पुणे चिड़ियाघर के कर्मचारी पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों की निगरानी में आगे
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राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन की नई निगरानी परियोजना में पुणे के राजीव गांधी प्राणि उद्यान के कर्मचारियों और पशु चिकित्सा स्टाफ को ज़ूनोटिक संक्रमण जल्दी पकड़ने की जिम्मेदारी मिली है।
पुणे, 7 नवंबर 2026: पुणे के राजीव गांधी प्राणि उद्यान में जानवरों को संभालने, उनके बाड़े साफ करने और क्लिनिकल सैंपल इकट्ठा करने वाले कर्मचारी अब बीमारियों को जानवरों से इंसानों तक पहुंचने से पहले पकड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत शुरू हुई एक नई निगरानी पहल में चिड़ियाघर के कर्मचारियों, जानवरों की देखभाल करने वालों और पशु चिकित्सा स्टाफ को केंद्र में रखा गया है। मकसद ज़ूनोटिक संक्रमणों, यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों, को शुरुआती दौर में पहचानना है।
परियोजना का नाम है 'Establishing a One Health Sentinel Surveillance System in High Human-Animal-Interaction Settings among Selected Zoos in India'। इसका लक्ष्य चिड़ियाघर के जानवरों में संक्रमण का व्यवस्थित तरीके से हिसाब रखना, कर्मचारियों पर काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों का आकलन करना और रोगाणुओं के एक प्रजाति से दूसरी में पहुंचने के शुरुआती संकेत पकड़ना है।
यह पहल चार पक्षों के सहयोग से चल रही है: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), पुणे; नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर वन हेल्थ, नागपुर; भारती विद्यापीठ; और पुणे का चिड़ियाघर।
चिड़ियाघर के कर्मचारियों को खास तौर पर जोखिम वाला माना गया है, क्योंकि वे अक्सर जंगली जानवरों, उनके मल-मूत्र और क्लिनिकल सैंपलों के संपर्क में आते हैं। निगरानी व्यवस्था से जानवरों में संक्रमण का डेटा तैयार होगा, साथ ही जानवरों के करीब काम करने वाले लोगों को होने वाले संभावित खतरों पर भी नज़र रखी जाएगी।
केंद्र ने एंथ्रेक्स, रेबीज़, निपाह, लेप्टोस्पायरोसिस, एमपॉक्स और ज़ीका समेत कई ज़ूनोटिक बीमारियों को ऐसे प्राथमिक खतरों में गिना है, जिनकी निगरानी ज़रूरी है।
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