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16:55 IST

अर्मेनिया के येरेवान में जैवविविधता पर बैठक, 2030 के लक्ष्य पीछे छूटने का डर

येरेवान में करीब 200 देशों के प्रतिनिधि जैवविविधता करार की पहली आधिकारिक समीक्षा के लिए जमा हुए हैं।

अर्मेनिया के येरेवान में जैवविविधता पर बैठक, 2030 के लक्ष्य पीछे छूटने का डर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दुनिया भर में प्रकृति और जैवविविधता को बचाने के लिए बनाई गई बड़ी योजनाएं इस वक्त गंभीर संकट में हैं। अर्मेनिया के येरेवान शहर में 19 से 30 अक्टूबर के बीच संयुक्त राष्ट्र के जैविक विविधता करार (UN CBD) पर बात करने के लिए करीब 200 देशों के प्रतिनिधि जमा हुए हैं। यह बैठक तुर्की के अंताल्या में होने वाली आगामी COP17 परिषद और संयुक्त राष्ट्र की 31वीं जलवायु परिवर्तन परिषद की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

लेकिन परिषद की शुरुआत में ही सामने आई रिपोर्टों ने सभी भाग लेने वाले देशों की चिंता बढ़ा दी है। वजह यह है कि 2030 तक जैवविविधता के जो लक्ष्य तय किए गए थे, उन्हें पूरा करना अब लगभग नामुमकिन लगने लगा है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस मौके पर दुनिया को सख्त लफ्जों में चेताया। उन्होंने साफ अपील की, "इंसान ने प्रकृति के खिलाफ जो जंग छेड़ रखी है, उसे अब रुकना ही चाहिए।"

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) 2022 में एक ऐतिहासिक करार के तौर पर अपनाया गया था। इसका मुख्य मकसद 2030 तक धरती पर जैवविविधता का नुकसान पूरी तरह रोकना और बर्बाद हो चुके इकोसिस्टम को फिर से जिंदा करना था। मगर योजना को लागू करने में सुस्ती, वैश्विक मंदी और राजनीतिक विवादों की वजह से अब जानकारों को डर है कि यह करार सिर्फ कागज पर रह जाएगा।

इस फ्रेमवर्क के तहत दुनिया के 200 देशों ने कुल 23 मुश्किल लक्ष्यों पर सहमति जताई थी। इनमें सबसे अहम लक्ष्य '30x30' के नाम से जाना जाता है। इसके मुताबिक 2030 तक दुनिया की कम से कम 30 फीसदी जमीन, अंदरूनी जल स्रोतों (नदियां, तालाब) और महासागरों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करना जरूरी है। इसके अलावा इंसानी दखल से बिगड़ चुके 30 फीसदी इकोसिस्टम को दोबारा खड़ा करना भी करार का एक प्रमुख हिस्सा है।

हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि कई देशों ने इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अब तक राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कानून या नीतियां लागू नहीं की हैं। येरेवान की बैठक में देश पहली बार कुनमिंग-मॉन्ट्रियल करार को लागू करने में अपनी साझा प्रगति का पहला आधिकारिक मूल्यांकन (Global Stocktake) कर रहे हैं। इस समीक्षा में सामने आया है कि ज्यादातर देश तय लक्ष्यों से काफी पीछे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर बड़ा दबाव बन गया है।

जैवविविधता को बचाना सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिए भारी निवेश भी चाहिए। करार में तय हुआ था कि प्रकृति की हिफाजत के लिए हर साल सभी स्रोतों से कम से कम 200 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए जाएंगे। साथ ही अमीर और विकसित देशों के लिए बाध्यकारी किया गया था कि वे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त से हर साल 30 अरब डॉलर गरीब और विकासशील देशों को दें।

सबसे अहम मुद्दा यह है कि खेती, ऊर्जा और उद्योग के नाम पर प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को हर साल 500 अरब डॉलर की सब्सिडी दी जाती है। लक्ष्य था कि इसे रोककर पर्यावरण के अनुकूल कामों की तरफ मोड़ा जाए। लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था की हलचल और युद्ध जैसे हालात के कारण विकसित देशों ने इस फंड में कटौती कर दी है। पैसे की यही कमी अब 2030 के लक्ष्य पूरे करने की सबसे बड़ी रुकावट बन गई है।

इस चिंताजनक रिपोर्ट का असर सिर्फ पर्यावरण पर नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर पड़ने की आशंका है। जंगलों की तेजी से कटाई, मिट्टी का कटाव और नदियों का प्रदूषण खाद्य सुरक्षा का सवाल गंभीर बना रहे हैं। साफ पीने के पानी की किल्लत, भीषण गर्मी की लहरें और अचानक लगने वाली भयानक जंगल की आग, ये सब प्रकृति का संतुलन बिगड़ने के साफ संकेत हैं।

दुनिया के विशाल जंगल और महासागर बारिश के चक्र को नियमित रखते हैं। अगर ये इकोसिस्टम खत्म हुए तो बारिश के पैटर्न में बड़े और अचानक बदलाव आएंगे, जिसका सीधा नुकसान खेती को होगा और दुनिया में भुखमरी की नौबत आ सकती है। इसीलिए येरेवान की बैठक में शामिल अंतरराष्ट्रीय नेता और पर्यावरण विशेषज्ञ इस संकट से निकलने के नए रास्ते खोजने की कोशिश कर रहे हैं।

तुर्की के अंताल्या में होने वाली COP17 परिषद से पहले अर्मेनिया की ये 12 दिन की बातचीत बेहद अहम होगी। यहां की चर्चा के आधार पर ही COP17 का अंतिम खाका और आगे का कार्यक्रम तय होगा। सामने आई इन खामियों को दूर करने के लिए देशों को अब ज्यादा आक्रामक और सख्त कदम उठाने होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि येरेवान की यह बैठक महज औपचारिक चर्चा नहीं रहेगी, बल्कि दुनिया को सही और टिकाऊ रास्ते पर लाने की मजबूत नींव रखेगी।

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