पुणे में फायर सर्टिफिकेट रिन्यू न कराने वालों से वसूली की तैयारी, पीएमसी को 15-20 करोड़ की उम्मीद
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे महानगरपालिका (PMC) का फायर विभाग उन प्रतिष्ठानों और हाउसिंग सोसायटियों का पता लगा रहा है, जिन्होंने फायर सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं कराया और सालाना फायर सर्विस चार्ज नहीं भरा।
पुणे नगर निगम (PMC) के फायर विभाग ने उन प्रतिष्ठानों और हाउसिंग सोसायटियों की तलाश शुरू कर दी है, जिन्होंने अपना फायर सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं कराया या सालाना फायर सर्विस चार्ज नहीं भरा। बकाया की वसूली का प्रस्ताव मंजूरी के लिए नगर निगम आयुक्त नवल किशोर राम को भेजा गया है। विभाग का कहना है कि इस वसूली से नगर निगम को हर साल 15 से 20 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
आयुक्त के आदेश पर फायर विभाग ने शहर भर में कोचिंग क्लासेस, पीजी, शैक्षणिक इमारतों, खतरनाक गोदामों, कबाड़ की दुकानों, अस्पतालों, पेट्रोल पंपों और दूसरे प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के इंतजामों की जांच भी शुरू की है।
जांच में पता चला कि इनमें से कई प्रतिष्ठानों ने आग बुझाने के इंतजाम किए ही नहीं थे। यह भी सामने आया कि कई ने कारोबार चलाने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली थी और रिन्यूअल के लिए नगर निगम को हर साल दी जाने वाली फीस भी नहीं भरी थी।
फायर विभाग के प्रमुख गणेश सोनुने ने कहा कि समस्या इससे कहीं बड़ी है। उनके मुताबिक शहर की कई सोसायटियां फायर विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेती ही नहीं हैं। जो लेती हैं, वे भी सर्टिफिकेट की मियाद खत्म होने के बाद अक्सर उसे रिन्यू नहीं करातीं।
नई इमारत का फाइनल ऑक्युपेंसी लेटर देते समय PMC फायर फाइटिंग फीस लेती है। फायर सेफ्टी एक्ट के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों और बड़ी हाउसिंग सोसायटियों को उस फीस का एक प्रतिशत हर साल PMC को देना होता है और अपना सर्टिफिकेट रिन्यू कराना होता है। फाइनल ऑक्युपेंसी लेटर जारी होने के बाद फायर फीस से फायर विभाग को 150 से 200 करोड़ रुपये मिलते हैं। उसका एक प्रतिशत हर साल 15 से 20 करोड़ रुपये बैठता है।
सोनुने ने बताया कि ज्यादातर प्रतिष्ठान फाइनल ऑक्युपेंसी लेटर मिलते ही पैसा भरना बंद कर देते हैं। उन्होंने कहा, "शहर के प्रतिष्ठानों को हर साल फीस का एक प्रतिशत भरना होता है। लेकिन इस लापरवाही की वजह से यह बात सामने आई है कि नगर निगम की आमदनी घट रही है। इसलिए फायर विभाग ने समीक्षा के बाद यह रकम वसूलने का फैसला किया है और मंजूरी के लिए आयुक्त को प्रस्ताव दे दिया गया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग लापरवाही करने वालों को ढूंढ रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई पहले ही शुरू कर दी गई है। तेजी से बढ़ते शहर की वजह से फायर सर्विस पर बोझ भी बढ़ा है, इसीलिए विभाग ने इन चार्जेस की वसूली को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।