वाशिम में 2 लाख 85 हजार बच्चों को मिलेगी पेट के कीड़ों की गोली, कलेक्टर ने दिए निर्देश
वाशिम जिले में मंगलवार को राष्ट्रीय जंतनाशक दिन मनाया जाएगा। कलेक्टर योगेश कुंभेजकर ने कहा कि कोई भी पात्र बच्चा गोली से छूटना नहीं चाहिए।
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वाशिम जिले में बच्चों की सेहत ठीक रखने के लिए मंगलवार को राष्ट्रीय जंतनाशक दिन अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में 1 से 19 साल की उम्र के 2 लाख 85 हजार 847 बच्चों को अल्बेंडाझोल की जंतनाशक गोली देने का लक्ष्य रखा गया है।
कलेक्टर योगेश कुंभेजकर ने निर्देश दिए कि जिले का एक भी पात्र बच्चा इस इलाज से छूट न जाए, इसका पूरा ध्यान रखा जाए। जिला समन्वय समिति की बैठक शुक्रवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई थी। उसी में उन्होंने ये निर्देश दिए।
बैठक में जिला शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल कावरखे और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेमकुमार ठोंबरे के साथ स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी खास तौर पर मौजूद थे। यह अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान और जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग मिलकर चला रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला व बाल विकास विभाग आपस में तालमेल से काम करें। स्कूल से बाहर के बच्चों तक भी पहुंचकर उन्हें गोली देने का इंतजाम किया जाए।
बच्चों के शारीरिक और दिमागी विकास के लिए यह अभियान अहम है। पेट में कीड़े होने से कमजोरी, कुपोषण और पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इन्हीं परेशानियों से बचाने के लिए तय कार्यक्रम के हिसाब से पात्र बच्चों को गोली दी जाएगी। कलेक्टर कुंभेजकर ने माता-पिता से अपील की कि अफवाहों पर भरोसा न करें और स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन के मुताबिक अभियान में साथ दें।
तहसील के हिसाब से लाभार्थी बच्चों की गिनती इस तरह है। वाशिम तहसील में 78 हजार 132, कारंजा में 50 हजार 545, रिसोड में 45 हजार 588, मानोरा में 39 हजार 1, मालेगाव में 37 हजार 339 और मंगरूळपीर में 35 हजार 242 बच्चों को गोली दी जाएगी। सब मिलाकर जिले में 2 लाख 85 हजार 847 बच्चों का लक्ष्य है। अभियान के लिए जिले के 1 हजार 196 आंगनवाड़ी केंद्र, 1 हजार 224 स्कूल और 286 कॉलेज की मदद ली जाएगी। इस काम में 1 हजार 75 आशा स्वयंसेविकाएं और 166 आरोग्य सेविकाएं लगी रहेंगी।
गोली की मात्रा उम्र के हिसाब से तय है। 1 से 2 साल के बच्चों को 200 मि.ग्रा. यानी आधी गोली दी जाएगी। 2 से 19 साल के बच्चों और किशोर लड़के-लड़कियों को 400 मि.ग्रा. यानी पूरी एक गोली मिलेगी। स्कूलों के विद्यार्थियों को शिक्षक और स्वास्थ्य कर्मचारी गोली खिलाएंगे। आंगनवाड़ी के बच्चों और स्कूल से बाहर के बच्चों को आंगनवाड़ी सेविकाएं गोली देंगी।
जो पात्र बच्चे अभियान के दिन बीमार होंगे या गैरहाजिर रहेंगे, उनके लिए 3 नवंबर को मॉप-अप दिन रखा गया है। उस दिन उन्हें गोली दी जाएगी, ताकि नियमित अभियान में शामिल न हो पाने वाले बच्चों को भी यह इलाज मिल सके।
तैयारी की बात करें तो जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को कुल 3 लाख 26 हजार अल्बेंडाझोल गोलियां बांटी जा चुकी हैं। जिला स्तर के अधिकारियों की कार्यशाला गुरुवार को पूरी हो गई। शनिवार को तहसील और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर शिक्षकों, आशा स्वयंसेविकाओं और आंगनवाड़ी सेविकाओं का प्रशिक्षण पूरा किया जाएगा। हर पात्र बच्चे को गोली मिले, इसके लिए सभी संबंधित विभाग योजना बनाकर काम करें। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से माता-पिता से भी कहा गया है कि वे अपने बच्चों को अभियान में जरूर शामिल करें।
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