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नौ साल बाद भी उंड्री में टैंकर के भरोसे लोग, पानी, सड़क और पुलिस पर कार्रवाई की मांग

पुणे महानगरपालिका में शामिल होने के नौ साल बाद भी उंड्री और मोहम्मदवाड़ी के लोग निजी पानी टैंकरों पर निर्भर हैं और अपनी मांगें रख रहे हैं।

नौ साल बाद भी उंड्री में टैंकर के भरोसे लोग, पानी, सड़क और पुलिस पर कार्रवाई की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

उंड्री, 24 अक्टूबर 2026: उंड्री को पुणे महानगरपालिका (PMC) में शामिल हुए नौ साल हो गए, लेकिन तेजी से बढ़ते इस इलाके के लोग आज भी निजी पानी टैंकरों के भरोसे हैं। सड़कें अधूरी हैं और इलाके की आगे की सुविधाएं तय करने वाला डेवलपमेंट प्लान अब तक मंजूर नहीं हुआ है।

उंड्री, मोहम्मदवाड़ी और आसपास के लोगों का कहना है कि वे महानगरपालिका को प्रॉपर्टी टैक्स देते हैं, फिर भी पीने के पानी और सीवेज के इंतजाम पर उन्हें अलग से पैसा खर्च करना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो कड नगर और उंड्री चौक पर रास्ता रोको आंदोलन हो सकता है।

लोगों की मांग है कि पाइप से पानी देने की समय-सीमा वाली योजना बने, ऊंची पानी की टंकी बने, सड़कें चौड़ी हों, पुलिसिंग बेहतर हो और निजी टैंकरों पर नियम लागू हों।

निवासियों के मुताबिक असली अड़चन डेवलपमेंट प्लान की मंजूरी में देरी है। यह प्लान सड़क, पानी और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं का ढांचा तय करेगा। नौ शामिल गांवों का ड्राफ्ट प्लान 17 अक्टूबर 2025 को छपा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने उसे अब तक मंजूर नहीं किया।

उंड्री को PMC में 4 अक्टूबर 2017 को दूसरे कई बाहरी इलाकों के साथ शामिल किया गया था। मगर उंड्री हिलटॉप और कई हाउसिंग सोसाइटियों के लोग कहते हैं कि उन्हें अब तक न पाइप लाइन का नेटवर्क मिला है, न ऊंची पानी की टंकी। इसलिए सोसाइटियां रोज की जरूरत के लिए निजी टैंकर वालों से पानी खरीदती हैं। लोगों का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स और पानी से जुड़े शुल्क देने वाले परिवारों पर यह बड़ा आर्थिक बोझ है।

मोहम्मदवाड़ी-उंड्री रेसिडेंट्स वेलफेयर डेवलपमेंट फाउंडेशन (MURWDF) के सदस्य सुनील अय्यर ने कहा, "उंड्री में PMC एक काम में बहुत कुशल रही है: पैसा वसूलना। पानी, सीवेज, सड़क, पुलिसिंग और भविष्य की योजना, हर बात पर हमें इंतजार करने को कहा गया। नौ साल अब देरी नहीं रही। यह हमें नजरअंदाज करने का फैसला है।" अय्यर वार्ड 41 में उंड्री हिलटॉप और सड़क पार की सोसाइटियों के निवासियों की ओर से बोल रहे थे।

लोगों का दावा है कि विलय के बाद प्रॉपर्टी टैक्स काफी बढ़ गया। कुछ का अंदाजा है कि ग्राम पंचायत के दौर के मुकाबले बिल करीब तीन गुना हो गया। वे पूछते हैं कि जब कई जरूरी सेवाएं मिल ही नहीं रहीं, तो शुल्क क्यों वसूला जा रहा है। निवासियों के हवाले से 2025 में मिले RTI जवाब के आंकड़ों के मुताबिक, चार साल से ज्यादा की अवधि में उंड्री और मोहम्मदवाड़ी से करीब 287.73 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स वसूला गया।

इलाके का प्रशासनिक इतिहास 1997 तक जाता है, जब 23 गांवों के विलय में उंड्री के सर्वे नंबर 8 से 11 PMC सीमा में आए। फिर 17 नवंबर 2001 की महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना से गांव की आबादी समेत उंड्री का ज्यादातर हिस्सा सीमा से बाहर कर दिया गया। अक्टूबर 2017 में राज्य सरकार ने यह फैसला पलटा और बाकी उंड्री को PMC में मिला दिया। महानगरपालिका ने 28 जून 2018 को डेवलपमेंट प्लान बनाने का इरादा औपचारिक रूप से घोषित किया।

