चंद्रपुर में एक ही दिन 11 गोद लेने के मामले निपटे, एक अनाथ बच्चे को माल्टा के माता-पिता मिले
मुंबई उच्च न्यायालय के 4 मई 2026 के आदेश के बाद अंतिम आदेश का अधिकार जिलाधिकारी के पास आया है।
चंद्रपुर में गोद लेने के पेंडिंग मामलों के निपटारे में तेजी आई है। जिलाधिकारी वसुमना पंत के आदेश से जिले में एक ही दिन 11 पेंडिंग मामले निपटा दिए गए।
इन 11 मामलों में चार रिश्तेदारी के भीतर गोद लेने के हैं, चार सौतेले माता या पिता के गोद लेने के हैं और तीन अनाथ बच्चों के हैं। तीन अनाथ बच्चों में से एक को यूरोप के माल्टा में रहने वाले माता-पिता का साथ मिला। दूसरे बच्चे के माता-पिता कर्नाटक के हुबली के हैं और तीसरे बच्चे के माता-पिता महाराष्ट्र के ठाणे के हैं।
गोद लेने के मामलों में आखिरी आदेश देने का अधिकार अब जिलाधिकारी के पास आया है। यह अधिकार मुंबई उच्च न्यायालय के 4 मई 2026 के आदेश के बाद मिला। बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में साल 2021 में हुए संशोधन के तहत गोद लेने के मामलों में अंतिम आदेश का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया गया था।
इस प्रावधान के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय में रिट याचिका क्रमांक 32065/2022 दाखिल की गई थी। इस मामले में उच्च न्यायालय ने 4 मई 2026 को दिए आदेश में बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (संशोधित अधिनियम 2021) और उससे जुड़े प्रावधानों की वैधता बरकरार रखी। इसके मुताबिक दत्तक नियमावली, 2022 के तहत गोद लेने के मामलों में अंतिम आदेश देने का अधिकार जिलाधिकारी के पास है।
इस फैसले के बाद जिला न्यायालय, चंद्रपुर के कुल 11 पेंडिंग मामले आखिरी आदेश के लिए जिलाधिकारी, चंद्रपुर के पास भेजे गए थे। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मीनाक्षी भस्मे के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण कक्ष के जिला बाल संरक्षण अधिकारी अजय साखरकर और विधि तथा परिविक्षा अधिकारी सचिंद्र नाईक ने इन सभी मामलों की जरूरी जांच की।
इसके बाद गोद लेने के इच्छुक माता-पिता को जिलाधिकारी वसुमना पंत के सामने पेश किया गया। जरूरी प्रक्रिया पूरी होने पर जिलाधिकारी ने एक ही दिन में सभी 11 मामलों में दत्तक आदेश जारी करके उन्हें निपटा दिया।
इससे पहले साल 2022 में जिलाधिकारी, चंद्रपुर के आदेश से एक दत्तक मामला निपटाया गया था। उसके बाद अदालती प्रक्रिया की वजह से गोद लेने के मामलों की कार्रवाई जिला न्यायालय के जरिए हो रही थी।
अब अंतिम आदेश का अधिकार जिलाधिकारी के पास आने से गोद लेने की प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेज होने की उम्मीद है। गोद लेने के इच्छुक माता-पिता को प्रक्रिया में जो देरी होती थी, वह भी कम होगी।
गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी अजय आर. साखरकर ने लोगों से संपर्क करने की अपील की है। संपर्क का पता है जिला बाल संरक्षण कक्ष, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी कार्यालय, आकाशवाणी के पीछे, जिला स्टेडियम के पास, साईबाबा वार्ड, चंद्रपुर। चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर भी संपर्क किया जा सकता है।