17 से ज्यादा म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड FoF में नया निवेश रोका, पुराने SIP चालू रहेंगे
धनतेरस से पहले सेबी के निर्देश पर गोल्ड FoF में नए निवेश पर रोक लगी है, पर 16 अक्टूबर से पहले के SIP चालू रहेंगे।
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धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने में डिजिटल तरीके से पैसा लगाने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। HDFC, ICICI प्रुडेंशियल, SBI और टाटा समेत 17 से ज्यादा बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों ने सभी गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (FoFs) और कुछ गोल्ड-सिल्वर FoF में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है।
बाजार नियामक सेबी (SEBI) के निर्देश के बाद म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने यह फैसला लिया है। त्योहारों के सीजन में सोने की मांग अचानक बढ़ती है। इससे आयात पर दबाव पड़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार के इंतजाम का सवाल भी खड़ा होता है। इसी वजह से यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
कई फंड हाउस ने 16 अक्टूबर से सोने से जुड़ी योजनाओं पर पाबंदी लगाई है। इसमें हर तरह का नया लंपसम निवेश बंद है। नए SIP का रजिस्ट्रेशन भी नहीं होगा। मौजूदा SIP में रकम बढ़ाने या टॉप-अप और स्टेप-अप की रिक्वेस्ट भी नहीं ली जाएगी। स्विच-इन के लेन-देन और नए STP का रजिस्ट्रेशन भी रोक दिया गया है।
राहत की बात यह है कि 16 अक्टूबर से पहले जो SIP या STP रजिस्टर्ड हो चुके हैं, उनकी मासिक किस्तें पहले की तरह कटती रहेंगी। ये किस्तें बाजार के मौजूदा NAV पर ही प्रोसेस होंगी। रिडेम्पशन और स्विच-आउट की सुविधा भी हमेशा की तरह चालू है, इसलिए यूनिट्स का पैसा निकालने में किसी को दिक्कत नहीं आएगी।
यह फैसला क्यों लिया गया, इसके कई कारण बताए गए हैं। धनतेरस और दिवाली के दौरान भारत में सोने की मांग बहुत बढ़ जाती है और भारी पैसा गोल्ड ETF और गोल्ड फंड्स की तरफ मुड़ता है। नियमों के हिसाब से फंड कंपनियों को डिजिटल या कागजी सोने के बदले 100% असली सोना रखना पड़ता है। अचानक आई इतनी बड़ी मांग में बाजार से इतना सोना खरीदना और संभालना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
भारत अपनी जरूरत के सोने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। त्योहारों में आयात बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है। राष्ट्रीय हित और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। साथ ही हाल में देश और दुनिया के बाजारों में सोने के दाम काफी ऊपर-नीचे हुए हैं, इसलिए कंपनियों ने अस्थायी एहतियात के तौर पर भी यह फैसला किया है।
कुछ समय पहले देश के नेतृत्व ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया के संघर्ष को देखते हुए लोगों से गैरजरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। सोने का आयात घटाना इस फैसले का एक अप्रत्यक्ष मकसद हो सकता है।
रोक लगाने वाली कंपनियों में HDFC, ICICI Prudential, SBI, Tata, Kotak Mahindra, UTI, Aditya Birla Sun Life, Axis, Nippon India और Mirae Asset के म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इनके अलावा HSBC, DSP, Invesco, Quantum, Zerodha, Groww और LIC Mutual Fund भी इस सूची में हैं।
अगर आपका SIP 16 अक्टूबर से पहले शुरू हो चुका है तो घबराने की जरूरत नहीं है। बैंक खाते से हर महीने रकम पहले की तरह कटेगी और गोल्ड फंड में जाएगी। नया SIP अभी शुरू नहीं हो सकता। यह पाबंदी अस्थायी है और अगले आदेश तक लागू रहेगी, इसलिए कंपनियों या सेबी की नई गाइडलाइन आने तक इंतजार करना होगा। पुराना पैसा निकालना चाहें तो रिडेम्पशन पर कोई रोक नहीं है, आप अपनी यूनिट्स कभी भी बेच सकते हैं और रकम खाते में आ जाएगी।
नया निवेश करने के और रास्ते भी हैं। डीमैट खाते से शेयर बाजार में सीधे गोल्ड ETF खरीदा जा सकता है, हालांकि कुछ ब्रोकर या प्लेटफॉर्म पर पहले जांच कर लेना जरूरी है। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को सबसे फायदेमंद और सुरक्षित विकल्प माना जाता है, क्योंकि उसमें सोने की कीमत के अलावा ब्याज भी मिलता है, लेकिन भारत सरकार ने फिलहाल यह योजना बंद कर रखी है। डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म भी देखे जा सकते हैं, पर सुरक्षा और चार्जेस को ठीक से परखना होगा। सराफा बाजार से गहने या बिस्किट खरीदना भी हमेशा की तरह खुला है, मगर उसमें सुरक्षा का सवाल और मेकिंग चार्जेस का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
यह फैसला डिजिटल सोने के निवेशकों के लिए थोड़ा झटका जरूर है, लेकिन इसे बाजार की स्थिरता के लिए रिस्क मैनेजमेंट का अस्थायी हिस्सा बताया गया है। कहा जा रहा है कि इससे देश की विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव घटेगा और सोने के बाजार में कृत्रिम उछाल से बचा जा सकेगा।
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