पुणे में दिवाली पर पटाखों से आंखों और पालतू-आवारा जानवरों को खतरा, डॉक्टरों और पशु प्रेमियों की अपील
पुणे के नेत्र रोग और पशु चिकित्सकों ने पटाखों से आंखों की चोट और जानवरों की घबराहट पर आगाह किया है। मनपा के पशु चिकित्सा विभाग ने भी जानवरों को सताने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पुणे में दिवाली के मौके पर डॉक्टर और पशु कल्याण से जुड़े लोग शहरवासियों से जिम्मेदारी से त्योहार मनाने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ घंटों की आतिशबाजी पर्यावरण के साथ-साथ इंसानों और जानवरों को भी लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है। चिंगारी और धुएं से आंखों को चोट लग सकती है, कई बार हमेशा के लिए। शोर से पालतू जानवर कांपने लगते हैं और आवारा जानवर भागकर सड़कों पर आ जाते हैं।
सासून जनरल अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश शितोले ने बताया कि इस मौसम में आंखों की तकलीफ तीन वजहों से बढ़ रही है। उनके मुताबिक निर्माण कामों और यातायात की वजह से पुणे में पहले से धूल का प्रदूषण है, जिससे आंखों में जलन और सूखापन हो रहा है। दूसरे, खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले लोग ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहते हैं, जिससे आंखें और सूखती हैं। तीसरे, सर्दियों में आंखों की एलर्जी बढ़ती है और पटाखों का धुआं इस परेशानी को और बढ़ा देता है।
पुणे के एक अस्पताल में नेत्र रोग विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रितेश काकरानिया ने कहा कि चोट मामूली बेचैनी से लेकर गंभीर नुकसान तक हो सकती है। उनके अनुसार पटाखों से निकली चिंगारी, गर्म मलबा और बारीक कण आंखों में जलन, लालिमा और पानी की वजह बन सकते हैं। गंभीर मामलों में कॉर्निया पर खरोंच, रासायनिक जलन, चोट से होने वाला मोतियाबिंद और रेटिना को नुकसान तक हो सकता है।
डॉ. काकरानिया के मुताबिक खतरा सिर्फ पटाखे चलाने वालों तक सीमित नहीं है। पास खड़े होकर आतिशबाजी देखने वाले भी अचानक धमाके या उड़ते मलबे से घायल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार माता-पिता यह पक्का करें कि बच्चे किसी बड़े की मौजूदगी के बिना पटाखे न छुएं, और जिन बुजुर्गों को पहले से आंखों की तकलीफ है वे ज्यादा धुएं वाली जगहों से दूर रहें। उन्होंने आतिशबाजी से सुरक्षित दूरी रखने और जहां मुमकिन हो पेशेवर तरीके से आयोजित प्रदर्शन देखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि आम चश्मे और धूप के चश्मे सुरक्षा वाले चश्मे की जगह नहीं ले सकते।
आंख में चोट लगने पर डॉ. काकरानिया ने कहा कि आंख को मलना या दबाना नहीं चाहिए और उसमें फंसा कण निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना घरेलू नुस्खे या आई ड्रॉप न डालें। उनके मुताबिक मामूली दिखने वाली चोट भी तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखानी चाहिए, क्योंकि देर होने से नजर पर असर पड़ सकता है।
जानवरों के लिए दिवाली खुशी का त्योहार नहीं रहती। कुत्तों की सुनने की क्षमता बहुत तेज होती है और अचानक तेज धमाकों से वे डर जाते हैं। पालतू जानवर अक्सर कांपते हैं, हांफते हैं, फर्नीचर के नीचे छिप जाते हैं, रोते हैं और खाना छोड़ देते हैं। पुणे के पशु चिकित्सक डॉ. मिलिंद हातेकर ने कहा कि पालतू जानवरों को सामान्य दिनचर्या में लौटने में कई दिन लग सकते हैं। उनके मुताबिक मालिकों को दिवाली से करीब एक महीने पहले शांत करने वाले उपाय शुरू कर देने चाहिए, जिनमें उपयुक्त होम्योपैथिक विकल्प भी हैं। उन्होंने बताया कि कई दवाइयां भी उपलब्ध हैं। बाहर के लगातार शोर से खाने का समय भी बिगड़ता है और कई जानवर रात को माहौल शांत होने पर देर से खाते हैं। डॉ. हातेकर ने मालिकों को सलाह दी कि पालतू जानवर को छिपने के लिए जानी-पहचानी सुरक्षित जगह दें और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की देखरेख में व्यवहार संबंधी मदद और दवा पर विचार करें।
पिंपले निलख में पेट क्लिनिक चलाने वाले डॉ. प्रितेश विधाते ने कहा कि ज्यादा घबराहट वाले पालतू जानवरों के लिए दिवाली खास तौर पर मुश्किल होती है। उनके अनुसार हर्बल दवाइयों के विकल्प मौजूद हैं और गंभीर घबराहट में एलोपैथिक दवाइयों पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ दवाइयों से नींद आ सकती है, लेकिन वे जानवर की तकलीफ घटाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने जहां ठीक हो वहां कान में डालने वाले प्लग, खिलौने और गतिविधियों का सुझाव दिया, साथ ही पटाखों के चरम समय में जानी-पहचानी, आरामदायक जगह रखने को कहा।
