पुणे में सिंहगढ़ संस्था के 10 स्कूलों की मान्यता रद्द, 18 महीने से नहीं मिला शिक्षकों को वेतन
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शिक्षा विभाग ने सिंहगढ़ टेक्निकल एजुकेशन सोसायटी के छह माध्यमिक और चार प्राथमिक स्कूलों की मान्यता रद्द करने का आदेश दिया है। आदेश 1 मई 2027 से लागू होगा।
पुणे में शिक्षा विभाग ने सिंहगढ़ टेक्निकल एजुकेशन सोसायटी के चलाए 10 स्कूलों की मान्यता रद्द करने का आदेश दिया है। वजह यह है कि इन स्कूलों के शिक्षकों को पिछले 18 महीने से वेतन नहीं मिला। वेतन न मिलने पर शिक्षकों ने पढ़ाना बंद कर दिया था, जिससे पढ़ाई ठप हो गई और बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ा।
यह आदेश शिक्षा के उप निदेशक मच्छिंद्रनाथ कदम ने जारी किया है। इसमें छह माध्यमिक और चार प्राथमिक स्कूल शामिल हैं। विभाग का कहना है कि बार-बार निर्देश और चेतावनी देने के बावजूद प्रबंधन ने वेतन का बकाया नहीं चुकाया, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
आदेश के मुताबिक इन स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों, दोनों का वेतन 18 महीने से बाकी है। देरी से परेशान शिक्षकों ने बकाया मिलने तक पढ़ाना बंद कर दिया था। सुनवाई के दौरान विभाग ने बच्चों पर पड़ रहे बुरे असर को भी ध्यान में लिया।
प्रबंधन को 29 जून 2026 तक सारा बकाया और नियमित वेतन चुकाने का निर्देश दिया गया था। वह ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद विभाग ने माध्यमिक स्कूल संहिता के नियम 7.1, 7.2 और 7.3 के तहत मान्यता रद्द कर दी।
जिन छह माध्यमिक स्कूलों की मान्यता गई है, वे हैं: नरहे, आंबेगांव और कोंढवा में सिंहगढ़ कॉलेज ऑफ आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस, खुसगांव में सिंहगढ़ पब्लिक स्कूल, और वारजे तथा कर्वेनगर-एरंडवणे में आरएमडी स्प्रिंगडेल सेकेंडरी स्कूल।
चार प्राथमिक स्कूल ये हैं: आंबेगांव का सिंहगढ़ स्प्रिंगडेल स्कूल, वडगांव का सिंहगढ़ स्प्रिंगडेल पब्लिक स्कूल, कोंढवा का सिंहगढ़ सिटी स्कूल और वारजे का आरएमडी सिंहगढ़ स्प्रिंगडेल स्कूल।
सुनवाई में सोसायटी ने पैसों की तंगी की बात कही। उसका दावा था कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत सरकार ने प्रतिपूर्ति की बड़ी रकम जारी नहीं की है। उसने यह भी कहा कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने से वेतन का खर्च काफी बढ़ गया, जबकि अभिभावक पूरी फीस समय पर नहीं भर रहे। प्रबंधन का कहना था कि आरटीई की बकाया प्रतिपूर्ति मिलते ही वह शिक्षकों का बकाया चुका देगा।
शिक्षा विभाग ने यह सफाई नहीं मानी। उसने कहा कि वेतन लंबे समय से रुका है और बार-बार नोटिस मिलने पर भी सुधार के कदम नहीं उठाए गए।
बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसके लिए शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन्हें धीरे-धीरे पास के मान्यता प्राप्त स्कूलों में भेजने की व्यवस्था करें। मान्यता रद्द करने के आदेश 1 मई 2027 से, यानी शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से लागू होंगे, ताकि बच्चे चालू शैक्षणिक वर्ष पूरा कर सकें।
सोसायटी को आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर शिक्षा निदेशक के सामने इस फैसले को चुनौती देने का मौका दिया गया है।
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