मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

'शुभं करोति': बच्चों के सपने या मां-बाप की उम्मीदें, नए मराठी नाटक में घर-घर की कहानी

1 अक्टूबर से रंगमंच पर आ रहा नया मराठी नाटक 'शुभं करोति' बच्चों के सपनों और पालकों की अपेक्षाओं के बीच के टकराव की कहानी कहता है।

'शुभं करोति': बच्चों के सपने या मां-बाप की उम्मीदें, नए मराठी नाटक में घर-घर की कहानी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

घर की बात हो तो प्यार, अपेक्षाएं, सपने, मतभेद और एक-दूसरे की फिक्र, यह सब साथ ही आता है। बच्चों के सपने और पालकों की उम्मीदों के बीच की रस्सी पर चलने वाली यह कसरत बहुत से घरों में दिखती है। इसी घर-घर में घटने वाली बातों को रंगमंच पर लेकर आ रहा है 'शुभं करोति' नाम का नया मराठी नाटक। 'नाटक में घर नहीं, घर-घर का नाटक' यह पहचान लेकर आने वाला यह नाटक 1 अक्टूबर से रंगमंच पर दाखिल हो रहा है।

ब्ल्यू रॅम्प एन्टरटेन्मेंट, नितीन वैद्य प्रॉडक्शन्स और सरगम क्रिएशन्स की प्रोडक्शन और रावेतकर की प्रस्तुति वाले इस नाटक को वैभव जोशी ने लिखा है, जबकि निर्देशन भाग्येश रानडे का है। श्रीरंग खापर्डे, सिद्धार्थ गोखले, नितीन प्रकाश वैद्य और राहुल शरद अवस्थी इस नाटक के निर्माता हैं।

'शुभं करोति' की कहानी एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार के आसपास घूमती है। अपनी जिंदगी और करियर को लेकर अलग सपने देखने वाले एक जवान लड़के का सफर, उसके फैसलों को पालक जिस नजर से देखते हैं उससे पैदा होने वाले सवाल, और असफलता के मौके पर परिवार से मिलने वाला साथ, इन सबकी भावनात्मक बुनावट इस नाटक में देखने को मिलेगी। आज की पीढ़ी की सोच से लेकर पालकों के मन की फिक्र तक, कई जानी-पहचानी बातें इस कहानी से सामने आएंगी।

यह नाटक रंगमंच पर पारिवारिक रिश्तों की कहानी सुनाने के साथ-साथ असफलता को देखने का नजरिया, खुद को समझना और जिंदगी में सही रास्ता ढूंढने का सफर भी दिखाता है। रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से कानों पर पड़ने वाले मराठी श्लोक और संतसाहित्य के विचारों को आज की जिंदगी के सवालों से जोड़ते हुए नाटक आगे बढ़ता है। इसी वजह से परंपरा और आज की पीढ़ी के बीच एक सुंदर संवाद भी इस नाटक से दिखने वाला है।

निर्देशक भाग्येश रानडे कहते हैं, "'शुभं करोति' एक घर की कहानी है और साथ ही कई घरों की भी कहानी है। आज बच्चों के सपनों और पालकों की उम्मीदों का मेल बिठाते वक्त कई परिवारों में अलग-अलग सवाल पैदा होते हैं। असफलता आने पर हम खुद को और अपने लोगों को कैसे देखते हैं, यह इस नाटक का अहम हिस्सा है। श्लोक और संतसाहित्य के विचारों को हमने कोई उपदेश दिए बिना कहानी में सहजता से पिरोया है। दर्शकों को यह नाटक देखते वक्त कहीं न कहीं दिल से लगे कि यह तो अपने ही घर की कहानी है, यही हमारी इच्छा है।"

लेखक वैभव जोशी कहते हैं, "'शुभं करोति' लिखते वक्त मुझे आज के परिवारों में बदलते जा रहे रिश्तों और उन रिश्तों के पीछे की भावनाओं को दिखाना था। बच्चों को अपनी जिंदगी खुद बनानी होती है तो पालकों को उनके भविष्य की फिक्र होती है। इन दो पक्षों के बीच का संवाद, उससे बनने वाले प्रसंग और आखिर में एक-दूसरे को समझने की कोशिश, यही इस नाटक का मूल है। आज के दौर में भी अपने संस्कारों के विचार हमें कैसे जोड़े रखते हैं, यह कहानी से दिखाने की कोशिश की गई है।"

इस नाटक में अभिनय बेर्डे, अपूर्वा गोरे, सीमा देशमुख और हृषिकेश जोशी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। 1 अक्टूबर से घर-घर में घटने वाली यह कहानी रंगमंच पर दाखिल हो रही है। अपने परिवार के रिश्तों, सपनों और उम्मीदों की कुछ जानी-पहचानी झलक दिखाने वाला 'शुभं करोति' दर्शकों को हंसाएगा, भावुक करेगा और अपने घर को नई नजर से देखने पर भी मजबूर करेगा।

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