सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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येमेन में हुथी बंडखोरों की मिसाइलों से 73 की मौत, ढाई लाख से ज्यादा लोग बेघर

येमेन में हुथी बंडखोरों की मिसाइलों से 73 की मौत, ढाई लाख से ज्यादा लोग बेघर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

येमेन में हिंसा एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। खबर है कि हुथी बंडखोरों ने सरकारी फौज के एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं और इस हमले में 73 लोगों की मौत हो गई। मध्यपूर्व में चल रहे संघर्ष की तीव्रता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।

हमले के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है। बताया गया है कि हमले के वक्त प्रशिक्षण केंद्र में सैन्यकर्मी और प्रशिक्षु मौजूद थे, इसी वजह से भारी नुकसान हुआ। धमाके के बाद इलाके में धुएं के गुबार फैल गए और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों की संख्या 73 तक पहुंचने की खबर है। सरकारी फौज और हुथी बंडखोरों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

सैन्य ठिकानों पर हमलों, हथियारबंद झड़पों और बढ़ती हिंसा की मार आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रही है। बड़ी तादाद में लोगों को अपना घर छोड़कर महफूज जगहों पर पनाह लेनी पड़ रही है।

संयुक्त राष्ट्र की जानकारी के मुताबिक जुलाई से संघर्ष फिर तेज होने के बाद ढाई लाख से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। कई परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। लेकिन बेघर हुए इन लोगों के सामने खाने, पानी, दवाओं और रहने की जगह की बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को इस हालात में सबसे ज्यादा तकलीफ झेलनी पड़ रही है।

येमेन के संघर्ष का असर अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास सैन्य हलचल की वजह से लाल सागर में व्यापारी जहाजों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की ढुलाई के लिए अहम है, इसलिए इस इलाके की अस्थिरता का असर दुनिया के व्यापार पर पड़ने की आशंका है।

इसी बीच ब्रिटेन ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए रॉयल एयर फोर्स के टायफून लड़ाकू विमान तैनात करने का फैसला किया है। इससे येमेन के संघर्ष को इलाके के स्तर पर और गंभीर रूप मिल रहा है।

येमेन में पिछले करीब दस साल से चल रहे संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था, सेहत की व्यवस्था और सामाजिक हालात को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। नए हमलों से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। युद्ध रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिश की जरूरत बताई गई है, वरना येमेन का मानवीय संकट और भयावह हो सकता है।

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