बावधन के रायन इंटरनेशनल स्कूल में दाखिले से पहले पालक क्या जानें और क्या पूछें
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पुणे के बावधन में ICSE बोर्ड का रायन इंटरनेशनल स्कूल 2014 में शुरू हुआ था। दाखिले की सोच रहे पालकों के लिए स्कूल की सुविधाएं और वे बातें, जो सीधे स्कूल से पक्की करनी होंगी।
पुणे के बावधन में स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल, रायन ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस का हिस्सा है। स्कूल आदित्य शगुन निसर्ग, मुंबई-बैंगलोर बायपास हाईवे पर सहगल ऑटोमोबाइल्स के बगल में है और इसका पिन कोड 411021 है। स्कूल 2014 में शुरू हुआ, ICSE पाठ्यक्रम पढ़ाता है और को-एजुकेशनल है। स्कूल की मौजूदा आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक यहां मॉन्टेसरी से दसवीं तक पढ़ाई होती है और प्राइमरी सेक्शन की कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एग्जामिनेशंस से संबद्धता है। माध्यम अंग्रेज़ी है। प्रिंसिपल का नाम प्रोफाइल में आरती चनाना (Arti Chanana) दिया गया है।
पालकों को एक बात खास तौर पर समझनी चाहिए। रायन ग्रुप के स्कूल देश भर में CBSE, ICSE और दूसरे बोर्ड के तहत चलते हैं, इसलिए यहां दी गई जानकारी सिर्फ बावधन वाले स्कूल की है। इसे किसी दूसरे रायन कैंपस पर अपने आप लागू नहीं किया जा सकता। स्कूल के सार्वजनिक पेज पर ग्रुप स्तर की और कैंपस की जानकारी मिली-जुली है, इसलिए कौन सी कक्षाएं और कौन से विषय अभी बावधन में चल रहे हैं, यह पूछकर पक्का कर लेना ठीक रहेगा।
पढ़ाने के तरीके में स्कूल एक्टिविटी-बेस्ड, कोलैबोरेटिव और एक्सपीरियंशियल लर्निंग का नाम लेता है। उसका कहना है कि वह पुराने शिक्षण सिद्धांतों को नए प्रोग्रामों के साथ जोड़ता है। स्कूल अपनी सोच को KASSM अप्रोच बताता है, यानी Knowledge, Attitude, Skills, Social values और Moral values। उसका लक्ष्य बच्चों को पढ़ाई, समाज, भावनाओं और नैतिकता, चारों में आगे बढ़ाना और ज़िम्मेदार ग्लोबल सिटिजन बनाना है।
टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर कैंपस में अटल टिंकरिंग लैब (ATL) और इनोवेशन लैब है। स्कूल के मुताबिक ATL में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, फिज़िकल कंप्यूटिंग, डिज़ाइन, प्रॉब्लम सॉल्विंग, फैब्रिकेशन, इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसे काम होते हैं। इनोवेशन लैब में बच्चे सामग्री के साथ काम करते हैं और मैकेनिक्स, केमिकल्स व प्रोडक्ट बनाने को परखते हैं। हालांकि सभी कक्षाओं में औपचारिक AI पाठ्यक्रम होने के कैंपस-स्तर के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। कोडिंग और रोबोटिक्स कक्षा के हिसाब से कैसे चलते हैं, यह भी सीधे स्कूल से पूछना होगा। यही बात फाइनेंशियल लिटरेसी के औपचारिक कार्यक्रम पर भी लागू होती है।
खेल के लिए स्कूल अपनी सुविधाओं में फुटबॉल टर्फ, बास्केटबॉल कोर्ट और इंडोर स्विमिंग पूल गिनाता है। रायन ग्रुप ने 2026 में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के साथ साझेदारी की घोषणा की, ताकि उसके स्कूलों में फुटबॉल और फुटसल के संगठित कार्यक्रम शुरू हों। पर यह देखना होगा कि ऐसे ग्रुप-स्तर के कार्यक्रम बावधन में अभी चल रहे हैं या नहीं। यही सावधानी मॉडल यूनाइटेड नेशंस, थिएटर, संगीत, नृत्य, इंटरनेशनल ट्रिप और ग्रुप के इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स फेस्टिवल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स जैसी गतिविधियों पर भी रखनी चाहिए।
लैब की बात करें तो कैंपस में फिज़िक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, आईटी और मैथ्स की लैब, स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल क्लासरूम तकनीक बताई गई है। स्कूल का कहना है कि हर क्लास में करीब 30 बच्चे होते हैं, जिससे हर बच्चे पर अलग से ध्यान दिया जा सकता है। स्कूल खुद को सुरक्षित और मददगार माहौल वाला बताता है और कहता है कि रायन स्कूल चाइल्ड-प्रोटेक्शन और सेफ्टी मानकों का पालन करते हैं। लेकिन बावधन में काउंसलर या स्पेशल एजुकेटर कितने हैं, इसकी ताज़ा सार्वजनिक जानकारी नहीं मिली। पालक CCTV, फायर सेफ्टी, स्कूल बस और स्विमिंग पूल की सुरक्षा के इंतज़ाम भी खुद पूछ लें।
फीस के बारे में बावधन कैंपस की सभी कक्षाओं की भरोसेमंद, ताज़ा फीस सूची सार्वजनिक रूप से नहीं मिली, इसलिए पुराने आंकड़े यहां नहीं दिए गए। ट्रांसपोर्ट की फीस भी स्कूल से ही लेनी होगी। पालकों को चाहिए कि वे ताज़ा फीस शीट मांगें और रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, ट्यूशन, सालाना शुल्क, किताबें, यूनिफॉर्म, परीक्षा और टेक्नोलॉजी के शुल्क अलग से पूछें, क्योंकि तुलना कुल सालाना खर्च की होनी चाहिए, सिर्फ ट्यूशन फीस की नहीं।
दाखिले के लिए रायन की डिजिटल प्रणाली केंद्रीय है, पर हर कैंपस अपनी ज़रूरतें और उपलब्ध सीटें खुद संभालता है। ग्रुप के 40 से ज़्यादा शहरों में स्कूल हैं और मौजूदा रायन छात्र तय प्रक्रिया के तहत इंटर-रायन ट्रांसफर मांग सकते हैं। बावधन के 2026-27 और 2027-28 के दाखिले की तारीखें सीधे कैंपस से पक्की करें। साथ ही ICSE दसवीं के नतीजे, विषयवार प्रदर्शन और आगे की पढ़ाई के आंकड़े भी बावधन के ही मांगें, क्योंकि किसी दूसरे रायन कैंपस के नतीजे यहां के नहीं माने जा सकते। स्कूल के आने-जाने का समय भी पहले परख लें, क्योंकि पुणे के ट्रैफिक में कम दूरी भी लंबा सफर बन जाती है।
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