प्रगतिशील छात्र संगठन 2 नवंबर से SPPU में चलाएंगे "सेव यूनिवर्सिटी डेमोक्रेसी" आंदोलन
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छात्र संगठनों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन कैंपस में विरोध और बोलने के अधिकार को सीमित कर रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुणे के कई प्रगतिशील छात्र संगठन 2 नवंबर से सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) में आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन कैंपस में छात्रों के विरोध करने और खुलकर बोलने के अधिकार को सीमित कर रहा है। इस मुहिम का नाम "सेव यूनिवर्सिटी डेमोक्रेसी" रखा गया है।
आंदोलन का फैसला गुरुवार, 29 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी में हुई एक बैठक में लिया गया। बैठक में कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि आए थे। उनका कहना था कि कैंपस में लोकतांत्रिक जगह लगातार सिकुड़ती जा रही है और इसके खिलाफ वे मिलकर आवाज उठाएंगे।
छात्र संगठनों का दावा है कि यूनिवर्सिटी की मैनेजमेंट काउंसिल ने इस साल अगस्त में एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें विरोध प्रदर्शन, मार्च और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर होने वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाई गई है। उन्होंने 2024 के एक सर्कुलर का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक इसमें कहा गया है कि छात्रों को प्रदर्शन से कम से कम आठ दिन पहले इजाजत लेनी होगी और बिना मंजूरी के हुए कार्यक्रमों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
छात्र नेताओं का कहना है कि ऐसे नियमों से छात्र अपने भविष्य से जुड़े मुद्दे नहीं उठा पाएंगे, जैसे NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियां। उन्होंने कैंपस के गेट पर होने वाली पहचान की जांच और मुख्य एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग में छात्रों के जाने पर लगी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उनकी राय में सुरक्षा के इंतजाम खुले कैंपस की कीमत पर नहीं होने चाहिए।
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कुछ दूसरे विचारधारा वाले समूहों से जुड़े कार्यक्रमों को कैंपस में होने दिया जाता है, जबकि प्रगतिशील छात्र संगठनों के सामने अड़चनें खड़ी की जाती हैं। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सभी छात्र समूहों के साथ बराबरी का बर्ताव करने की मांग की है।
NSUI की पुणे यूनिट के उपाध्यक्ष सिद्धांत जांभुळकर ने कहा कि यूनिवर्सिटी को संवैधानिक मूल्यों और विचारों की आजादी के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन अब प्रशासन खुलेपन के बजाय कंट्रोल को तरजीह देता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र संवैधानिक तरीके से और सड़क पर भी लड़ेंगे। उनके शब्दों में, "लोकतंत्र को दबाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स स्ट्रगल एक्शन कमेटी की SPPU यूनिट के अध्यक्ष अभिषेक शेळके ने सवाल उठाया कि सत्ताधारी पार्टी के करीबी समूहों को कार्यक्रमों की इजाजत मिल जाती है, तो प्रगतिशील संगठनों को क्यों रोका जाता है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक रहेगा और संविधान के दायरे में ही चलेगा।
बैठक में जांभुळकर और शेळके के अलावा रिपब्लिकन विद्यार्थी परिषद के सूरज गायकवाड, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के अजय बनसोडे, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के पवन जाधव, सम्यक विद्यार्थी आंदोलन के प्रज्योत गायकवाड और न्यू स्टूडेंट्स एंड यूथ फेडरेशन की धनश्री लवांड मौजूद थे। दूसरे छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी बैठक में आए थे।
संगठनों ने बताया कि 2 नवंबर का आंदोलन कैंपस में लोकतांत्रिक जगह को बचाने, शांतिपूर्ण विरोध पर लगी रोक का विरोध करने और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों व अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान पक्का करने पर केंद्रित रहेगा।
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