अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल: नतीजे, फेड और कच्चे तेल पर रहेगी निवेशकों की नजर
कंपनियों के तिमाही नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला, कच्चे तेल के दाम और जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग तय करेंगे बाजार की दिशा।
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शेयर बाजार में इन दिनों काफी उठापटक चल रही है। कच्चे तेल के दाम अचानक बढ़ गए हैं और इससे बाजार को बड़ा झटका लगने के संकेत दिख रहे हैं। इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार किस तरफ जाएगा, यह कंपनियों के तिमाही नतीजों के साथ कई और बातों पर भी निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए इन बातों पर नजर रखना बहुत जरूरी है।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की चाल कंपनियों के तिमाही नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले, कच्चे तेल के दामों की दिशा और पश्चिम एशिया से जुड़ी घटनाओं पर टिकी रहेगी। इसके अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग, विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग और दुनिया भर के बाजारों का रुख भी निवेशकों के मूड पर असर डालेगा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने बताया कि निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर को आने वाले सितंबर महीने के औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों पर रहेगी।
तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रोल निभाएंगे। इस हफ्ते टीवीएस मोटर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडियन ऑयल, बैंक ऑफ बड़ौदा और गेल इंडिया जैसी कई कंपनियां अपने वित्तीय नतीजे जारी करेंगी।
मिश्रा के मुताबिक 28 अक्टूबर को होने वाला अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर ऐलान इस हफ्ते दुनिया के बाजारों के लिए सबसे अहम घटना होगी। आगे ब्याज दरें किस तरफ जाएंगी, इसका अंदाजा लगाने के लिए निवेशक दरों के फैसले, फेडरल रिजर्व के नीतिगत बयान और अधिकारियों की टिप्पणियों को बारीकी से परखेंगे।
HST वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक दुनिया के बाजारों के लिए अहम होगी। फिलहाल बाजारों को ब्याज दरों में बदलाव की ज्यादा उम्मीद नहीं है, इसलिए फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख और आगे के संकेत ज्यादा मायने रखेंगे।
उन्होंने आगे समझाया कि अगर अमेरिका का केंद्रीय बैंक महंगाई पर सख्त रुख बनाए रखता है, तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत हो सकते हैं। इसका असर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व संतुलित रुख अपनाता है, तो दुनिया के बाजारों को कुछ समय की राहत मिल सकती है।
राधाकृष्णन के मुताबिक भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावना दुनिया के दबाव का सामना कर पाएगी या नहीं, यह तय करने में देश के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम होंगे। इसी बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने वाले हैं। निवेशक इस पर बारीकी से नजर रखेंगे, जिससे प्राइमरी मार्केट के सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है।
एनरिच मैनिची के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बाजार के लिए बड़ी चिंता की बात हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल के बढ़ते दामों से भारत का ऊर्जा आयात का बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और कंपनियों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। डॉलर की वजह से चढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और दुनिया भर के निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान को देखते हुए निवेशक ब्याज दरों के आगे के रुख के संकेत तलाशेंगे।
इससे पहले पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 फीसदी गिरा, जबकि एनएसई निफ्टी 546.15 अंक यानी 2.36 फीसदी लुढ़का।
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