बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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अमेरिका में मध्यावधी चुनाव से पहले साइबर हमला, FEC की ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम ठप

अमेरिका में मध्यावधी चुनाव से पहले साइबर हमला, FEC की ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम ठप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

अमेरिका में 3 नवंबर के मध्यावधी चुनाव से कुछ दिन पहले फेडरल इलेक्शन कमिशन की ऑनलाइन सेवाएं हैकिंग की कोशिश के बाद बंद करनी पड़ीं।

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले बेहद अहम मध्यावधी चुनाव (US Midterms) से बस कुछ दिन पहले एक बड़े साइबर हमले ने हलचल मचा दी है। निशाने पर है फेडरल इलेक्शन कमिशन (FEC), जो चुनावी फंडिंग पर नजर रखने वाली अमेरिका की मुख्य केंद्रीय एजेंसी है।

घुसपैठ की इस कोशिश की वजह से आयोग को अपनी सारी वेब आधारित सेवाएं और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम फिलहाल बंद करना पड़ा। इससे चुनावी खर्च की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार रात FEC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सभी राजनीतिक पार्टियों की कैंपेन कंप्लायंस (Campaign Compliance) कंपनियों को तुरंत एक ईमेल भेजा। उसमें बताया गया कि किसी अज्ञात शरारती तत्व ने आयोग के डेटाबेस और सिस्टम में गैरकानूनी तरीके से घुसने की कोशिश की। सुरक्षा के तौर पर सिस्टम ने अपनी सारी इलेक्ट्रॉनिक सेवाएं बंद कर दीं। नतीजा यह कि प्रचार के ऐन बीच राजनीतिक पार्टियों के लिए खर्च की कानूनी रिपोर्ट दाखिल करना मुश्किल हो गया है।

अमेरिका में पार्टियों के लिए चुनाव के आखिरी दिनों में होने वाले भारी खर्च और मिले फंड का हिसाब देना कानूनन जरूरी होता है। राजनीतिक संगठन और ताकतवर 'सुपर पैक' (Super PACs) प्रचार पर रिकॉर्ड रकम खर्च कर रहे हैं। नियम के हिसाब से आखिरी चरण में उम्मीदवारों को 24 घंटे और 48 घंटे के भीतर मिले चंदे और खर्च की रिपोर्ट FEC के पास ऑनलाइन दाखिल करनी होती है।

अब यह फाइलिंग सिस्टम ही ठप हो जाने से यह फौरन पता चलना बंद हो गया है कि किस पार्टी को कहां से और कितना पैसा मिल रहा है। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि पहले दाखिल हो चुकी और डेटाबेस में मौजूद पुरानी रिपोर्ट देखने के लिए FEC की मुख्य वेबसाइट अभी चालू है। FEC के IT एक्सपर्ट्स ने इस तकनीकी गड़बड़ी की जड़ का पता लगा लिया है और इसे ठीक करने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है।

खबर बाहर आते ही अमेरिकी वोटरों में चिंता फैल गई थी। लेकिन FEC और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने तुरंत सफाई दी। अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में फेडरल इलेक्शन कमिशन सिर्फ चुनावी फाइनेंस और प्रचार के खर्च को रेगुलेट करता है। यह संस्था असल में चुनाव करवाने या ई-वोटिंग सिस्टम संभालने का काम नहीं करती।

इसलिए इस हमले का वोटरों के वोट डालने की क्षमता पर या EVM और मतपत्रों की सुरक्षा पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। साइबर सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी (CISA) और FBI जैसी केंद्रीय एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

इस साल के मध्यावधी चुनाव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। नतीजों से तय होगा कि रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों में अपना दबदबा बनाए रख पाती है या नहीं। अगर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को सत्ता मिली तो ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल के कानूनी एजेंडे पर बड़ी ब्रेक लग सकती है।

इस साइबर घटना की पृष्ठभूमि में ट्रंप ने एक बार फिर चुनाव की निष्पक्षता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर मध्यावधी चुनाव पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हुए, तभी वे नतीजों का सम्मान करेंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि आगे संसद में उनकी नीतियों का विरोध हुआ तो राष्ट्रपति के तौर पर अपने पास मौजूद 'वीटो' (Veto Power) का इस्तेमाल करेंगे। इसी राजनीतिक तनाव के बीच हुए इस साइबर हमले से अमेरिकी राजनीति में हलचल और बढ़ गई है।

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