सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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09:13 IST

यावल में प्याज की पौध के खरीदार नहीं, किसान मुफ्त बांटने को तैयार फिर भी कोई नहीं ले रहा

यावल तालुका के पश्चिम भाग में प्याज़ की पौध बिक नहीं रही। किसान अब इसे मुफ्त देने को तैयार हैं।

यावल में प्याज की पौध के खरीदार नहीं, किसान मुफ्त बांटने को तैयार फिर भी कोई नहीं ले रहा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

यावल (वा) तालुका के पश्चिम भाग में प्याज़ की रोपाई अब आखिरी दौर में पहुंच गई है। रबी सीज़न की कुल रोपाई में किसानों ने सबसे ज्यादा रकबा प्याज़ पर ही लगाया है। यह रोपाई अगस्त की शुरुआत से चल रही है और अब खत्म होने को है।

इसके बावजूद अभी भी काफी रकबा बिना रोपाई के पड़ा है, क्योंकि पानी की कमी और पैसों की तंगी के चलते किसान रोपाई नहीं कर पा रहे। बहुत से किसानों ने प्याज़ का बीज खरीदकर उसकी पौध तैयार की थी। मगर आज की हालत में इन पौधों को कोई खरीदने को तैयार नहीं है, इसलिए पौधों की बुरी हालत हो गई है। किसान पौध मुफ्त देने को राजी हैं, लेकिन मुफ्त में भी कोई किसान इन्हें लेने नहीं आ रहा। नतीजा यह कि ये पौधे अब फेंकने लायक हो गए हैं।

किसानों का सिलसिला यह रहता है कि जून-जुलाई के महीने में 800 से 900 रुपये किलो के भाव से प्याज़ का बीज खरीदते हैं, खेत में उसकी पौध तैयार करते हैं और पौध तैयार होने पर खेत में रोपाई करते हैं। अगस्त के पहले हफ्ते में इसी पौध की 100 फुट लंबाई और तीन फुट चौड़ाई के क्षेत्र की बिक्री 3 हजार रुपये में हो रही थी।

अब इसी आकार की पौध का दाम 700 से 800 रुपये बताया जा रहा है, पर इस भाव पर भी कोई नहीं ले रहा। आखिर में कई किसानों ने पौध मुफ्त देने का फैसला किया है। किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर किसी ने नहीं ली तो पौधों पर बखर चला दिया जाएगा। इसकी वजहों में सूखे की मार, पानी के स्तर में गिरावट, आर्थिक संकट, कर्ज़दारी और महंगाई की चोट जैसी कई बातें गिनाई जा रही हैं।

दहिगाव के किसान भूषण माली ने कहा, "हम हर साल बड़े पैमाने पर प्याज़ की रोपाई करते हैं। प्याज़ का बीज खरीदकर पौध तैयार करना और किसानों को बेचना, साथ ही अपने खेत में भी प्याज़ लगाना, यही हमारा खेती का धंधा है। लेकिन इस साल कोई पौध लेने को तैयार नहीं, इसलिए आखिर हम मुफ्त देने को भी तैयार हैं।"

माली ने आगे कहा, "फिर भी कोई किसान पौध ले जाने को तैयार नहीं है, ऐसी हमारी हालत हो गई है। आखिर में हम पौध उखाड़कर या उस पर हल और बखर फिराकर उसे फेंक देने का फैसला करने वाले हैं।"

किसान इस हालत से परेशान हैं। किसानों के बीच यह बात कही जा रही है कि सरकार को इस गंभीर मामले पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है और पानी योजना के लिए उपाय किए जाने चाहिए।

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