पुणे में घर खरीदने से पहले क्या देखें: इलाका, बजट, रेरा और एग्रीमेंट की पूरी गाइड
घर खरीदना ज्यादातर पुणे परिवारों का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला होता है। इलाके, कुल खर्च, महारेरा, लोन और एग्रीमेंट तक, खरीदार को क्या जांचना चाहिए।
पुणे के ज्यादातर परिवारों के लिए घर खरीदना सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में से एक होता है। लेकिन यह फैसला सिर्फ फ्लैट का नहीं होता। इसमें रोज सुबह का रास्ता, दफ्तर का सफर, बच्चों का स्कूल और आधी रात को काम आने वाला अस्पताल भी शामिल है। पानी की सप्लाई, सोसाइटी का मेंटेनेंस, बिल्डर का रिकॉर्ड, कागजात, लोन, टैक्स और पजेशन की तारीख भी उतनी ही मायने रखती हैं। सबसे जरूरी सवाल यह है कि पांच या दस साल बाद भी यह घर आपके परिवार के काम आएगा या नहीं।
पुणे अब एक अकेला रिहायशी बाजार नहीं रहा। यह कई अलग-अलग इलाकों का जाल है, जो नौकरी, पढ़ाई, ट्रांसपोर्ट और शहर के फैलाव से जुड़े हैं। बाणेर में घर लेने वाले परिवार का फैसला वाघोली में लेने वाले से बहुत अलग होता है। हिंजवडी में काम करने वाले की जरूरतें खराडी में काम करने वाले से अलग हो सकती हैं। रिटायर्ड दंपति के लिए अस्पताल और पुराने मोहल्ले की सुविधाएं आईटी पार्क के पास रहने से ज्यादा जरूरी हो सकती हैं। इसलिए पुणे में कोई एक सबसे अच्छा इलाका नहीं है। सिर्फ वह लोकेशन, प्रोजेक्ट और बजट होता है जो किसी खास खरीदार पर फिट बैठे।
नाइट फ्रैंक के 2026 की पहली छमाही के आंकड़ों के मुताबिक पुणे में 24,890 घरों की बिक्री हुई, जो पिछले साल से 2 फीसदी ज्यादा है। बिल्डरों ने 31,116 नए घर लॉन्च किए, यानी 17 फीसदी की बढ़त। शहर में औसत दाम करीब 10,063 रुपये प्रति वर्ग फुट रहा, जो एक साल पहले से 5 फीसदी ऊपर है। मगर यह शहर का औसत है और हर इलाके में यही भाव या मांग नहीं होती। सलाह साफ है कि शहर मत खरीदिए, मोहल्ला, प्रोजेक्ट और खास घर खरीदिए, और तीनों की जांच अलग-अलग कीजिए।
शुरुआत खुद से कीजिए। घर किसलिए ले रहे हैं, खुद रहने के लिए, बच्चों के लिए, रिटायरमेंट के लिए या किराए की कमाई के लिए? दफ्तर कहां है? कितने साल रहना है? असली बजट क्या है? असली बजट वह नहीं जो बैंक लोन दे दे, बल्कि वह रकम है जिसकी किस्त आप पढ़ाई, बीमा, इमरजेंसी और बाकी खर्चों के साथ आराम से भर सकें। तीन ऐसी बातें लिख लीजिए जिन पर समझौता नहीं करना। सफर का टेस्ट सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे कीजिए, रविवार को 11:30 बजे नहीं, दोनों तरफ से और बारिश में भी।
विज्ञापन में छपी कीमत शायद ही कभी आखिरी खर्च होती है। उसमें फ्लोर राइज, पसंदीदा लोकेशन, पार्किंग, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, जहां लागू हो वहां जीएसटी, मेंटेनेंस और कॉर्पस, कानूनी खर्च, लोन का खर्च, इंटीरियर और शिफ्टिंग जुड़ते हैं। इसलिए प्रति वर्ग फुट रेट की जगह कुल खर्च की तुलना कीजिए। कार्पेट एरिया भी पूछिए, क्योंकि 1,500 वर्ग फुट बताए गए दो फ्लैट रहने में बहुत अलग निकल सकते हैं। स्टांप ड्यूटी आम तौर पर 6 से 7 फीसदी के बीच बताई जा रही है, लेकिन महाराष्ट्र के रजिस्ट्रेशन और स्टांप विभाग से उस प्रॉपर्टी का सही हिसाब लिए बिना बजट पक्का न करें।
मेट्रो और सड़क के वादों को हकीकत से अलग कीजिए। पुणे मेट्रो पीसीएमसी से स्वारगेट और वनाज से रामवाडी तक चल रही है, और आधिकारिक साइट के मुताबिक 29 स्टेशन चालू हैं और नेटवर्क करीब 33.1 किलोमीटर का है। पीएमआरडीए की लाइन 3 माण-हिंजवडी से शिवाजीनगर तक 23.203 किलोमीटर का एलिवेटेड रूट है, जिसमें 23 स्टेशन हैं। इनर रिंग रोड 83.12 किलोमीटर का प्रोजेक्ट है, जिसकी योजनाबद्ध चौड़ाई 65 मीटर है। मेट्रो आ रही है और मेट्रो चालू है, ये दो अलग बातें हैं। सवाल यह रखिए कि मेरा प्रोजेक्ट इस सुविधा से कितनी दूर है।
नए प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र रेरा सबसे पहला ठिकाना होना चाहिए। कानूनी प्रमोटर का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, फेज, पूरा होने की तारीख, एक्सटेंशन और शिकायतें देखिए। रेरा पारदर्शिता देता है, लेकिन क्वालिटी की गारंटी नहीं है। एग्रीमेंट फॉर सेल से पहले कुल रकम का 10 फीसदी से ज्यादा बयाना नहीं लिया जाना चाहिए। एग्रीमेंट पूरा पढ़िए, क्योंकि जबानी वादा करार नहीं होता। सेल्समैन कहे कि चिंता मत कीजिए तो पूछिए कि यह कहां लिखा है। बैंक से लोन मंजूर होना भी प्रॉपर्टी की जांच का सर्टिफिकेट नहीं है।
प्रोजेक्ट को कम से कम तीन बार देखिए, एक बार हफ्ते के दिन सुबह, एक बार शाम और एक बार वीकेंड पर, हो सके तो भारी बारिश में भी। रहने वालों से बात कीजिए और जल्दबाजी मत कीजिए। जब कोई फ्लैट पसंद आए तो 48 घंटे लीजिए, कागज देखिए, रेरा जांचिए, कुल खर्च जोड़िए, वकील और बैंक से बात कीजिए और फिर फैसला कीजिए। घर जूते की जोड़ी नहीं है, यह लंबे समय की आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।
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