येवला के नागडे शिवार में कोबी 2 रुपये किलो, किसानों ने खड़ी फसल में छोड़ीं भेड़ें
नाशिक के येवला तालुका के नागडे शिवार में कोबी का भाव 2 रुपये किलो रह गया है। लागत भी न निकलने से किसान परेशान हैं।
नाशिक जिले के येवला तालुका में नागडे शिवार के किसान इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं। इलाके में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं और जिन किसानों ने कोबी की फसल ली थी, उन्हें बाजार भाव ने बड़ा झटका दिया है। मंडी में कोबी का भाव सिर्फ 2 रुपये किलो मिल रहा है, इसलिए किसान हताश हैं।
2 रुपये किलो के भाव में किसानों का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। लागत के मुकाबले कमाई इतनी कम है कि हालात गंभीर हो गए हैं। आखिर में किसानों ने खड़ी कोबी की फसल में भेड़ें चरने के लिए छोड़ दीं और उसके बाद फसल पर रोटावेटर चला दिया गया।
सूखे की वजह से किसानों के सामने पानी की बड़ी दिक्कत पहले से थी। उन्होंने बड़ी मेहनत से और अपने खर्च पर खेत में कोबी लगाई थी। मगर बाजार में उम्मीद के मुताबिक भाव नहीं मिला, तो एक बार फिर उनके हाथ निराशा लगी। किसानों का कहना है कि 2 रुपये किलो में कोबी बेचने से बेहतर है कि वे इसे जानवरों को चारे के तौर पर खिला दें।
राज्य में अभी सूखे का संकट है और किसानों की उगाई सब्जियों को सही भाव नहीं मिल रहा। इससे उनके सामने बड़ी आर्थिक मुश्किल खड़ी हो गई है। एक तरफ पानी की किल्लत है, तो दूसरी तरफ बाजार भाव गिर गए हैं। पानी न होने से फसल बचाना मुश्किल है और जो सब्जी मेहनत से उगाई, उसे कौड़ियों के भाव में बेचना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत निकलना भी कठिन हो गया है।
इस हालत से निकलने और नुकसान कम करने के लिए किसानों के वास्ते कुछ उपाय और विकल्प आजमाना जरूरी बताया गया है। इनमें सबसे पहली बात यह है कि किसानों की सब्जी सीधे ग्राहकों तक पहुंचे। बिचौलियों की कड़ी तोड़ने के लिए किसान साप्ताहिक बाजार, हाउसिंग सोसायटियों या सीधे शहरों में जाकर अपना माल बेच सकते हैं। इससे ग्राहकों को ताजा माल मिलेगा और किसानों को अच्छा भाव भी मिलेगा।
इलाके के किसान मिलकर किसान उत्पादक कंपनी (FPC) बना सकते हैं। मिलकर बेचने से ढुलाई का खर्च बचेगा और बाजार में व्यापारियों से भाव पर मोलभाव करने की ताकत बढ़ेगी।
सब्जी जल्दी खराब होने वाली चीज है। बाजार में भाव न हो तो उसे फेंकने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग करना फायदेमंद रहता है। पानी के संकट को देखते हुए पारंपरिक तरीके से पानी देने की जगह ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल करना चाहिए। सूखा प्रभावित इलाकों के लिए सरकार से मिलने वाले अनुदान, फसल बीमा (Crop Insurance) और बिजली बिल में छूट की जानकारी के लिए किसान स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।