लेकिन तय अवधि में प्लान नहीं छपा। कोविड-19 महामारी, प्रशासनिक बदलाव और चूकी हुई समय-सीमाओं के कारण हुई देरी के बाद ड्राफ्ट बनाने का जिम्मा राज्य के नगर रचना विभाग को सौंपा गया। नौ गांवों का ड्राफ्ट आखिरकार 17 अक्टूबर 2025 को MRTP एक्ट 1966 की धारा 26(1) के तहत छपा। उंड्री योजना क्षेत्र 4 में आती है, जो प्लान की शीट 13 और 14 में है। आपत्तियां और सुझाव देने की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हुई, पर निवासियों के ज्ञापन के मुताबिक एक साल बाद भी प्लान ड्राफ्ट ही है।

लोगों का कहना है कि मंजूर प्लान न होने से सड़क चौड़ी करने, पानी की टंकियों और सार्वजनिक सुविधाओं के आरक्षण के फैसले अटके हैं। वे चाहते हैं कि राज्य सरकार बताए कि आपत्तियों का क्या हुआ, मंजूरी के अगले कदम क्या हैं और प्लान कब तक मंजूर होगा।

पानी की किल्लत का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट भी पहुंचा। 2022 में उंड्री, पिसोली, बाणेर, बालेवाड़ी, वाघोली, फुरसुंगी और दूसरे इलाकों के निवासी और नागरिक समूह जनहित याचिका क्रमांक 126/2022 के जरिए कोर्ट गए। पैरवी वकील सत्य मुले ने की। निवासियों के बताए मुताबिक कोर्ट ने PMC, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका और पुणे जिला परिषद को 13 दिसंबर 2022 तक पानी पर हलफनामा देने को कहा। 15 दिसंबर 2022 की सुनवाई में PMC हाजिर नहीं हुई, तो कोर्ट ने जुर्माने की चेतावनी देकर नई मोहलत दी।

10 अप्रैल 2023 को कोर्ट ने संभागीय आयुक्त की अगुवाई में एक समिति बनाने को कहा, जो पानी की शिकायतों की समीक्षा करे। इसमें महानगरपालिका आयुक्त, जलापूर्ति अधिकारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव थे। हर दो महीने में बैठक होनी थी और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट को देनी थी। निवासियों का कहना है कि इन बैठकों से उंड्री हिलटॉप को पाइप नेटवर्क नहीं मिला।

MURWDF के सदस्य सुनील कोलोटी ने कहा, "महीने की बैठक पूरी तरह दिखावा है। अधिकारी आते हैं, शिकायतें लिखते हैं, टैंकर का वादा करते हैं और चले जाते हैं। कोर्ट ने समीक्षा की व्यवस्था मांगी थी और हमें ठीक वही मिली: समीक्षाएं। चार साल में उस याचिका से उंड्री हिलटॉप पर एक मीटर पाइपलाइन भी नहीं आई।" अब निवासी बॉम्बे हाई कोर्ट से पानी का नेटवर्क और ऊंची टंकी बनाने के लिए समय-सीमा वाला निर्देश चाहते हैं, साथ ही समय पर काम न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी।

कहा जाता है कि 23 अप्रैल 2026 को PMC के अतिरिक्त आयुक्त ने उंड्री, मोहम्मदवाड़ी और NIBM एनेक्स में 15 मई तक पाइप से पानी देने का वादा किया था। 17 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने PMC की 24x7 जलापूर्ति योजना के तहत मोहम्मदवाड़ी में डोराबजी मॉल के पास पानी की टंकियों का उद्घाटन किया। इसे मोहम्मदवाड़ी, NIBM और उंड्री के करीब तीन लाख लोगों को फायदा देने वाली परियोजना बताया गया। मुख्यमंत्री ने बाकी पाइपलाइन और वितरण का काम दो महीने में पूरा करने को भी कहा।

