सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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06:53 IST

अमेरिका में 53 फीसदी बड़ों के पास तीन महीने के खर्च जितनी बचत नहीं: प्यू सर्वे

प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के मुताबिक अमेरिका में 53 प्रतिशत वयस्कों के पास आपातकालीन बचत नहीं है।

अमेरिका में 53 फीसदी बड़ों के पास तीन महीने के खर्च जितनी बचत नहीं: प्यू सर्वे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कमाई अच्छी हो, तब भी अचानक नौकरी चली जाए या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए तो पैसों की तंगी हो सकती है। अमेरिका में भी बहुत से लोग ऐसे हालात के लिए तैयार नहीं रहते। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के मुताबिक अमेरिका के 53 प्रतिशत वयस्कों के पास इतनी बचत नहीं है कि बिना आमदनी के तीन महीने का खर्च चल सके। इससे पता चलता है कि कई लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा आज भी बड़ी चुनौती है।

सर्वे में लोगों की रोज की आर्थिक दिक्कतें भी सामने आईं। करीब 27 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने बताया कि एक आम महीने में वे अपने कुछ बिल पूरे नहीं भर पाते, या उन्हें वे बिल थोड़ा-थोड़ा करके भरने पड़ते हैं। इसके अलावा 44 प्रतिशत लोगों को पिछले एक साल में कम से कम एक जरूरी खर्च निपटाने में दिक्कत आई। इन खर्चों में इलाज, आने-जाने का खर्च, मकान का किराया या होम लोन और खाना शामिल हैं। कम आमदनी वालों के लिए ये जरूरतें पूरी करना खास तौर पर मुश्किल रहा।

आमदनी के हिसाब से हालात में बड़ा फर्क दिखा। कम आमदनी वाले 77 प्रतिशत लोगों के पास तीन महीने का खर्च चलाने लायक आपातकालीन बचत नहीं होती। मध्यम आमदनी वाले 52 प्रतिशत लोगों के पास भी ऐसा फंड नहीं होता। इनके मुकाबले ज्यादा आमदनी वालों की हालत बेहतर है। इस वर्ग के करीब 20 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके पास तीन महीने का खर्च चलाने जितनी बचत नहीं है। आंकड़े साफ बताते हैं कि कम आमदनी वाले परिवारों के लिए अचानक आए खर्च को संभालना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

सर्वे के मुताबिक पिछले साल 54 प्रतिशत अमेरिकी भविष्य के लिए बचत नहीं कर सके। वहीं 70 प्रतिशत लोगों ने बाहर खाने, मनोरंजन और दूसरी गैरजरूरी चीजों पर खर्च घटाया। यानी अच्छी आर्थिक हालत वाले देश में भी कई परिवार अपनी जरूरतों और बचत के बीच तालमेल बिठाने के लिए जूझ रहे हैं।

आपातकालीन फंड ऐसी बचत को कहते हैं जो नौकरी जाने, बीमारी या अचानक आए बड़े खर्च के वक्त काम आ सके। एक्सपर्ट आम तौर पर कम से कम तीन से छह महीने के जरूरी खर्च जितनी रकम अलग रखने की सलाह देते हैं। इससे मुश्किल वक्त में कर्ज लेने या रोज की जरूरतों में कटौती करने का खतरा कम हो सकता है।

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