अमलनेर में 108 के बाद अब 102 एंबुलेंस भी लड़खड़ाई, 24 घंटे के लिए बस एक ठेके का ड्राइवर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमलनेर तालुका में 102 एंबुलेंस सेवा ड्राइवरों की कमी से बेहाल है। डिलीवरी के लिए महिलाओं को प्राइवेट गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
अमलनेर (संवाददाता) तालुका में 108 एंबुलेंस सेवा के बाद अब 102 एंबुलेंस सेवा भी मुश्किल में आ गई है। हर एंबुलेंस के लिए 24 घंटे में सिर्फ एक ही ड्राइवर मौजूद है। ऊपर से ज्यादातर ड्राइवर ठेके पर रखे गए हैं। इस वजह से मरीजों को वक्त पर सेवा नहीं मिल पा रही है।
नतीजा यह है कि डिलीवरी के लिए महिलाओं को प्राइवेट गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार हालात ऐसे बने कि रिक्शा में ही डिलीवरी हो गई।
तालुका में कुल सात जगहों पर 102 एंबुलेंस खड़ी हैं। ये अमलनेर ग्रामीण अस्पताल, अमलगांव ग्रामीण अस्पताल और जानवे, मांडळ, मारवड, पातोंडा और ढेक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हैं। जानवे को छोड़ बाकी छह जगहों के ड्राइवर ठेके पर हैं। जानवे के पक्के ड्राइवर का भी निधन हो चुका है।
102 एंबुलेंस इसलिए शुरू की गई थीं कि डिलीवरी के दौरान माँ और बच्चे को फौरन इलाज मिल सके। हाल ही में यह सेवा दूसरे मरीजों के लिए भी खोलने का ऐलान हुआ, तो लोगों की उम्मीदें बढ़ गई थीं। लेकिन ड्राइवर छुट्टी पर हों या वक्त पर न मिलें, तो एंबुलेंस सेवा ठप हो जाती है।
गाँव-देहात में जरूरत पड़े तो शहर से या किसी दूसरे स्वास्थ्य केंद्र से एंबुलेंस बुलवानी पड़ती है। इसमें वक्त लगता है और मरीज इंतजार करता रह जाता है। कई बार महिलाओं को मजबूरन प्राइवेट गाड़ी करनी पड़ती है।
इसलिए मांग उठ रही है कि हर 102 एंबुलेंस पर ठेके के बजाय पक्के ड्राइवर रखे जाएँ। साथ ही 24 घंटे सेवा चालू रखने के लिए हर जगह दो ड्राइवर दिए जाएँ।
कॉल सेंटर को लेकर भी शिकायत है। 108 एंबुलेंस का कॉल सेंटर पुणे में है। इस वजह से पास के केंद्र की गाड़ी भेजने के बजाय कई बार दूर की जगह से गाड़ी रवाना कर दी जाती है। इससे देर होती है।
लोगों का कहना है कि 108 और 102, दोनों सेवाओं के कॉल सेंटर जिला स्तर पर अलग से शुरू किए जाएँ। उम्मीद जताई जा रही है कि तब नजदीकी केंद्र से फौरन एंबुलेंस मिल सकेगी।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।