फिर भी उंड्री हिलटॉप के लोग कहते हैं कि उनकी सोसाइटियां मौजूदा नेटवर्क में नहीं आईं और वे टैंकरों पर ही निर्भर हैं। पानी की गुणवत्ता पर भी चिंता है। जुलाई में मोहम्मदवाड़ी की एक सोसाइटी ने कथित तौर पर नेटवर्क से आया गंदा पानी अपनी टंकियों में लेने से मना कर दिया था। जून 2026 में PMC ने उंड्री में टैंकर भरने का नया केंद्र शुरू किया, लेकिन लोगों का कहना है कि इससे स्थायी वितरण नेटवर्क न होने की असली समस्या नहीं सुलझती।

कोलोटी ने कहा, "हम कोई एहसान नहीं मांग रहे। हम PMC से वही पानी मांग रहे हैं जिसका बिल हमें पहले से भेजा जाता है। टैंकर भरने का केंद्र जलापूर्ति नहीं है। यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि जलापूर्ति है ही नहीं।"

निवासियों के ज्ञापन के आंकड़ों के मुताबिक करीब 200 फ्लैट वाली एक आम सोसाइटी टैंकर के पानी पर सालाना लगभग 60 लाख रुपये खर्च कर सकती है। यह प्रति फ्लैट सालाना करीब 30,000 रुपये, यानी महीने के 2,500 रुपये बैठता है, जो प्रॉपर्टी टैक्स और रखरखाव के अलावा है। ज्ञापन का अनुमान है कि 14 साल इसी खर्च पर चलने वाली सोसाइटी ने टैंकर के पानी पर करीब 8.4 करोड़ रुपये खर्च किए होंगे, जिसमें 2017 के विलय के बाद के करीब 5.4 करोड़ रुपये हैं। लोगों का कहना है कि यही पैसा स्थायी पानी के ढांचे, यानी भंडारण और वितरण नेटवर्क में लग सकता था। वे चाहते हैं कि PMC उंड्री हिलटॉप को पानी देने का बजट सहित कार्यक्रम छापे और नियमित सप्लाई शुरू होने तक प्रॉपर्टी टैक्स का पानी वाला हिस्सा माफ या वापस करने पर विचार करे।

सीवेज का भी यही हाल है। निवासियों के मुताबिक कई सोसाइटियां अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलाती हैं और निजी ऑपरेटरों से गंदगी उठवाती हैं। कुछ सोसाइटियां हर चक्कर के 10,000 से 12,000 रुपये देती हैं और करीब हर पखवाड़े गंदगी उठाई जाती है। इन आंकड़ों से एक सोसाइटी का सालाना खर्च करीब 2.6 लाख से 3.1 लाख रुपये बैठता है। लोग चाहते हैं कि PMC मौजूदा ड्रेनेज लाइनों को चालू मुख्य नेटवर्क से जोड़े, काम पूरा होने की समय-सीमा बताए और अलग से खर्च उठा रही सोसाइटियों को राहत दे।

सड़कों पर भी शिकायतें हैं। संकरी सड़कें, गलत पार्किंग, अतिक्रमण और ट्रैफिक का खराब इंतजाम निवासियों की चिंता है। 9 अक्टूबर को पुणे ट्रैफिक पुलिस ने सड़क की कम चौड़ाई, गलत पार्किंग और आमने-सामने के ट्रैफिक का हवाला देकर होलेवस्ती और आर्यन वर्ल्ड स्कूल के बीच 350 मीटर का हिस्सा वन-वे कर दिया। लोगों का कहना है कि इससे कड नगर पर दबाव बढ़ा है, जहां पीक आवर में पहले से जाम रहता है। वे कड नगर, उंड्री चौक और होलेवस्ती लिंक रोड के आसपास सड़क चौड़ी करने की मांग करते हैं।

29 सितंबर को उंड्री, पिसोली, मोहम्मदवाड़ी, येवलेवाड़ी और कोंढवा के निवासियों ने पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार को ज्ञापन दिया। उसमें हादसों, तेज रफ्तार, गायब सिग्नलों, कम गश्त और खोदकर छोड़ी गई सड़कों का जिक्र था। उन्होंने लाइसेंस और कार्रवाई की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ दुकानें सड़क पर कब्जा करती हैं और दुकानों के बाहर की पार्किंग से जाम बढ़ता है। मांगें हैं: रहेजा सर्कल के पास पुलिस चौकी, अलग ट्रैफिक पोस्ट, रिहायशी इलाकों और हादसे वाली जगहों पर CCTV कैमरे और नियमित रात की गश्त। साथ ही होटलों और रेस्तरां पर लाइसेंस की शर्तें और बंद होने का समय लागू हो, क्योंकि देर रात की हलचल, शोर और रिहायशी सड़कों पर पार्किंग की शिकायतें हैं।

