बांग्लादेश में खसरे का कहर: आठ महीने में 1,147 मौतें, ज़्यादातर पाँच साल से छोटे बच्चे
बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप में आठ महीनों के भीतर 1,147 लोगों की जान गई है, जिनमें 94 प्रतिशत पाँच साल से कम उम्र के बच्चे हैं।
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप ले चुका है। पिछले आठ महीनों में इस बीमारी से 1,147 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें पाँच साल से कम उम्र के बच्चों का हिस्सा करीब 94 प्रतिशत है। नियमित टीकाकरण में गिरावट, कमज़ोर स्वास्थ्य सेवाएँ और बच्चों के रजिस्ट्रेशन में खामियाँ, इन सबने हालात को और बिगाड़ दिया है।
जापान के एक अखबार की खबर के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों से इस प्रकोप की गंभीरता साफ होती है। मार्च के मध्य से अब तक देश में खसरे के दो लाख दो हजार से ज़्यादा संदिग्ध मरीज़ मिले हैं। इनमें से करीब 22 हजार मरीज़ों में लैब जाँच से खसरे की पुष्टि हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि खसरा फैलने से रोकने के लिए कम से कम 95 प्रतिशत टीकाकरण ज़रूरी है। लेकिन WHO और UNICEF के अनुमान के मुताबिक, 2025 में बांग्लादेश में खसरे के टीके की पहली खुराक का कवरेज घटकर 90 प्रतिशत तक रह गया। दूसरी खुराक का कवरेज 86 प्रतिशत तक गिर गया। इससे संक्रमण को रोकना और मुश्किल हो गया है।
टीकाकरण अभियान में आँकड़ों की खामियाँ और स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाएँ बड़ी अड़चन रही हैं। UNICEF और बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो की जानकारी के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत बच्चों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ था। इस वजह से जो बच्चे टीके से छूट गए, उनकी पहचान करना और उन तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना मुश्किल हो गया।
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लगभग एक तिहाई पद खाली पड़े हैं। नतीजा यह कि दूर-दराज़ के इलाकों में बच्चों तक टीकाकरण और इलाज की सुविधा पहुँचाने में रुकावट आई है। कुछ जगहों पर टीकाकरण तय लक्ष्य से ज़्यादा दर्ज किया गया, जिससे आँकड़ों के सही होने पर भी सवाल उठे हैं।
इस संकट की गंभीरता दिखाने वाली एक घटना उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश के सिलहट इलाके में हुई। दो साल के अरमान हुसैन को खसरे का टीका नहीं लगा था। उसके इलाज के लिए परिवार ने अपना तिपहिया ऑटो-रिक्शा बेच दिया, मगर अस्पताल में भर्ती करने के सिर्फ 24 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। अरमान के पिता ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारी उनके दूरदराज़ के गाँव तक पहुँच ही नहीं पाए।
सितंबर में बांग्लादेश में हर दिन औसतन 1,198 नए संदिग्ध मरीज़ दर्ज हुए। यह मई के बाद का सबसे ऊँचा औसत था। इससे खसरे को रोकने के लिए और व्यापक कदमों की ज़रूरत उभरकर सामने आई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाँच साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों को भी टीकाकरण अभियान में शामिल करने की अपील की है। खबर में बताया गया है कि खसरे के कुल मरीज़ों में से करीब एक तिहाई इसी उम्र के हैं। टीकाकरण की कमियाँ दूर करना, सही आँकड़े तैयार करना और दूर-दराज़ के इलाकों के बच्चों तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना, इन्हीं पर बांग्लादेश में खसरे पर काबू पाने की कामयाबी टिकी रहेगी।
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