंसिपल साइंटिस्ट एएसएम आलमगीर ने कहा कि 2024 से विटामिन ए बांटने के अभियान में आई नाकामी की वजह से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम हो गई।
डीजीएचएस के रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद के मुताबिक बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के जरिए फिर से वैक्सीन खरीदना शुरू किया। साथ ही आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया गया। लेकिन खसरा जिस रफ्तार से फैल रहा है, उसे देखते हुए हालात काबू में आने में वक्त लग सकता है।
इस बीच वैक्सीन खरीद में कथित गड़बड़ियों और नाकामी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील बिप्लब कुमार दास ने भ्रष्टाचार विरोधी आयोग में शिकायत दर्ज कराई है, ऐसी खबर है।
बांग्लादेश के कवरेज इवैल्युएशन सर्वे 2026 के मुताबिक खसरा और रुबेला की पहली डोज का टीकाकरण 2019 के 88.6 प्रतिशत से घटकर 2023 में 86 प्रतिशत रह गया। दूसरी डोज का कवरेज भी इसी दौरान 89 प्रतिशत से गिरकर 80.7 प्रतिशत पर आ गया। विशेषज्ञ बताते हैं कि खसरे को फैलने से रोकने के लिए आम तौर पर करीब 95 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज जरूरी होता है।