गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
01:08 IST

वर्ल्ड आर्थराइटिस डे: जोड़ों के दर्द की वजहें, लक्षण और डॉक्टर को कब दिखाएं

नवी मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स कंसल्टेंट डॉ सुभाष धिवरे ने जोड़ों के दर्द के कारण, लक्षण और जांच के बारे में जानकारी दी है।

वर्ल्ड आर्थराइटिस डे: जोड़ों के दर्द की वजहें, लक्षण और डॉक्टर को कब दिखाएं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वर्ल्ड आर्थराइटिस डे के मौके पर जोड़ों के दर्द यानी मेडिकल भाषा में 'आर्थ्राल्जिया' की बात हो रही है। यह हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास मरीजों के पहुंचने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। इसकी जानकारी कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के कंसल्टेंट (ऑर्थोपेडिक्स) डॉ सुभाष धिवरे ने दी है। उनके मुताबिक यह तकलीफ युवा खिलाड़ियों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है।

शरीर में जहां दो या उससे ज्यादा हड्डियां मिलती हैं, उसे जोड़ कहते हैं। डॉ धिवरे के अनुसार कार्टिलेज जोड़ को गद्दी जैसी सुरक्षा देता है, साइनोवियल फ्लूइड हलचल के लिए चिकनाई का काम करता है, और लिगामेंट, टेंडन और मांसपेशियां उसे मजबूती और स्थिरता देती हैं। इनमें से किसी भी हिस्से में चोट लगे, सूजन आए या घिसावट हो, तो जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है।

डॉ धिवरे ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी जोड़ों की घिसावट का खतरा 40 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा रहता है। इसमें जोड़ों को गद्दी जैसी सुरक्षा देने वाला कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसता जाता है और हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। इसके लक्षणों में हलचल के बाद, खासकर सीढ़ियां चढ़ते-उतरते वक्त दर्द बढ़ना, सुबह उठने पर जोड़ों का जकड़ जाना (जो आम तौर पर 30 मिनट के अंदर ठीक हो जाता है) और हलचल के दौरान जोड़ों से कट-कट की आवाज आना शामिल है। यह तकलीफ मुख्य रूप से घुटनों, कूल्हों, रीढ़ और हाथों के जोड़ों में होती है। डॉक्टर के मुताबिक मोटापा, पुरानी चोट, बढ़ती उम्र और आनुवंशिकता इसके मुख्य कारण हैं।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस में, जिसे आम बोलचाल में आमवात कहते हैं, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से जोड़ों की अंदरूनी परत पर हमला कर देती है। इसमें हाथ-पैर के छोटे जोड़ों में दोनों तरफ बराबर सूजन आती है। डॉ धिवरे के अनुसार सुबह के वक्त जोड़ों का एक घंटे से ज्यादा जकड़े रहना, जोड़ों पर गर्माहट महसूस होना, बहुत ज्यादा थकान और कभी-कभी बुखार भी इसके लक्षण हैं। अंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस, सोरियाटिक आर्थराइटिस और ल्यूपस भी जोड़ों के दर्द और सूजन की वजह बन सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि इन बीमारियों का जल्द पता चलना जरूरी है, क्योंकि इलाज में देरी हुई तो जोड़ हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं और उनकी शक्ल बदल सकती है।

चोटें भी दर्द की आम वजह हैं। डॉ धिवरे ने बताया कि फ्रैक्चर, लिगामेंट फटना (जैसे एंटीरियर क्रुशिएट लिगामेंट यानी एसीएल की चोट), मेनिस्कल टियर, जोड़ का उखड़ना और मोच खेलते वक्त या सड़क हादसों में लगने वाली आम चोटें हैं जिनसे जोड़ों का दर्द शुरू होता है। शुरुआत में मामूली लगने वाली चोट की भी अगर ठीक से जांच और इलाज न हो, तो आगे चलकर उम्र से पहले ऑस्टियोआर्थराइटिस हो सकता है।

किसी जोड़ या उसके आसपास के ऊतकों पर लगातार और बार-बार पड़ने वाले जोर से टेंडिनाइटिस, बर्साइटिस, टेनिस एल्बो और रनर्स नी जैसी तकलीफें हो सकती हैं। डॉक्टर के मुताबिक जिन कामों में बार-बार वजन उठाना पड़ता है, उठना-बैठना पड़ता है या हाथ की एक ही हरकत दोहरानी पड़ती है, उनमें इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।

