अमेरिका में अक्टूबर में 1 लाख 65 हजार नई नौकरियां, बेरोजगारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत
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अमेरिकी श्रम विभाग की रिपोर्ट में नौकरियां अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ीं, पर महंगाई का दबाव बना हुआ है और नजर फेडरल रिजर्व के दिसंबर के फैसले पर है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद नई राजनीतिक स्थिति बन रही है और इसी बीच अर्थव्यवस्था से राहत देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अक्टूबर महीने में अमेरिकी कंपनियों ने उम्मीद से ज्यादा भर्ती की और 1 लाख 65 हजार नई नौकरियां जुड़ीं। बेरोजगारी दर भी 4.2 प्रतिशत से घटकर 4.1 प्रतिशत पर आ गई है। इससे अमेरिका के रोजगार बाजार में फिर से हलचल दिखने लगी है।
चुनाव के नतीजों के बाद ट्रम्प के लिए माहौल बदलने की उम्मीद थी। ट्रम्प की अपनी पार्टी के कुछ अहम लोगों ने हार का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ना शुरू कर दिया है। उपराष्ट्रपति जे. डी. वैन्स ने भी ट्रम्प को निशाने पर लिया। ऐसे में यह रोजगार रिपोर्ट एक अच्छी खबर बनकर आई है।
अमेरिका के श्रम विभाग की अक्टूबर की रोजगार रिपोर्ट के मुताबिक देश में 1 लाख 65 हजार नौकरियां बढ़ीं। अर्थशास्त्रियों ने इस दौरान सिर्फ 65 हजार नौकरियां बनने का अंदाजा लगाया था। असल आंकड़ा इससे काफी ऊपर रहा, यानी अपेक्षा से ढाई गुना ज्यादा।
सितंबर में सिर्फ 60 हजार नौकरियां जुड़ी थीं। अक्टूबर की बढ़त से संकेत मिलता है कि रोजगार बाजार की हालत सुधर रही है। इसके अलावा अगस्त और सितंबर के रोजगार आंकड़ों में मिलाकर 84 हजार नौकरियों का इजाफा करके सुधार किया गया है।
अक्टूबर में हेल्थ केयर, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज में नई नौकरियां बनीं। खास तौर पर गोदाम और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में 25 हजार नई नौकरियां जुड़ीं। दूसरी तरफ रेस्टोरेंट और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या घटी। यानी सभी क्षेत्रों में रोजगार की बढ़त एक जैसी नहीं रही। अर्थव्यवस्था की ताकत दिखती है, लेकिन नौकरी ढूंढ रहे नौजवानों के सामने चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
रोजगार के आंकड़े सुधरे हैं, फिर भी आम अमेरिकी को महंगाई से जूझना पड़ रहा है। अक्टूबर में कर्मचारियों की औसत तनख्वाह सालाना 3.1 प्रतिशत बढ़ी। लेकिन सितंबर में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, इसलिए जरूरी चीजों के दाम तनख्वाह से तेज रफ्तार से बढ़ रहे हैं।
ईरान युद्ध की वजह से ऊर्जा और ईंधन की कीमतों पर भी दबाव है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने पिछले हफ्ते ब्याज दरें स्थिर रखी थीं। अब रोजगार के नए आंकड़ों के बाद आर्थिक जगत की नजर दिसंबर में होने वाले ब्याज दर के फैसले पर टिकी है। मजबूत रोजगार बाजार से सरकार को राहत मिली है, पर महंगाई को काबू में रखने की चुनौती बनी हुई है।
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