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आयुष कोमकर हत्या केस: लक्ष्मी आंदेकर को हाईकोर्ट से जमानत, रोक की मांग खारिज

जुर्म PT24 टीम

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के आंदेकर गैंग से जुड़े मामले में लक्ष्मी उदयकांत आंदेकर को जमानत दी। कोर्ट ने चार हफ्ते की रोक की मांग भी खारिज कर दी।

पुणे, 6 नवंबर 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे की पार्षद और एनसीपी नेता लक्ष्मी उदयकांत आंदेकर को जमानत दे दी है। मामला आंदेकर गैंग से जुड़ा है और सितंबर 2025 में हुई 18 साल के आयुष कोमकर की हत्या से ताल्लुक रखता है। इस केस में लक्ष्मी आंदेकर पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगा था और वे हिरासत में थीं। आंदेकर परिवार के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।

जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई और उसके बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत पर छोड़ने का हुक्म दिया। लक्ष्मी आंदेकर की तरफ से एडवोकेट विपुल दुशिंग कोर्ट में खड़े हुए। उनका कहना था कि इस जुर्म में लक्ष्मी की भूमिका साफ तौर पर साबित ही नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत सामने नहीं है जो इस मामले में उनकी सीधी भूमिका दिखाए। हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की ये दलीलें सुनीं और जमानत मंजूर कर ली।

आदेश के फौरन बाद स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिशिर हिरे ने कोर्ट से कहा कि जमानत के आदेश पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दी जाए, ताकि सरकारी पक्ष इसे ऊपर चुनौती दे सके। कोर्ट ने यह मांग नहीं मानी और अपना आदेश जस का तस रखा। यह रिहाई कोर्ट की तय की हुई शर्तों के साथ मिली है।

लक्ष्मी आंदेकर अजित पवार की अगुवाई वाले एनसीपी गुट से जुड़ी हैं। बाहर आने के लिए वे कई बार अदालतों में गईं। उनकी अर्जियों पर पुणे सेशंस कोर्ट में भी सुनवाई हुई और हाईकोर्ट में भी, और अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश से उन्हें राहत मिली है। यह केस इसलिए भी चर्चा में रहा कि उन्होंने जेल में रहते हुए ही पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का चुनाव लड़ा और जीत भी गईं। मगर जीत से उनकी हिरासत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हाईकोर्ट का जमानत आदेश आने तक वे हिरासत में ही रहीं।

अब उस वारदात की बात, जिसकी वजह से यह केस बना। सितंबर 2025 में पुणे की एक पार्किंग में आयुष कोमकर पर हमला हुआ। केस की जानकारी के मुताबिक हमलावर उसके आने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने पहले गोली चलाई, फिर धारदार हथियारों से वार किए। आयुष की मौके पर ही जान चली गई।

जांच करने वालों ने इस हत्या को एनसीपी के पार्षद वनराज आंदेकर की पुरानी हत्या से जोड़ा। वनराज को 1 सितंबर 2024 को नाना पेठ में गोली मारकर मार दिया गया था। आयुष उन्हीं वनराज का भतीजा था। पुलिस जांच में सामने आया कि सितंबर 2025 का हमला कथित तौर पर वनराज की हत्या का बदला लेने की साजिश का हिस्सा था। पुलिस के मुताबिक आयुष के पिता पर शक था कि पहली हत्या में उनका हाथ रहा है। वहीं आयुष के दादा बंडू आंदेकर, जिन्हें आंदेकर गैंग का सरगना बताया गया है, पर आरोप है कि दूसरे हमले की साजिश उन्होंने रची।

आयुष कोमकर हत्या मामले में लक्ष्मी आंदेकर को गिरफ्तार किया गया था और उन पर MCOCA के तहत कार्रवाई चली थी। अब हाईकोर्ट के फैसले से उन्हें हिरासत से छुटकारा मिल गया है।

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