उल्हास नदी में गंदगी बढ़ने से बदलापुर-अंबरनाथ में पानी की सप्लाई पर असर
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने पानी छानकर और उबालकर पीने की अपील की, गढुळता दस साल में सबसे ज्यादा
पिछले कुछ दिनों से उल्हास नदी के पानी में गंदगी यानी गढुळता काफी बढ़ गई है। पानी का रंग पहले से ज्यादा गहरा हो गया है और उसमें भारी मात्रा में गाद यानी सिल्ट आ रहा है। इस वजह से पानी खींचने और उसे साफ करने की प्रोसेस में मुश्किलें आ रही हैं। कई इलाकों के लोगों की शिकायत है कि नल से गंदा पानी आ रहा है। इसे देखते हुए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी को छानकर और उबालकर ही पिएं।
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के उपविभागीय इंजीनियर सुरेश खाद्री ने शनिवार को उल्हास नदी पर बैराज स्थित जलशुद्धीकरण केंद्र पर जाकर जांच की। उन्होंने गढुळता मापने वाली मशीन से पानी की टेस्टिंग की, जिसमें यह 370 एनटीयू यानी नेफेलोमेट्रिक टर्बिडिटी यूनिट पर पाया गया। बताया जा रहा है कि बारिश के मौसम में नदी के तल में जमा गाद ऊपर आने से आम तौर पर गढुळता का लेवल 150 से 200 एनटीयू के बीच ही रहता है।
लेकिन इस बार गढुळता ने यह लिमिट पार कर दी है और यह पिछले दस साल में सबसे ज्यादा बताई जा रही है। इसी वजह से पानी खींचने और उसे शुद्ध करने के काम में रुकावट आ रही है। पानी में इतना गाद आ रहा है कि हर तीन घंटे में फिल्टर बंद करना पड़ रहा है। प्रेशर फिल्टर भी काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे पानी को फिल्टर करने की क्षमता कम हो गई है।
उल्हास नदी माथेरान की पहाड़ियों से निकलकर कर्जत और वांगणी होते हुए बदलापुर इलाके से गुजरती है। बदलापुर शहर का पानी का मुख्य स्रोत यही नदी है। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण का कहना है कि कर्जत तालुका में नदी के किनारे चल रहे पहाड़ खोदने के काम या किसी और तरह की खोदाई की वजह से यह गढुळता बढ़ी होने की संभावना है। अंदाजा है कि खोदाई से निकली मिट्टी और बहुत बारीक कण बारिश के पानी के साथ बहकर नदी में आ गए, जिससे पानी और गंदा हो गया।
बदलापुर और अंबरनाथ दोनों शहरों की मिलाकर पानी की जरूरत करीब 140 एमएलडी है, लेकिन उल्हास नदी में बढ़ी गढुळता की वजह से फिलहाल सिर्फ 105 से 110 एमएलडी पानी की ही सप्लाई हो पा रही है। गढुळता पूरी तरह कम न होने से कुछ इलाकों में नल से गंदा पानी आने की शिकायतें बनी हुई हैं। महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अगर यह स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो जरूरत पड़ने पर एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने का विकल्प भी विचार में लिया जा सकता है।