कुत्ता चाटे तो भी रेबीज का खतरा, सिर्फ काटने से नहीं फैलता यह वायरस
कुत्ते के काटने के अलावा उसके ओरखड़े और चाटने से भी रेबीज हो सकता है, जानिए कब और कैसे रहना है सावधान।
रेबीज एक खतरनाक वायरस है, लेकिन ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सिर्फ कुत्ते के काटने से फैलता है। असल में ऐसा बिलकुल नहीं है। कुत्ते का एक साधारण सा ओरखड़ा भी जानलेवा साबित हो सकता है। कुत्ते से जुड़ी घटनाएं, जैसे काटना या नाखून लगना, अक्सर लोगों को इमोशनली डरा देती हैं। और जब बात रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी की हो, तो यह डर और बढ़ जाता है। ज्यादातर लोगों को पता है कि कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या सिर्फ कुत्ते के चाटने से भी यह बीमारी हो सकती है।
कुत्ते के काटने के अलावा उसके ओरखड़े से भी रेबीज का खतरा पैदा हो सकता है, खासकर अगर ओरखड़े से त्वचा की ऊपरी परत फट गई हो। अगर कुत्ता रेबीज से इन्फेक्टेड है और उसकी लार उसके पंजे या नाखूनों पर लगी है, तो वायरस उस ओरखड़े के जरिए शरीर में जा सकता है। ओरखड़े से खून निकले या ना निकले, त्वचा पर किसी भी चोट या जख्म को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, बिना खून वाला मामूली सा ओरखड़ा या खरोंच भी रेबीज इन्फेक्शन का खतरा पैदा कर सकता है।
कुत्ते के चाटने से रेबीज होने का खतरा इस बात पर डिपेंड करता है कि कुत्ते की लार शरीर के किस हिस्से के संपर्क में आई है। अगर कुत्ता किसी व्यक्ति की हेल्दी, बिना जख्म वाली त्वचा को चाटता है, तो आमतौर पर रेबीज इन्फेक्शन का खतरा नहीं माना जाता। लेकिन अगर इन्फेक्टेड कुत्ते की लार किसी कट, जख्म या ओरखड़े वाली जगह पर लग जाए, तो वायरस शरीर में जा सकता है। इसी तरह, अगर इन्फेक्टेड जानवर की लार आंख, नाक या मुंह में चली जाए, तो भी इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। इसलिए सिर्फ इसलिए इसे हल्के में मत लीजिए कि कुत्ते ने काटा नहीं, सिर्फ चाटा है।
कुत्ते के काटने या ओरखड़ने पर सबसे पहले जख्म को तुरंत साफ करना चाहिए। प्रभावित जगह को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। जख्म पर साफ कपड़ा हल्के से ढका जा सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना जख्म पर मिर्च, तेल, मिट्टी, राख या कोई भी घरेलू चीज नहीं लगानी चाहिए। जख्म छोटा हो या उससे खून ना निकल रहा हो, फिर भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डॉक्टर उस जख्म की स्थिति देखकर तय करते हैं कि रेबीज का इंजेक्शन जरूरी है या नहीं। कुछ गंभीर मामलों में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन या दूसरा जरूरी इलाज भी दिया जा सकता है। रेबीज के लक्षण दिखने का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक बार लक्षण दिखना शुरू हो जाएं, तो यह बीमारी बेहद गंभीर हो जाती है और लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है। इसलिए इन्फेक्शन के बाद टाइम पर डॉक्टर की सलाह और प्रिवेंटिव इलाज लेना बहुत जरूरी है।