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28 अक्टूबर को ऐनिमेशन डे: 1892 के पेरिस शो से शुरू हुआ कार्टून और VFX का सफर

28 अक्टूबर को ऐनिमेशन डे: 1892 के पेरिस शो से शुरू हुआ कार्टून और VFX का सफर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

हर साल 28 अक्टूबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय ऐनिमेशन दिवस मनाया जाता है। इसकी जड़ें 1892 के एक पेरिस शो में हैं।

हर साल 28 अक्टूबर को दुनिया भर में 'अंतरराष्ट्रीय ऐनिमेशन दिवस' मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ पर्दे पर दिखने वाले काल्पनिक किरदारों का जश्न नहीं है। यह उन लाखों ऐनिमेटरों, डिजिटल आर्टिस्टों और तकनीशियनों की मेहनत को सलाम करने का दिन भी है, जो इन किरदारों में जान डालते हैं। बच्चों के पसंदीदा कार्टून से लेकर बड़े पर्दे के आंखें चौंधिया देने वाले विजुअल इफेक्ट्स (VFX) तक, ऐनिमेशन ने इंसान की कल्पना को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

आज के डिजिटल दौर में ऐनिमेशन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया की शॉर्ट रील्स, मोबाइल गेम, हॉलीवुड और बॉलीवुड की ऐक्शन फिल्में और यहां तक कि मेडिकल पढ़ाई के 3D मॉडल, सबमें ऐनिमेशन का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए इस दिन की अहमियत सिर्फ कलाकारों तक सीमित नहीं है, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी इसे बहुत कीमती माना जाता है।

इसकी शुरुआत की कहानी दिलचस्प है। 28 अक्टूबर 1892 को पेरिस के 'मुसी ग्रेविन' (Musée Grévin) में फ्रांस के आविष्कारक एमिल रेनो (Émile Reynaud) ने अपने उपकरण 'थिएटर ऑप्टिकल' (Théâtre Optique) के जरिए पहली बार जनता के सामने ऐनिमेशन शो दिखाया था। हाथ से रंगी गई सैकड़ों तस्वीरों की पट्टियों की मदद से पर्दे पर हरकत दिखाने का यह पहला कामयाब प्रयोग था।

इसी ऐतिहासिक प्रयोग की याद में 2002 में 'इंटरनेशनल ऐनिमेटेड फिल्म एसोसिएशन' (ASIFA) ने 28 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर 'अंतरराष्ट्रीय ऐनिमेशन दिवस' घोषित किया। इसके बाद यूनेस्को (UNESCO) के समर्थन से यह दिन दुनिया भर में वर्कशॉप, फिल्म महोत्सव और प्रदर्शनियों के जरिए मनाया जाने लगा।

पिछले कुछ दशकों में ऐनिमेशन इंडस्ट्री ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव लाया है। एक वक्त था जब 2D ऐनिमेशन के लिए हर फ्रेम कागज पर हाथ से बनाया जाता था, जिसमें बहुत वक्त और मेहनत लगती थी। कंप्यूटर आने के बाद यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

कंप्यूटर से बनी इमेज यानी CGI (Computer-Generated Imagery) की वजह से ऐनिमेटेड किरदारों को जान और गहराई (Depth) मिली। पहली पूरी तरह 3D ऐनिमेटेड फिल्म 'टॉय स्टोरी' से शुरू हुआ यह सफर आज 'अवतार' और 'मार्वल' की काल्पनिक दुनिया तक पहुंच चुका है। मोशन कैप्चर (Mo-Cap) तकनीक में असली कलाकारों की हरकतें और चेहरे के हावभाव डिजिटल किरदारों में ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे ऐनिमेशन बेहद असली लगता है।

अब ऐनिमेशन में AI और वर्चुअल रियलिटी (VR) का इस्तेमाल भी बढ़ा है। इससे गेमिंग और फिल्म बनाने की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है और दर्शकों को 360 डिग्री का अलग तरह का अनुभव मिल रहा है।

ऐनिमेशन अब सिर्फ सिनेमा और सीरियलों तक सीमित नहीं रहा। मेडिकल क्षेत्र में पेचीदा सर्जरी समझने के लिए 3D ऐनिमेशन काम आता है, जबकि पढ़ाई में मुश्किल कॉन्सेप्ट आसान तरीके से समझाने के लिए ऐनिमेटेड वीडियो काफी असरदार साबित हो रहे हैं।

डिजिटल मीडिया और गेमिंग इंडस्ट्री के फैलाव से इस क्षेत्र में करियर के बहुत मौके बने हैं। विजुअल आर्टिस्ट, रिगिंग एक्सपर्ट, 3D मॉडलर, कैरेक्टर डिजाइनर और VFX स्पेशलिस्ट के तौर पर नई पीढ़ी इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऐनिमेशन दिवस यही सिखाता है कि कल्पना की कोई हद नहीं होती और सही तकनीक के साथ सपनों को भी पर्दे पर जिंदा किया जा सकता है।

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