नागपुर मनपा ने हाईकोर्ट में कबूला, कार्यकारी और विकास अभियंता के पद बराबर
पदोन्नति के मामले में वसंत धारकर की याचिका पर मनपा ने अपना पहले का बयान सुधारा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर महानगरपालिका ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में अपना पुराना रुख बदल दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में मनपा ने माना कि कार्यकारी अभियंता और विकास अभियंता के पद एक-दूसरे के समकक्ष हैं। मामला वसंत धारकर की याचिका का है, जिन्होंने पदोन्नति और उससे जुड़े लाभ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
धारकर ने अदालत में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया था। उसमें उन्होंने दावा किया कि वे और एक अन्य कर्मी जांभुलकर लोक निर्माण कार्य विभाग (पीडब्ल्यूडी) में बिल्कुल एक जैसे पद पर काम करते थे और दोनों के काम का स्वरूप भी एक जैसा था।
इससे पहले की सुनवाई में मनपा के वकील ने इस दावे का विरोध किया था। तब मनपा की ओर से कहा गया था कि धारकर कार्यकारी अभियंता के पद पर थे, जबकि जांभुलकर विकास अभियंता थे। दलील यह भी दी गई थी कि इन दोनों पदों के बीच उप अभियंता का पद आता है, इसलिए जिम्मेदारी और स्तर में बड़ा फर्क है।
गुरुवार को मनपा के वकील ने बताया कि धारकर का हलफनामा मिलने के बाद उन्होंने विभाग से जानकारी मांगी थी। लेकिन अनजाने में विकास अभियंता की जगह विकास अधिकारी के पद के बारे में पूछताछ हो गई। इसी गड़बड़ी की वजह से अदालत में कह दिया गया था कि दोनों पद अलग हैं।
नागपुर मनपा से पूरी जानकारी मिलने के बाद अदालत को बताया गया कि कार्यकारी अभियंता और विकास अभियंता वाकई समकक्ष पद हैं। यानी याचिकाकर्ता का दोनों पदों को बराबर बताने वाला बयान पूरी तरह सही था। मनपा ने इस आशय का हलफनामा भी रिकॉर्ड पर पेश किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता की पीठ ने मनपा के इस सुधार और हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया। पीठ ने साफ किया कि अब याचिकाकर्ता को यह साबित करने की जरूरत नहीं कि वे और जांभुलकर समकक्ष पदों पर थे।
याचिकाकर्ता की ओर से समय मांगे जाने पर अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सी. एम. समर्थ ने पैरवी की।