शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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12:33 IST

विश्व स्पाइन दिवस: घंटों कंप्यूटर पर बैठने वाले कैसे रखें रीढ़ की हड्डी का खयाल

हर साल 16 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्पाइन दिवस पर जानिए, रीढ़ की हड्डी पर बढ़ते खतरे और अस्थिरोग विशेषज्ञों व फिजियोथेरपिस्ट के बताए उपाय।

विश्व स्पाइन दिवस: घंटों कंप्यूटर पर बैठने वाले कैसे रखें रीढ़ की हड्डी का खयाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हर साल 16 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व स्पाइन दिवस मनाया जाता है। हमारे शरीर का सबसे अहम और मजबूत सहारा रीढ़ की हड्डी है। सीधे खड़े होना, चलना, झुकना या कोई भी हरकत करना, यह सब रीढ़ के लचीलेपन पर ही टिका है। लेकिन आज की भागदौड़ और स्क्रीन वाली जिंदगी में सबसे ज्यादा अनदेखी इसी की हो रही है। नतीजा यह कि किसी भी उम्र में लोग पीठ दर्द, गर्दन दर्द और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी तकलीफों से जूझ रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में विकलांगता या काम न कर पाने की एक बड़ी वजह पीठ दर्द है। इसी वजह से हर साल 16 अक्टूबर को अलग-अलग स्वास्थ्य संगठन, अस्पताल और डॉक्टर हेल्थ कैंप, योगासन और परिसंवाद करते हैं। इन सबका मकसद लोगों को रीढ़ की सेहत के बारे में जागरूक करना है। साथ ही गंभीर बीमारियों से बचने के लिए सही जीवनशैली अपनाने के लिए उन्हें प्रेरित करना भी इनका मकसद है।

रीढ़ के असली दुश्मन हमारी रोज की आदतें बताई गई हैं। आईटी सेक्टर में काम करने वाले, वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारी और घंटों स्मार्टफोन पर गेमिंग या स्क्रोलिंग करने वाले युवाओं में टेक्स्ट नेक सिंड्रोम (Text Neck Syndrome) और लंबर स्पाइन स्ट्रेन (Lumbar Spine Strain) के मामले काफी बढ़ गए हैं। जब हम गर्दन झुकाकर मोबाइल देखते हैं, तो रीढ़ पर उसके प्राकृतिक वजन से तीन गुना ज्यादा दबाव पड़ता है।

इसके अलावा ऑफिस में घंटों एक ही हालत में बैठे रहना, पीठ झुकाकर बैठना, नरम गद्दों पर सोना और बिल्कुल कसरत न करना भी रीढ़ की डिस्क (Discs) पर फालतू दबाव डालता है। वक्त के साथ यह तनाव सायटिका (Sciatica), स्लिप डिस्क (Slip Disc) या रीढ़ की नसें दबने के रूप में सामने आता है। वक्त पर ध्यान न दिया जाए तो ऑपरेशन की नौबत आ सकती है।

विश्व स्पाइन दिवस के मौके पर अस्थिरोग विशेषज्ञ और फिजियोथेरपिस्ट रीढ़ की सेहत के लिए कुछ आसान उपाय बताते हैं। उनके मुताबिक रोज की दिनचर्या में छोटे बदलाव करने से रीढ़ की ताकत और लचीलापन बना रह सकता है।

पहला उपाय बैठने के तरीके का है। कुर्सी पर बैठते समय पीठ सीधी और टिकी हुई रहनी चाहिए। कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों की सीध में हो, ताकि गर्दन झुकानी न पड़े। हर 45 से 50 मिनट में कुर्सी से उठकर 2 से 3 मिनट टहलना या स्ट्रेचिंग करना चाहिए।

दूसरा उपाय नियमित कसरत और योगासन का है। भुजंगासन, मार्जारासन (Cat-Cow pose), ताड़ासन और नौकासन जैसे योगासन रीढ़ का लचीलापन बढ़ाते हैं। इसके साथ रोज 30 मिनट तेज चलने या तैराकी (Swimming) से पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

तीसरा उपाय भारी सामान उठाने के तरीके का है। जमीन से कोई भारी चीज उठाते समय कमर से सीधे न झुकें। घुटने मोड़कर नीचे बैठें, सामान को शरीर के पास पकड़ें और धीरे-धीरे उठें। इससे कमर की रीढ़ पर अचानक जोर नहीं पड़ता।

चौथा उपाय संतुलित खानपान और धूप का है। रीढ़ की हड्डियां मजबूत रहने के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी (Vitamin D) बहुत जरूरी है। रोज के खाने में दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल और सूखे मेवे शामिल करने को कहा गया है। साथ ही रोज सुबह 10 से 15 मिनट हल्की धूप में बैठना चाहिए।

कहा जाता है कि स्वस्थ रीढ़ का मतलब स्वस्थ और लंबी उम्र है। यह बात शरीर की बनावट में रीढ़ की केंद्रीय जगह को साफ करती है। जब रीढ़ तंदुरुस्त होती है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम (Nervous System) ठीक से काम करता है, जिससे कार्यक्षमता और ऊर्जा दोगुनी हो जाती है।

इसलिए विश्व स्पाइन दिवस पर सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि पूरी उम्र अपने बैठने-उठने के ढंग पर ध्यान देने का संकल्प लेना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल करते समय शरीर की प्राकृतिक बनावट से समझौता न करना, नियमित कसरत करना और वक्त-वक्त पर डॉक्टर की सलाह लेना, ये सादी आदतें पीठ दर्द से मुक्त और खुशहाल जिंदगी में मदद करेंगी।

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