अमेरिका ने भारतीय साखर के लिए कम शुल्क वाला आयात कोटा 542 मेट्रिक टन बढ़ाया
अमेरिका ने भारत से कच्ची गन्ना साखर की आयात के लिए रियायती दर का कोटा बढ़ाकर 9,148 मेट्रिक टन कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में साखर बेचने का एक और मौका मिलेगा।
भारत की साखर इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी खबर आई है। अमेरिका ने भारत से कच्चे गन्ने की साखर की आयात के लिए 542 मेट्रिक टन का रियायती दर वाला कोटा मंजूर किया है। इससे साल 2027 के लिए भारत का कुल रियायती दर कोटा बढ़कर 9,148 मेट्रिक टन हो गया है।
इसका मतलब यह है कि एक तय सीमा तक की भारतीय साखर पर अमेरिका में कम शुल्क लगेगा। इससे भारतीय साखर निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में साखर बेचने का एक और मौका मिलेगा।
अमेरिका साखर की आयात पर दर-कोटा सिस्टम लागू करता है। इस सिस्टम के तहत दूसरे देशों को अमेरिका में एक तय मात्रा तक साखर आयात करने की इजाजत होती है, और उस तय सीमा के अंदर की साखर पर कम शुल्क लगाया जाता है। मगर अगर तय कोटे से ज्यादा साखर निर्यात की जाती है, तो उस पर ज्यादा शुल्क लगता है।
अमेरिका ने जुलाई 2026 में भारत के लिए 8,606 एमटीआरव्ही का शुरुआती कोटा तय किया था। अब उसमें 542 एमटीआरव्ही की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है। इस तरह भारत को वित्त वर्ष 2027 के लिए कुल 9,148 एमटीआरव्ही का रियायती दर कोटा मिला है। यह कोटा 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027 तक के वित्त वर्ष के लिए है। ऐसा नहीं है कि भारत की पूरी साखर निर्यात पर कम शुल्क लागू होगा, सिर्फ तय कोटे के अंदर निर्यात की गई साखर पर ही यह शुल्क लागू होगा।
अमेरिका डब्ल्यूटीओ के तहत हर वित्त वर्ष में कच्चे गन्ने की साखर के लिए दर कोटा तय करता है। वित्त वर्ष 2027 के लिए कुल रियायती दर कोटा 1,117,195 एमटीआरव्ही है। अमेरिका ने इस कोटे का बड़ा हिस्सा जुलाई में अलग-अलग देशों को बांट दिया था, और अब बचे हुए 55,993 एमटीआरव्ही का बंटवारा किया गया है। भारत को इसी बचे हुए कोटे में से 542 एमटीआरव्ही मिला है।
इस बढ़ोतरी का देश के अंदर साखर की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत के घरेलू बाजार में साखर की कीमत देश के उत्पादन, स्टॉक, मांग और सरकार की निर्यात-आयात पॉलिसी के हिसाब से तय होती रहती है।