सिगारेट के टुकड़ों से बनेंगे मजबूत रोड, ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स का शहर की गर्मी कम करने का तरीका
RMIT यूनिवर्सिटी, मेलबर्न के इंजीनियरों ने सिगारेट के टुकड़ों को डामर में मिलाकर सड़क बनाने का तरीका खोजा है, जिससे कचरा भी कम होगा और शहरों की गर्मी भी।
दुनिया में हर साल अरबों सिगारेट पी जाती हैं, और इनके टुकड़े सड़कों, फुटपाथ या खुले में ही फेंक दिए जाते हैं। देखने में यह कचरा बहुत छोटा लगता है, लेकिन पर्यावरण के लिए यह बेहद खतरनाक है। इसकी वजह यह है कि सिगारेट के फिल्टर में जो सेल्युलोज ऐसीटेट प्लास्टिक होता है, वह आसानी से नहीं गलता और हजारों साल तक जमीन में वैसे ही पड़ा रहता है।
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मौजूद मशहूर RMIT यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने अब इस कचरे का एक बेहद क्रिएटिव और पर्यावरण के लिए फायदेमंद इस्तेमाल खोज निकाला है। इन्होंने सिगारेट के टुकड़ों को सड़क बनाने के सामान में मिलाकर, पर्यावरण बचाने का एक नया रास्ता दुनिया को दिखाया है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, सिगारेट के इस कचरे को सीधे डामर में मिलाने से पहले उस पर एक खास तरह का प्रोसेस किया जाता है। सिगारेट के फिल्टर में निकोटीन, भारी धातु और कई जहरीले रसायनों के अवशेष जमा रहते हैं। बारिश के पानी या किसी और लिक्विड के संपर्क में आने पर ये रसायन जमीन या पानी में मिल जाने का बड़ा खतरा रहता है। इस खतरे से बचने के लिए रिसर्चर्स ने टुकड़ों पर बिटुमेन या पैराफिन वैक्स की कोटिंग करके उन्हें पूरी तरह सील करने की तकनीक तैयार की है। यह सुरक्षा परत रसायनों को बाहर निकलने से रोकती है।
लैब में हुई अलग-अलग टेस्टिंग में यह देखा गया कि ठीक मात्रा में कोटेड सिगारेट टुकड़ों से बनाया गया डामर भारी ट्रैफिक का लोड भी आसानी से झेल सकता है। इस एक्सपेरिमेंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस नए डामर की थर्मल कंडक्टिविटी यानी गर्मी सोखने की क्षमता, आम पारंपरिक डामर की तुलना में काफी कम है।
'कंस्ट्रक्शन एंड बिल्डिंग मटीरियल्स' नाम की जानी-मानी इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सिगारेट के टुकड़े मिलाने से डामर की डेंसिटी कम हो जाती है और उसकी पोरोसिटी बढ़ जाती है। इस फिजिकल बदलाव की वजह से डामर की सूरज की तेज गर्मी सोखने और उसे फैलाने की क्षमता काफी कम हो जाती है।
आजकल बड़े शहरों में कंक्रीट और डामर बढ़ने से 'अर्बन हीट आइलैंड' नाम की गंभीर प्रॉब्लम पैदा हो गई है, जिसमें गांव और खुले इलाकों की तुलना में शहरों का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। आम डामर सूरज की गर्मी सोख लेता है और रात के वक्त उसे हवा में छोड़ देता है, जिससे शहर में उमस और बढ़ जाती है। लेकिन सिगारेट के टुकड़ों से बना यह नया डामर गर्मी का असर कम करता है, जिससे शहरों का तापमान कंट्रोल में रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
दुनिया में सबसे ज्यादा फेंका जाने वाला कचरा सिगारेट के टुकड़े ही हैं। यह कचरा नदियों, नालों और समुद्र में जाकर जलीय जीवों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। ऐसे हालात में RMIT यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अब्बास मोहजरानी (Dr. Abbas Mohajerani) और उनकी टीम ने जो रास्ता खोजा है, उसे बहुत क्रांतिकारी माना जा रहा है।
इस एक्सपेरिमेंट से दो बड़ी ग्लोबल प्रॉब्लम एक साथ हल हो सकती हैं, पहली प्लास्टिक और जहरीले कचरे का खात्मा, और दूसरी शहरों में बढ़ता तापमान। यह पहल सिर्फ सड़कों की मजबूती नहीं बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण का बैलेंस बनाए रखने और आज के शहरों को रहने के लिए बेहतर बनाने में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।