आवारा जानवरों के पास घर के अंदर छिपने की कोई सुरक्षित जगह नहीं होती। कई कुत्ते भागकर सड़क पर आ जाते हैं या खड़ी गाड़ियों के नीचे छिप जाते हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ता है। पुणे के साहस एनिमल शेल्टर की संस्थापक और अध्यक्ष गीतांजलि ताऊर पांच साल से पशु कल्याण में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस असर पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। उनके मुताबिक कुत्तों की सुनने की क्षमता तेज होती है, पटाखों की आवाज का उन पर काफी असर पड़ता है और उनके कान भी खराब हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही कुंजी है: इको-फ्रेंडली पटाखे इस्तेमाल करें, जागरूकता फैलाएं और पटाखे फोड़ने से पहले आसपास आवारा जानवरों को देख लें, तो असर कम किया जा सकता है।
पालतू जानवरों के मालिकों का कहना है कि देर रात तक पटाखे चलते रहें तो जानवरों को शांत रखना मुश्किल होता है। पुणे की ज्योति उप्पल ने बताया कि उनके पालतू जानवर घबरा जाते हैं, रोते हैं और सोफे के नीचे छिप जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे कंबल और खिलौनों से सुरक्षित जगह बनाती हैं, सारे दरवाजे-खिड़कियां बंद कर देती हैं और ध्यान बंटाने के लिए हल्का संगीत चलाती हैं, जिससे जानवर कुछ शांत लगते हैं। उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसायटी में यह मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनके मुताबिक किसी ने ध्यान नहीं दिया और लोग बस यही कहते रहे कि पालतू जानवरों को घर के अंदर रखिए।
दिशा गोस्वामी ने बताया कि उनका कुत्ता दिवाली से एक हफ्ता पहले ही डरने लगता है। वह बेचैन हो जाता है और ठीक से खाना बंद कर देता है। वे उसे जल्दी खिलाने की कोशिश करती हैं और सोते समय उसे गोद में थामे रखती हैं। उन्होंने कहा कि वैसे वह खुश और चुस्त रहता है, पर दिवाली के दौरान उदास हो जाता है। उनके शब्दों में, पालतू जानवरों के मालिक अपने और आसपास के जानवरों के लिए चीजें आसान बनाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन पटाखे फोड़ने वाले परवाह करने वालों से कहीं ज्यादा हैं, और यही सबसे दुखद बात है।
पुणे महानगरपालिका के पशु चिकित्सा विभाग ने भी त्योहार के बीच नागरिकों से जानवरों की हिफाजत की अपील की है। मनपा ने चेताया कि तेज शोर से कुत्ते, बिल्लियां और दूसरे जानवर घबराकर भाग सकते हैं, घायल हो सकते हैं और भारी तनाव झेल सकते हैं। विभाग की मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सारिका भोसले-फुंडे ने कहा कि अचानक तेज आवाज से जानवरों के सोने-खाने का तरीका और उनका स्वाभाविक व्यवहार बिगड़ सकता है, और बुजुर्ग, बीमार और छोटे जानवर ऐसी गड़बड़ी के प्रति खास तौर पर नाजुक होते हैं।
मनपा ने जानवरों को पीटने या उनकी पूंछ से पटाखे बांधने जैसी क्रूरता के खिलाफ भी आगाह किया। ऐसे काम पशु संरक्षण कानूनों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के संबंधित प्रावधानों के तहत दंडनीय हैं। मनपा ने लोगों से कहा कि जानवरों के पास पटाखे न फोड़ें, पालतू और आवारा जानवरों को शोर वाली जगहों से दूर रखें और त्योहार के दौरान करुणा दिखाएं।
लोगों के लिए सुझावों में बताया गया है कि छोटे बच्चों को आतिशबाजी न छूने दें, उससे सुरक्षित दूरी रखें और आंखों की हिफाजत के लिए सुरक्षा चश्मा पहनें। जो पटाखा जला नहीं या आधा जला हो, उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें। झुककर पटाखे को देखने या उसे हाथ में पकड़कर जलाने से बचें, भीड़ वाली जगह में या दूसरे लोगों की ओर पटाखे न चलाएं, और डॉक्टर से पूछे बिना आंखों में ड्रॉप या मरहम न डालें।
पालतू और आवारा जानवरों के लिए कहा गया है कि पालतू जानवरों को घर के अंदर रखें और उनके लिए शांत, आरामदायक जगह बनाएं। शोर और धुआं घटाने के लिए दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें, हल्का संगीत चलाएं और पसंदीदा खिलौनों में उन्हें व्यस्त रखें। पटाखों के चरम समय से पहले उन्हें खिला दें, क्योंकि शोर से खाने की आदत बिगड़ सकती है। ज्यादा परेशानी दिखे तो घबराहट घटाने या शांत करने वाली दवा के बारे में पशु चिकित्सक से पूछें। पटाखे फोड़ने से पहले आसपास आवारा जानवरों को देख लें और उनके पास पटाखे न चलाएं।


कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।