बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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21:13 IST

करोड़ों खर्च के बाद भी शेवगांव वन पर्यटन केंद्र में पानी नहीं, तीन अधिकारियों के तीन बयान

शेवगांव का वन पर्यटन केंद्र पानी की कमी से बंद पड़ा है और वन विभाग के तीन अधिकारियों ने इसके बारे में अलग-अलग बातें कही हैं।

करोड़ों खर्च के बाद भी शेवगांव वन पर्यटन केंद्र में पानी नहीं, तीन अधिकारियों के तीन बयान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शेवगांव तालुका में प्रकृति प्रेमियों के लिए करोड़ों रुपये के निधि से बनाया गया वन पर्यटन केंद्र फिलहाल कागज पर ही बंद पड़ा है। प्रशासन की बेरुखी, कमजोर प्लानिंग और पानी की भारी किल्लत ने इस प्रोजेक्ट को ठप कर दिया है। सूखे का हवाला देकर केंद्र बंद रखा गया है, लेकिन इसी बीच विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर एक-दूसरे से उलट बयान दिए हैं। इससे वन विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं।

शेवगांव के लोगों और प्रकृति प्रेमियों को अच्छी सुविधा मिले, इसके लिए वन विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च कर यह केंद्र खड़ा किया। लेकिन जमीन पर इसकी प्लानिंग नाकाम रही। प्रोजेक्ट के कुएं का भूजल स्तर नीचे चला गया है और कुआं पूरी तरह सूख चुका है। नगरपालिका से टैंकर या पानी के लिए बार-बार कोशिश की गई, मगर शहर में ही पानी की भारी कमी होने से नगरपालिका ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

सूखे की हालत में इंसानों और जानवरों के पीने के पानी को पहले रखना पड़ता है, इसलिए पेड़ों को पानी देना मुमकिन नहीं है, ऐसी बेबसी अधिकारियों ने जताई है। उन्हीं का कहना है कि नया बोरवेल खोदा भी जाए तो वहां पानी लगने की संभावना बहुत कम है। ऐसे में सवाल उठता है कि पानी का पक्का स्रोत पता नहीं था, तो करोड़ों रुपये खर्च करके यह प्रोजेक्ट खड़ा ही क्यों किया गया।

इस मामले में जब मीडिया ने वन विभाग के अधिकारियों से बात की, तो तीन अलग-अलग अधिकारियों ने तीन अलग तरह की बातें बताईं। वनरक्षक बाळकृष्ण बडे ने कहा कि वन पर्यटन केंद्र सुबह 9 से 11 बजे तक चालू रहता है। वनपाल संदीप एकशिंगे ने इसके उलट कहा कि नहीं, यह केंद्र दिन भर चालू रहता है।

दोनों के दावों को विभागीय वन अधिकारी धर्मवीर साल विठ्ठल ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसका अभी ऑफिशियल इनॉगरेशन ही नहीं हुआ है और पानी न होने की वजह से कुछ पेड़ लगाने रह गए हैं। यानी एक ही विभाग के जिम्मेदार अधिकारी यह भी एक सुर में नहीं बता पा रहे कि प्रोजेक्ट चालू है या बंद। इससे पता चलता है कि विभाग का कामकाज कितनी ढिलाई से चल रहा है।

शेवगांव के लोगों में इस पर गुस्सा है। उनका कहना है कि सरकारी निधि को इस तरह बहाकर अधिकारियों ने प्रोजेक्ट सिर्फ कागज पर खड़े किए हैं और अब पत्रकारों के सामने उलटे-सीधे जवाब देकर अपना बचाव कर रहे हैं। सूखे को ढाल बनाकर अपने बिना प्लानिंग वाले कामकाज पर पर्दा डालने की कोशिश शेवगांव की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

शेवगांव के लोगों ने मांग की है कि सार्वजनिक निधि की ऐसी बर्बादी करने वाले और जनता को गुमराह करने के लिए गलत बयान देने वाले अधिकारियों की तुरंत उच्चस्तरीय जांच हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रोजेक्ट की जल्द से जल्द मरम्मत करके पानी का पक्का स्रोत नहीं बनाया गया और दोषी अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो वन विभाग के दफ्तर के सामने तीखा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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