निवासी टैंकरों पर निर्भरता को सड़क सुरक्षा से भी जोड़ते हैं। 5 अप्रैल 2026 को NIBM एनेक्स-मोहम्मदवाड़ी रोड पर क्लाउड नाइन के पास तेज रफ्तार पानी टैंकर ने 19 साल के राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर आरिज शेख की दोपहिया को टक्कर मारी और उनकी मौत हो गई। निवासियों के मुताबिक दो दिन बाद वानवडी में टैंकर से जुड़े एक अलग हादसे में 22 साल के इंजीनियर की जान गई। इसके बाद पुणे पुलिस ने टैंकरों के लिए 360 डिग्री कैमरे या सहायक रखने जैसी सुरक्षा शर्तें घोषित कीं।

15 अप्रैल को उंड्री, मोहम्मदवाड़ी और NIBM में टैंकर वालों ने हड़ताल कर दी, जिससे सोसाइटियों की पानी सप्लाई ठप हुई। महापौर मंजूषा नागपुरे के दखल से मामला सुलझा, और काम फिर शुरू करने की शर्तों में कैमरे और सहायक पर बात हुई। लोगों का कहना है कि इसके बाद टैंकर का रेट करीब 600 से बढ़कर 800 रुपये प्रति चक्कर हो गया, और ऑपरेटर कैमरे व स्टाफ का खर्च बताते हैं। उनका आरोप है कि बढ़े रेट के बावजूद कई टैंकर जरूरी सुरक्षा इंतजाम के बिना चल रहे हैं। रोज 20 टैंकर खरीदने वाली सोसाइटी के लिए अतिरिक्त 200 रुपये प्रति टैंकर का मतलब रोज 4,000 रुपये, यानी सालाना करीब 14.6 लाख रुपये है।

निवासियों ने 19 अप्रैल को कड नगर चौक के पास टैंकर से जुड़ी एक घटना और 5 अक्टूबर की एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें कड नगर में बिशप्स स्कूल के पास एक टैंकर ने 27 साल के युवक का पैर कुचल दिया।

रिटायर्ड आर्मी कर्नल प्रदीप मासंद ने कहा, "यह पुणे ट्रैफिक पुलिस की कानून और प्रशासन की पूरी नाकामी है। एक लड़के की जान गई, नियम घोषित हुए, टैंकर लॉबी ने शहर को बंधक बना लिया और समझौता हुआ दाम बढ़ाकर। सोसाइटियां सरचार्ज भरती हैं, टैंकर सुरक्षा छोड़ देते हैं और पुलिस जांच नहीं करती।" निवासी चाहते हैं कि सोसाइटियों में आने वाले टैंकरों की नियमित जांच हो, कैमरे और सहायक की शर्त सख्ती से लागू हो, नियम न मानने वालों पर कार्रवाई हो और जहां वादा किया गया इंतजाम नहीं है वहां सुरक्षा सरचार्ज लौटाया जाए।

राजनीतिक जवाबदेही पर भी सवाल है। ज्ञापन के मुताबिक नगर प्रशासन के लिए यह इलाका PMC के वार्ड 41 में आता है, जबकि लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में इलाके के अलग-अलग हिस्से पुणे, बारामती और पुरंदर से जुड़े क्षेत्रों में पड़ते हैं। उनका कहना है कि इस उलझन से जवाबदेही साफ नहीं रहती और लोग समझ नहीं पाते कि स्थानीय ढांचे की जिम्मेदारी किस चुने हुए प्रतिनिधि की है। वे पानी, ड्रेनेज और सड़क की क्षमता कम होने के बावजूद नए निर्माण की मंजूरी जारी रहने की भी आलोचना करते हैं और जरूरी ढांचा बनने तक नई मंजूरियों पर अस्थायी रोक चाहते हैं।

