एसटी की अतिरिक्त जमीनों पर PPP से होगा विकास, 98 साल तक के लीज को सरकार की मंजूरी
राज्य सरकार ने एसटी महामंडल की अतिरिक्त जमीनों को PPP के जरिए विकसित करने और 49+49 साल का लीज देने की इजाजत दे दी है। हर जगह के लिए अलग टेंडर निकालना जरूरी होगा।
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महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल यानी एसटी की अतिरिक्त जमीनों से कमाई बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इन जमीनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत विकसित करने की मंजूरी दी है। इसके लिए 49+49 साल, यानी कुल 98 साल तक का लीज दिया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे एसटी की संपत्ति से नियमित और लंबे समय तक चलने वाली आमदनी का रास्ता खुल गया है।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। समिति के अध्यक्ष परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक हैं। फैसले के मुताबिक एसटी की आर्थिक हालत मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी और जमीनों का इस्तेमाल योजना बनाकर और पारदर्शी तरीके से कमर्शियल कामों में किया जा सकेगा।
सरकारी निर्णय के अनुसार कई तरह की जमीनों पर PPP के तहत प्रोजेक्ट चलाए जा सकेंगे। इनमें एसटी की अपनी मिल्कियत की जमीन, भूमि अर्जन यानी जमीन अधिग्रहण से मिली जमीन, पहले के रोड ट्रांसपोर्ट विभाग से ट्रांसफर हुई जमीन, किराए के करार पर ली गई जमीन और दानपत्र यानी गिफ्ट डीड से मिली जमीन शामिल हैं। हर जगह के लिए अलग टेंडर निकालना जरूरी कर दिया गया है।
PPP के तहत विकास के लिए जो व्यावहारिक प्रोजेक्ट आखिरी चरण में हैं, उन्हें महाराष्ट्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी नीति, 2026 के तहत कुछ रियायतें देने का प्रावधान भी किया गया है। प्रोजेक्ट के टेंडर, कंसेशन एग्रीमेंट और व्यावहारिक ढांचे के लिए संबंधित समिति की मंजूरी ली जाएगी। इसके अलावा हर प्रोजेक्ट के आखिरी टेंडर को मुख्यमंत्री स्तर पर मंजूरी मिलना जरूरी रहेगा।
लीज की अवधि को लेकर सुबोधकुमार समिति ने सिफारिश की थी। समिति के मुताबिक एसटी की आर्थिक स्थिति देखते हुए लंबे किराए के करार के बजाय अपफ्रंट प्रीमियम के साथ 90 साल का लीज मॉडल महामंडल के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इसके बाद सरकार ने लीज की अवधि बढ़ाकर (49+49) 98 साल तक करने को मंजूरी दी।
महामंडल के पास राज्य भर में करीब 850 जगहों पर 3500 एकड़ से ज्यादा जमीन है। इसका बड़ा हिस्सा अच्छी लोकेशन पर है। अगर इन जमीनों को व्यावसायिक, रिहायशी, औद्योगिक और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए योजना बनाकर विकसित किया जाए, तो महामंडल को अपफ्रंट प्रीमियम के साथ बड़े पैमाने पर नियमित आमदनी मिल सकती है। कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भी महामंडल को हिस्सा मिलेगा, जिससे हर साल की नियमित आमदनी भी होगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा, "एसटी महामंडल की मिल्कियत की जमीनें महामंडल की कीमती धरोहर हैं। इन जमीनों का इस्तेमाल सिर्फ कुछ वक्त की कमाई के लिए नहीं, बल्कि एसटी को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा। पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया, सही कमर्शियल प्लानिंग और PPP के जरिए इस संपत्ति से महामंडल को ज्यादा से ज्यादा आमदनी दिलाना हमारा मुख्य मकसद है।"
सरनाईक ने यह भी कहा, "एसटी की यात्री सेवा को और मजबूत करने के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता जरूरी है। इसलिए महामंडल की अतिरिक्त जमीनों को सही तरीके से विकसित करके जो आमदनी होगी, उसे एसटी की सेवा-सुविधाओं को मजबूत करने में लगाया जाएगा।"