आमने सामने नाटक विवाद: रोहन गुजर और केतकी पालव बोले, डेढ़ हजार के फर्क पर हटाया गया
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नाटक 'आमने सामने' से हटाए गए रोहन गुजर और केतकी पालव ने निर्माताओं के दावे पर नया वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।
मराठी रंगभूमि पर चल रहे नाटक 'आमने सामने' के कलाकारों का विवाद पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है। अभिनेता रोहन गुजर और केतकी पालव ने आरोप लगाया था कि उन्हें नाटक से अचानक हटा दिया गया। उन्होंने यह आरोप नाटक के निर्माताओं पर लगाया था।
इसके बाद निर्माता लीना भागवत और मंगेश कदम ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दावा किया कि रोहन और केतकी ने तीसरी बार मेहनताना बढ़ाने की मांग की थी। अब रोहन और केतकी ने इस पर एक बार फिर सफाई दी है। उनका यह नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने इसे इंस्टाग्राम पर 'हमारी तरफ से पूर्णविराम' कैप्शन के साथ पोस्ट किया है।
नया वीडियो शेयर करते हुए रोहन और केतकी ने कहा, "हमने अपने निर्माताओं (लीना भागवत, मंगेश कदम) का वीडियो देखा। हमने उस वीडियो के कमेंट्स भी पढ़े और सिक्के का दूसरा पहलू भी सुना। लेकिन अपनी बात रखते वक्त अनजाने में, गलती से, सहूलियत के हिसाब से या जानबूझकर कुछ मुद्दे नहीं रखे गए। वही रखने के लिए हम यह नया वीडियो बना रहे हैं। इस वीडियो के बाद हमें भी ऐसा कोई वीडियो बनाने की बिल्कुल इच्छा नहीं है। हमारे निर्माताओं ने तीन बार मेहनताना बढ़ाने की बात जितने जोर से कही, उतने जोर से यह नहीं बताया कि यह आठ साल में तीसरी बढ़ोतरी थी। अब यह समझ बन गई है कि हमने एक साल में तीन बार पैसे बढ़ाने को कहा। ऐसा नहीं है।"
दोनों ने आगे कहा कि आठ साल में तीसरी बढ़ोतरी का मतलब औसतन ढाई से पौने तीन साल में एक बार मेहनताना बढ़ना है। उनके मुताबिक पहली बढ़ोतरी चार साल बाद हुई, जो बेहद मामूली थी, और यह बात खुद निर्माताओं ने भी मानी। दूसरी बढ़ोतरी छह साल बाद हुई। उस दौरान एक बार उनका नाटक बंद हो गया था और फिर नए सिरे से शुरू हुआ। उसके बाद चार महीने के करीब हाउसफुल प्रयोग हुए और तब उन्होंने मेहनताना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। छह साल के हिसाब से जितनी बेसिक बढ़ोतरी बनती थी, वह आंकड़ा उन्होंने निर्माताओं के सामने रखा। उनका कहना है कि सारे मैसेज उनके पास भी हैं और निर्माताओं का यह कहना गलत है कि उनकी मांगें आसानी से मान ली गईं।
केतकी ने निर्माता का एक वाक्य पढ़कर सुनाया कि 'निर्माता के तौर पर मैं खुद मन मारकर यह बढ़ोतरी कर रही हूं'। उनके मुताबिक इसका मतलब है कि यह बढ़ोतरी भी निर्माताओं ने मन से नहीं की थी। तीसरी बढ़ोतरी वे अब ठीक एक साल बाद कर रहे थे। रोहन और केतकी ने कहा कि इन सात सालों में निर्माता कभी खुद आकर यह नहीं बोले कि नाटक अच्छा चल रहा है, बुकिंग अच्छी है, हाउसफुल हो रहा है, तो अब आपके पैसे बढ़ाते हैं। मेहनताना बढ़वाते समय उन्होंने यह भी साफ किया था कि अगर बुकिंग घटी तो वे फिर कम मेहनताने में काम करने को तैयार होंगे, क्योंकि उन्हें यह नाटक आखिर तक करना है।
वीडियो में दोनों ने कोरोना लॉकडाउन का भी जिक्र किया। उस समय नाटकों के लिए 50 प्रतिशत दर्शक क्षमता की सीमा थी और निर्माताओं ने 50 प्रतिशत मेहनताना देने को कहा था। रोहन और केतकी के मुताबिक वे उसी वक्त इसके लिए तैयार हो गए थे।
उनका कहना है कि सात साल तक टीम के तौर पर ईमानदारी से काम करने के बाद मेहनताने में डेढ़ हजार रुपये के फर्क की वजह से उन्हें रिप्लेस कर दिया गया। रोहन ने भावुक होकर कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इसी बात की है।
वीडियो के आखिर में केतकी पालव ने भी अपनी भावनाएं रखीं। जिन लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और नाटक के अच्छे दिन देखे, उन्हीं के हाथों बहुत बुरे तरीके से किनारे किए जाने का उन्होंने दुख जताया।
रोहन गुजर और केतकी पालव के इस नए वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी है और कलाकारों व दर्शकों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
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