निवासियों ने चाकण के औद्योगिक इलाके का उदाहरण दिया है। अगस्त 2026 में वहां की इकाइयों ने गड्ढों और जाम की शिकायत की और कथित तौर पर कारोबार हटाने की चेतावनी दी। इसके बाद राज्य के वरिष्ठ नेता इलाके में पहुंचे और अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच ढांचे के काम का तालमेल बनाने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनी। उंड्री के लोग कहते हैं कि पानी, सड़क, ड्रेनेज, पुलिसिंग और लाइसेंस के मुद्दों पर यही तालमेल यहां भी हो सकता है।

कोलोटी ने कहा, "चाकण के उद्योगों ने जाने की धमकी दी और राज्य एक हफ्ते में आ गया। हम अपने घर उठाकर दूसरे राज्य नहीं जा सकते। इसलिए हमारा सवाल है: क्या मंत्रालय को उंड्री की अनदेखी बंद करने के लिए हमें ट्रैफिक रोकना पड़ेगा?" निवासियों ने कहा कि अगर प्रशासन ने ठोस जवाब नहीं दिया तो वे किसी कामकाजी दिन कड नगर और उंड्री चौक पर रास्ता रोको कर सकते हैं।

निवासियों ने आठ मांगों का चार्टर रखा है। पहली, डेवलपमेंट प्लान मंजूर हो: महाराष्ट्र सरकार का नगर विकास विभाग अक्टूबर 2025 के ड्राफ्ट की स्थिति बताए, आपत्तियों की सुनवाई की प्रगति सामने रखे और MRTP एक्ट के तहत मंजूरी की समय-सीमा तय करे। दूसरी, पानी, सड़क, ड्रेनेज, पुलिसिंग और लाइसेंस के तालमेल के लिए नोडल अधिकारी वाली टास्क फोर्स बने, जिसकी हर महीने सार्वजनिक समीक्षा और नियमित मौका-मुआयना हो।

तीसरी, स्थायी पानी और सीवेज ढांचा: उंड्री हिलटॉप के लिए पाइप नेटवर्क और ऊंची टंकी का बजट सहित कार्यक्रम छपे, ड्रेनेज लाइनें चालू सीवेज नेटवर्क से जुड़ें और पानी व सीवेज पर अलग से खर्च करने वालों को राहत पर विचार हो। चौथी, वार्ड 41 में 2017 से प्रॉपर्टी टैक्स वसूली और पूंजीगत खर्च के वार्डवार आंकड़े छपें और स्थानीय ढांचे के लिए फंड का तय हिस्सा रखा जाए। पांचवीं, ड्राफ्ट प्लान में प्रस्तावित चौड़ाई के हिसाब से सड़कें बनें, जिनमें कड नगर, उंड्री चौक और होलेवस्ती लिंक रोड को प्राथमिकता मिले।

छठी, अतिक्रमण हटें: PMC और ट्रैफिक पुलिस साझा अभियान चलाएं, फिर नियमित कार्रवाई हो और सड़क किनारे के कारोबार की दी गई अनुमतियां सार्वजनिक हों। सातवीं, पुलिसिंग मजबूत हो: रहेजा सर्कल के पास पुलिस चौकी, अलग ट्रैफिक पोस्ट, अहम जगहों पर CCTV और ज्यादा रात की गश्त। आठवीं, पानी टैंकरों का नियमन: लाइसेंस वाले ऑपरेटर, पारदर्शी रेट, नियमित सुरक्षा जांच और उल्लंघन पर कार्रवाई की नीति बने, और जहां टैंकरों में वादा किए कैमरे या सहायक नहीं हैं वहां 200 रुपये का अतिरिक्त सुरक्षा सरचार्ज लौटाया जाए।

निवासियों ने उन इलाकों में निर्माण मंजूरियों की समीक्षा और उंड्री की राजनीतिक जवाबदेही पर साफ जवाब की भी मांग की है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने कदम नहीं उठाया तो वे आगे कानूनी रास्ते भी अपना सकते हैं, जिनमें समय-सीमा वाले निर्देशों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट जाना शामिल है।

उंड्री के लोगों की मांग सीधी है: स्थायी नागरिक सुविधाएं, सार्वजनिक पैसे का पारदर्शी इस्तेमाल और देरी की जवाबदेही। उनका कहना है कि विलय के नौ साल बाद शहर के स्तर का टैक्स देने का मतलब गांव जैसी सेवाओं और खरीदे हुए पानी पर निर्भर रहना नहीं होना चाहिए।

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