खून में यूरिक एसिड ज्यादा हो जाए तो जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल बनने लगते हैं और इससे 'गाउट' की बीमारी होती है। डॉ धिवरे के अनुसार इन क्रिस्टल्स से जोड़ में अचानक तेज दर्द, सूजन, लालिमा और छूने तक की बर्दाश्त न होना जैसी तकलीफ होती है। इसका असर ज्यादातर पैर के अंगूठे की जड़ वाले जोड़ पर पड़ता है। खान-पान की कुछ चीजें, शराब, शरीर में पानी की कमी और कुछ खास दवाएं गाउट की तकलीफ अचानक बढ़ा सकती हैं।

जोड़ों में संक्रमण, यानी 'सेप्टिक आर्थराइटिस', को डॉ धिवरे ने ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी बताया है, जिसमें फौरन इलाज चाहिए। जोड़ का बहुत गरम होना, सूज जाना और तेज दर्द होना, खासकर जब साथ में बुखार भी हो, इसके मुख्य संकेत हैं। उनके मुताबिक वक्त पर इलाज न मिले और संक्रमण काबू में न आए, तो बहुत कम समय में जोड़ को गंभीर और स्थायी नुकसान हो सकता है।

पोषण और जीवनशैली को लेकर डॉक्टर ने कहा कि विटामिन डी की कमी, खाने में कैल्शियम की कमी और ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इससे हड्डियां दुख सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है। बहुत सुस्त या बैठी रहने वाली जीवनशैली जोड़ों को सहारा देने वाली मांसपेशियों को कमजोर कर सकती है, जबकि शरीर का ज्यादा वजन भार उठाने वाले जोड़ों पर जोर बढ़ा देता है। उनके मुताबिक बढ़े हुए वजन से रोजमर्रा की साधारण हरकतों में भी घुटनों पर पड़ने वाला दबाव काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा गलत बॉडी पोस्चर, फ्लैट फुट, गलत फुटवियर, मेनोपॉज के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव, जोड़ों की जन्मजात दिक्कतें और रीढ़ से शुरू होकर जोड़ों तक पहुंचने वाला दर्द भी वजह हो सकते हैं।

डॉ धिवरे के मुताबिक अगर जोड़ों का दर्द दो हफ्ते से ज्यादा चले, जोड़ के आसपास सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, शरीर का वजन उठाने में दिक्कत आए या जोड़ पूरा मोड़ना मुश्किल हो, जोड़ की शक्ल बदल जाए या वह अटका हुआ लगे, दर्द के साथ बुखार आए, या रात में तेज दर्द से नींद टूट जाए, तो फौरन हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि जोड़ बहुत गरम और सूजा हुआ हो और साथ में बुखार हो, या अचानक तेज दर्द शुरू हो जाए, तो तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है और ऐसे में दो हफ्ते इंतजार की गलती नहीं करनी चाहिए।

डॉ धिवरे ने बताया कि सही पहचान के लिए आम तौर पर शारीरिक जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, एमआरआई स्कैन, खून की अलग-अलग जांचें (जैसे यूरिक एसिड, ईएसआर, सीआरपी और रूमेटॉइड फैक्टर) या जोड़ के तरल की जांच की जाती है। इलाज में दवाएं, फिजियोथेरेपी, इंजेक्शन, ब्रेसिंग या बीमारी बहुत बढ़ने पर जोड़ बदलने की सर्जरी शामिल हो सकती है।

बचाव के लिए डॉक्टर ने वजन काबू में रखने, तैराकी, साइकिल चलाने और पैदल चलने जैसी जोड़ों पर कम जोर डालने वाली कसरत करने, जरूरत के मुताबिक ट्रेडमिल पर चलने, जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत करने और कसरत से पहले वॉर्म-अप करने की बात कही। साथ ही उठने-बैठने का सही तरीका और सही फुटवियर अपनाने, कैल्शियम और विटामिन डी वाली संतुलित डाइट लेने और धूम्रपान से बचने को कहा, क्योंकि उनके अनुसार धूम्रपान हड्डियों की सेहत और घाव भरने की प्रक्रिया पर बुरा असर डाल सकता है।

डॉ धिवरे का कहना है कि जोड़ों का दर्द बढ़ती उम्र का अपरिहार्य हिस्सा भर नहीं है। कई लोगों में इसके पीछे कोई खास बीमारी या कारण होता है जिसका कामयाब इलाज हो सकता है, लेकिन इसके लिए वक्त पर ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक मूल कारण खोजे बिना लगातार होते दर्द को नजरअंदाज करना या बार-बार सिर्फ दर्द की दवाएं लेते रहना जोड़ों का नुकसान और तेज कर सकता है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे